हर साल बजट से ठीक पहले एक दस्तावेज आता है देश की आर्थिक सेहत का पूरा एक्स-रे पेश करता है। इसे इकोनॉमिक सर्वे कहा जाता है। आमतौर पर बजट से एक दिन पहले संसद में पेश होने वाला यह सर्वे वित्त मंत्रालय की तरफ से तैयार किया जाता है। इसे देश का “आर्थिक रिपोर्ट कार्ड” माना जाता है। बजट 2026 से पहले आने वाला इकोनॉमिक सर्वे इस बार खास है। दरअसल, यह ऐसे वक्त में आएगा जब दुनिया ट्रेड वॉर, जियो-पॉलिटिकल तनाव और स्लो होती ग्लोबल इकॉनमी से जूझ रही है।
क्या बताता है इकोनॉमिक सर्वे?
इकोनॉमिक सर्वे में बीते साल की आर्थिक स्थिति का पूरा ब्यौरा होता है। इसमें GDP ग्रोथ, महंगाई, रोजगार, निवेश, टैक्स कलेक्शन, सरकारी खर्च और अलग-अलग सेक्टर जैसे कृषि, मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेज की परफॉर्मेंस का विश्लेषण किया जाता है। आसान शब्दों में कहें तो यह बताता है कि अर्थव्यवस्था कहां खड़ी है, किस सेक्टर ने अच्छा किया और कहां सरकार को ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है।
इसे कौन करता है तैयार?
यह भारत सरकार के वित्त मंत्रालय के ‘इकोनॉमिक डिवीजन’ द्वारा तैयार किया जाता है। इसकी निगरानी और पूरी जिम्मेदारी मुख्य आर्थिक सलाहकार (CEA) के पास होती है। वर्तमान में यह जिम्मेदारी डॉ. वी. अनंत नागेश्वरन के हाथ में है।
सरकार की आर्थिक सोच भी है सर्वे
इकोनॉमिक सर्वे सिर्फ आंकड़ों का पुलिंदा नहीं होता बल्कि इसमें सरकार की आर्थिक सोच भी झलकती है। हाल के सालों में सर्वे ने सुधारों, डि-रेगुलेशन, निजी निवेश और रोजगार सृजन पर जोर दिया है। माना जा रहा है कि बजट 2026 से पहले आने वाला सर्वे भी ट्रेड वॉर के असर, सप्लाई चेन शिफ्ट और ‘मेक इन इंडिया’ जैसे मुद्दों पर फोकस करेगा।
बजट की दिश तय करेगा सर्वे
कुल मिलाकर, बजट 2026 की दिशा काफी हद तक इकोनॉमिक सर्वे तय करेगा। यह बताएगा कि सरकार किस सेक्टर पर दांव लगाने जा रही है और आम आदमी, उद्योग और निवेशकों को आने वाले साल में क्या उम्मीद रखनी चाहिए। यही वजह है कि बजट से पहले इकोनॉमिक सर्वे को बेहद ध्यान से पढ़ा और समझा जाता है।