INSAS Rifle Production: संसद की एक समिति ने कहा है कि वित्त वर्ष 2015-16 से 2019-20 के बीच, छोटे हथियार बनाने वाले कारखानों को सेना से अपने मुख्य उत्पादों, जैसे 5.56 एमएम इंसास राइफल और 9 एमएम स्वचालित पिस्तौल के लिए कोई मांग नहीं या बहुत कम मांग देखने को मिली। इसके चलते ये आयुध कारखाने मुख्य रूप से गृह मंत्रालय के ऑर्डर पर निर्भर हो गए हैं।
ऑर्डनेंस फैक्ट्रियों को सेना से नहीं मिले पर्याप्त ऑर्डर
बुधवार को संसद में पेश अपनी रिपोर्ट में लोक लेखा समिति (पीएसी) ने कहा कि ऐसी तीन फैक्ट्रियों की पूरी उत्पादन क्षमता का इस्तेमाल करने के लिए सिर्फ गृह मंत्रालय के ऑर्डर 'काफी नहीं' थे। समिति ने कहा कि इस दौरान कुल आपूर्ति में सेना की हिस्सेदारी सिर्फ 10 प्रतिशत थी।
समिति ने दिया बड़ा सुझाव
रक्षा मंत्रालय (रक्षा उत्पादन विभाग) से जुड़ी कैग की 2023 की रिपोर्ट संख्या 5 के आधार पर 'आयुध कारखानों में छोटे हथियारों के उत्पादन' पर अपनी 54वीं रिपोर्ट में समिति ने सुझाव दिया है कि रक्षा मंत्रालय को सेना, गृह मंत्रालय, राज्य पुलिस बलों और 'एडवांस्ड वेपन्स एंड इक्विपमेंट इंडिया लिमिटेड' को शामिल करते हुए 'बहुवर्षीय कार्यान्वयन मांग योजना' को संस्थागत बनाने पर विचार करना चाहिए, ताकि मांग में अचानक कमी आने पर ऐसी स्थिति पैदा नहीं हो कि कारखानों में कामकाज नहीं हो।
समिति ने यह भी सुझाव दिया कि रक्षा मंत्रालय को मांग के पैटर्न को समझने के लिए गहराई से अध्ययन करना चाहिए। जहां भी मांग में संरचनात्मक बदलाव आया है (जैसे, स्वदेशी राइफल के आयात या खरीद नीति में बदलाव के कारण), वहां यह आकलन करना चाहिए कि क्या अतिरिक्त क्षमता को भरने के लिए और ऑर्डर लेने के बजाय, स्थापित क्षमता को ही फिर से व्यवस्थित करने की जरूरत है।
R&D प्रोजेक्ट भी नहीं दे पाए नतीजे
समिति ने कहा कि अनुसंधान और विकास परियोजना भी उनके मकसद पूरे करने में नाकाम रहे। ऑडिट की अवधि के दौरान, सशस्त्र बलों ने अपनी परिचालन जरूरतों के लिए छोटे हथियारों, जैसे 7.62 बाई 51 एमएम असॉल्ट/स्नाइपर/एलएमजी, के आयात का सहारा लिया।पैनल ने कहा कि 2015-16 और 2019-20 के बीच, छोटे हथियारों के कारखानों को अपने मुख्य उत्पादों - जैसे 5.56 एमएम इंसास राइफल, 5.56 एमएम लाइट मशीन गन (एलएमजी), 9 एमएम ऑटो पिस्टल आदि - के लिए सशस्त्र बलों से या तो कोई मांग नहीं मिली या बहुत कम मांग मिली। इस तरह कारखाने काफी हद तक गृह मंत्रालय से मिलने वाले ऑर्डर पर निर्भर हो गए।
समिति ने कहा कि सेना से मांग में कमी, गृह मंत्रालय से पर्याप्त मांग न मिलना और मंत्रालय को आपूर्ति किए जाने वाले मुख्य उत्पादों के उत्पादन में कमी के कारण छोटे हथियारों के कारखानों में उत्पादन क्षमता का पूरा इस्तेमाल नहीं हो पाया। इसमें कहा गया कि साथ ही, कारखाने नए उत्पाद विकसित करने के अपने लक्ष्य को हासिल करने में विफल रहे।