Budget 2026: क्या होता है इकॉनोमिक सर्वे? बजट से पहले इसे क्यों किया जाता है पेश, जानिए ये क्यों है जरूरी

आर्थिक सर्वेक्षण एक वार्षिक रिपोर्ट है, जो बजट से पहले पेश होती है। इसमें देश की अर्थव्यवस्था का आकलन, प्रमुख क्षेत्रों का प्रदर्शन, चुनौतियां और आगे के सुझाव दिए जाते हैं। यह सरकार को बजट नीतियां तय करने में मार्गदर्शन देता है।

Manali Rastogi
पब्लिश्ड19 Jan 2026, 02:56 PM IST
Budget 2026: क्या होता है इकॉनोमिक सर्वे? बजट से पहले इसे क्यों किया जाता है पेश, जानिए ये क्यों है जरूरी
Budget 2026: क्या होता है इकॉनोमिक सर्वे? बजट से पहले इसे क्यों किया जाता है पेश, जानिए ये क्यों है जरूरी

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को संसद में केंद्रीय बजट 2026 पेश करेंगी। बजट में यह बताया जाता है कि केंद्र सरकार आने वाले वित्तीय वर्ष में पैसा कैसे जुटाएगी और उसे कहां-कहां खर्च करेगी। बजट से पहले वित्त मंत्रालय आर्थिक सर्वेक्षण (Economic Survey) पेश करता है, जिसमें देश की अर्थव्यवस्था की स्थिति और रुझानों की समीक्षा की जाती है।

आर्थिक सर्वेक्षण क्या है?

आर्थिक सर्वेक्षण हर साल तैयार की जाने वाली एक रिपोर्ट है, जिसे वित्त मंत्रालय के तहत आर्थिक कार्य विभाग तैयार करता है। इसमें मुख्य आर्थिक सलाहकार (CEA) की अहम भूमिका होती है। यह रिपोर्ट पिछले एक साल में देश की अर्थव्यवस्था के प्रदर्शन का आकलन करती है और कृषि, उद्योग, सेवा क्षेत्र, निर्यात और रोजगार जैसे अहम क्षेत्रों की समीक्षा करती है।

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बजट जहां सरकार की आय और खर्च की योजना बताता है, वहीं आर्थिक सर्वेक्षण एक तरह की समीक्षा और मार्गदर्शक दस्तावेज होता है। इसमें आंकड़े, तथ्य, रुझान और आने वाले साल के अनुमान शामिल होते हैं। साथ ही, इसमें अर्थव्यवस्था की चुनौतियों, उपलब्धियों और सुधारों के सुझाव भी दिए जाते हैं, जिनका इस्तेमाल बजट बनाते समय किया जा सकता है।

बजट से पहले आर्थिक सर्वेक्षण क्यों पेश किया जाता है?

आमतौर पर आर्थिक सर्वेक्षण केंद्रीय बजट से एक दिन पहले संसद में रखा जाता है। इसके पीछे कई कारण होते हैं:

  • नीति निर्धारण में मदद: सर्वेक्षण अर्थव्यवस्था की स्थिति बताता है और उन क्षेत्रों की पहचान करता है जहां सुधार या ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है। इससे सरकार को टैक्स, खर्च और आर्थिक नीतियों पर फैसले लेने में मदद मिलती है।
  • नीतियों की वजह समझाना: यह अर्थव्यवस्था की उपलब्धियों और चुनौतियों को सामने रखता है, जिससे बजट में प्रस्तावित नीतियों और खर्च की वजह समझ में आती है।
  • पारदर्शिता: इससे संसद और आम जनता को सरकार के आर्थिक दृष्टिकोण की जानकारी मिलती है, जैसे विकास दर, वित्तीय स्थिति, महंगाई, रोजगार और विभिन्न क्षेत्रों का प्रदर्शन।
  • चर्चा को बढ़ावा: बजट से पहले विशेषज्ञों, विपक्ष और मीडिया को अर्थव्यवस्था पर चर्चा का मौका मिलता है। कई बार ये चर्चाएं बजट प्रस्तावों को प्रभावित भी कर सकती हैं।

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जानिए आर्थिक सर्वेक्षण की प्रमुख विशेषताएं

  • जीडीपी विकास दर, महंगाई, राजकोषीय घाटा और चालू खाता संतुलन जैसे मैक्रो-आर्थिक संकेतकों का विश्लेषण।
  • कृषि, उद्योग और सेवा क्षेत्र जैसे विभिन्न सेक्टरों के प्रदर्शन की समीक्षा।
  • स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार जैसे सामाजिक और विकास से जुड़े पहलुओं पर चर्चा।
  • सुधारों और निवेश से जुड़े नीति सुझाव, जो सरकार की प्राथमिकताओं को दर्शाते हैं।
  • जटिल आर्थिक रुझानों को आसान भाषा में समझाने के लिए आंकड़ों, चार्ट और विश्लेषण का उपयोग।

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