
Impact of weak rupee: रुपये में गिरावट की खबरें अक्सर अखबारों के बिजनेस पन्नों तक सीमित रहती हैं, लेकिन हकीकत यह है कि यह सीधे आपके बैंक बैलेंस और भविष्य की योजनाओं को प्रभावित करती है। जैसा कि हमने देखा, कमजोर रुपया इंपोर्ट को महंगा बनाता है और डॉलर को मजबूत। इसका सीधा मतलब है कि अगर आप डॉलर खर्च करने वाली कोई भी योजना बना रहे हैं, तो अब आपको अपनी जेब ज्यादा ढीली करनी होगी।
अगर आप विदेश में छुट्टियां मनाने की योजना बना रहे हैं, तो कमजोर रुपया आपके मजे को किरकिरा कर सकता है। डॉलर मजबूत होने का मतलब है कि आपको फ्लाइट टिकट और विदेशी होटलों के लिए रुपयों में ज्यादा भुगतान करना होगा। वहीं, विदेश में घूमते समय वहां की करेंसी (विशेषकर डॉलर) खरीदने के लिए आपको अब ज्यादा रुपये देने होंगे। यानी आपकी विदेश यात्रा का कुल बजट 5-10% तक बढ़ सकता है।
भारतीय छात्रों के लिए विदेश में पढ़ना महंगा हो जाएगा। विदेशी यूनिवर्सिटीज की फीस डॉलर या वहां की स्थानीय करेंसी में होती है। रुपये की वैल्यू कम होने का मतलब है कि हर सेमेस्टर की फीस भरने के लिए आपको भारत से ज्यादा पैसे भेजने होंगे। साथ ही, वहां रहने-खाने का खर्च भी बढ़ जाएगा, जिससे एजुकेशन लोन का बोझ और ईएमआई बढ़ सकती है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत 'इलेक्ट्रिकल मशीनरी और पुर्जों' के लिए 42.9% तक चीन और अन्य देशों के इंपोर्ट पर निर्भर है। चूंकि इन प्रोडक्ट्स के कई कंपोनेंट्स बाहर से आते हैं और इंपोर्ट महंगा हो गया है, इसलिए आने वाले दिनों में मोबाइल, लैपटॉप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स की कीमतों में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। दूसरी तरफ, ऑटोमोबाइल सेक्टर भी कई जरूरी पार्ट्स इंपोर्ट करता है, जिससे कारों की लागत बढ़ सकती है।
भले ही इंपोर्टेड चीजें महंगी हो रही हों, लेकिन आम आदमी के लिए एक बड़ी राहत भी है। जैसा कि आंकड़ों में बताया गया है, भारत में खुदरा मुद्रास्फीति 1% से नीचे आ गई है। इसका मतलब है कि रोजमर्रा की चीजें- जैसे फल, सब्जी, दूध और अनाज के दाम फिलहाल नियंत्रण में हैं। यानी, अगर आपका खर्च पूरी तरह घरेलू चीजों पर है, तो रुपये की गिरावट का आप पर तुरंत कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा। असर उन पर ज्यादा होगा जो 'इंपोर्टेड' लाइफस्टाइल या सेवाओं का उपयोग करते हैं।
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