
Affordable housing: भारत में शहरीकरण की रफ्तार बहुत तेज है और अनुमान है कि साल 2050 तक देश की आधी आबादी शहरों में रहने लगेगी । इतनी बड़ी आबादी के लिए सस्ते और अच्छे घर मुहैया कराना सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है। इस समस्या से निपटने के लिए नीति आयोग और आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय ने एक व्यापक फ्रेमवर्क जारी किया है। इस रिपोर्ट में जमीन की कमी, ऊंची कीमतों और पुराने कानूनों जैसे अवरोधों को दूर करने के लिए कई क्रांतिकारी सिफारिशें की गई हैं।
भारत की शहरी आबादी जो 2021 में लगभग 50 करोड़ थी, उसके 2050 तक बढ़कर 85 करोड़ होने की उम्मीद है। रिपोर्ट के मुताबिक, रियल एस्टेट सेक्टर का भारत की जीडीपी में योगदान 2021 के 7% से बढ़कर 2050 तक 13% हो सकता है। हालांकि, मांग और सप्लाई के बीच बड़ा अंतर है, जिससे गरीब और कम आय वाले परिवारों के लिए घर खरीदना मुश्किल हो गया है।
रिपोर्ट में किफायती घरों की कमी के मुख्य कारणों की पहचान की गई है। इसमें सबसे बड़ी बाधा जमीन की ऊंची कीमतें हैं, जो कुल परियोजना लागत का 50% से 70% तक होती हैं। इसके अलावा, शहरों में लगभग 1 करोड़ घर खाली पड़े हैं क्योंकि मकान मालिक कम किराये और कानूनी विवादों के डर से उन्हें किराये पर नहीं देना चाहते। पुराने किरायेदारी कानून और औपचारिक लोन मिलने में दिक्कतें भी इस संकट को बढ़ा रही हैं।
नीति आयोग ने सुझाव दिया है कि किफायती हाउसिंग प्रोजेक्ट्स के लिए जमीन के इस्तेमाल के नियमों में बदलाव किया जाए। इसमें 'फ्लोर एरिया रेशियो' (FAR) में ढील देने की सिफारिश की गई है, ताकि कम जमीन पर ज्यादा घर बनाए जा सकें। साथ ही, ट्रांजिट-ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD) के जरिए मेट्रो और बस कॉरिडोर के पास घर बनाने पर जोर दिया गया है ताकि लोगों को आने-जाने में आसानी हो।
सरकार का अब सिर्फ घर मालिक बनाने पर ही नहीं, बल्कि किराये के घरों पर भी विशेष ध्यान है। रिपोर्ट में 'मॉडल टेनेंसी एक्ट' (MTA) को तेजी से लागू करने की वकालत की गई है ताकि खाली पड़े 1 करोड़ मकानों को बाजार में लाया जा सके। इसके अलावा, औद्योगिक श्रमिकों के लिए किराये के घर और कंपनियों द्वारा संचालित हॉस्टल या पीजी को भी बढ़ावा देने का सुझाव दिया गया है।
सस्ते घरों को बढ़ावा देने के लिए वित्तीय मदद की भी सिफारिश की गई है। इसमें स्टाम्प ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन चार्ज को पूरी तरह माफ करने या टोकन अमाउंट ( ₹1 से ₹1,000) लेने का सुझाव है। साथ ही, बैंकों को सलाह दी गई है कि वे रेहड़ी-पटरी वालों और दिहाड़ी मजदूरों के लिए उनकी कमाई के आधार पर आसान लोन स्कीम तैयार करें। मध्यम वर्ग के लिए क्रेडिट गारंटी कवर को20 लाख रुपये से बढ़ाकर 40 लाख रुपये करने का भी प्रस्ताव है ।
प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के पहले चरण में 1.12 करोड़ घर मंजूर किए गए, जिनमें से 96 लाख पूरे हो चुके हैं। अब 2024 में शुरू हुई PMAY-U 2.0 के तहत अगले पांच सालों में 1 करोड़ और शहरी परिवारों को मदद देने का लक्ष्य रखा गया है। इस नए चरण में राज्यों की अपनी किफायती आवास नीतियों को केंद्र की योजनाओं के साथ जोड़ने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
Catch all the Business News, Market News, Breaking News Events and Latest News Updates on Live Mint. Download The Mint News App to get Daily Market Updates.