WPI March 2026: मार्च में थोक महंगाई 3.88% पर पहुंची, इन चीजों के दाम में लगी आग

WPI March 2026: मार्च में थोक मूल्य सूचकांक (WPI) आधारित महंगाई दर बढ़कर 3.88 फीसदी हो गई है। इससे पहले फरवरी में 2.13% थी। वहीं रिटेल महंगाई 3.4 फीसदी हो गई है। यह वृद्धि मुख्य रूप से कच्चे तेल, प्राकृतिक गैस, गैर-खाद्य वस्तुओं और मैन्युफैक्चरिंग लागत लागत में उछाल के कारण हुई।

Jitendra Singh
अपडेटेड15 Apr 2026, 04:02 PM IST
WPI March 2026: रोजमर्रा का सामान महंगा हो गया है।
WPI March 2026: रोजमर्रा का सामान महंगा हो गया है।

WPI March 2026: मार्च में थोक महंगाई (WPI) बढ़कर 3.88% पर पहुंच गई है। फरवरी में यह 2.13% पर थी। यानी इसमें एक महीने के अंदर 1.75% की बढ़ोतरी हुई है। थोक महंगाई ने 38 महीने का रिकॉर्ड भी तोड़ दिया है। जनवरी 2023 में थोक महंगाई 4.73% पर पहुंच गई थी। कॉमर्स मिनिस्ट्री ने आज यानी 15 अप्रैल को थोक महंगाई के आंकड़े जारी किए हैं। तेल, खाने-पीने की चीजों और मैन्युफैक्चर्ड सामान की कीमतों में बढ़ोतरी की वजह से मार्च के दौरान महंगाई बढ़ी है। यह आंकड़ा अर्थशास्त्रियों के 3.04 फीसदी के अनुमान से भी ऊपर रहा।

थोक मूल्य सूचकांक (WPI) आधारित महंगाई दर पिछले साल मार्च में यह 2.25 फीसदी रही थी। आंकड़ों के मुताबिक, ईंधन और ऊर्जा की कीमतों में मार्च में फरवरी के मुकाबले 4.13 फीसदी का इजाफा हुआ है। खनिज तेल की कीमतों में मार्च में पिछले महीने के मुकाबले 8.77 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। बिजली की कीमत में मार्च में 5.07 फीसदी की कमी देखने को मिली।

महीने-दर-महीने (MoM) आधार पर

मार्च में WPI इंडेक्स 1.64% बढ़ा, जबकि फरवरी में यह बढ़ोतरी सिर्फ 0.38% थी। यानी मार्च में कीमतों की रफ्तार तेजी से बढ़ी।

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रोजाना जरूरत के सामान, खाने-पीने की चीजें महंगी हुईं

  • रोजाना की जरूरत वाले सामानों (प्राइमरी आर्टिकल्स) की महंगाई 3.27% से बढ़कर 6.36% हो गई।
  • खाने-पीने की चीजों (फूड इंडेक्स) की महंगाई में कोई बदलाव नहीं है, ये 1.85% पर बनी हुई है।
  • फ्यूल और पावर की थोक महंगाई दर माइनस 3.78% से बढ़कर 1.05% हो गई है।
  • मैन्युफैक्चरिंग प्रोडक्ट्स की थोक महंगाई दर 2.92% से बढ़कर 3.39% रही।

होलसेल महंगाई के 4 हिस्से

प्राइमरी आर्टिकल, जिसका वेटेज 22.62% है। फ्यूल एंड पावर का वेटेज 13.15% और मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट का वेटेज सबसे ज्यादा 64.23% है। प्राइमरी आर्टिकल के भी चार हिस्से हैं।

  • फूड आर्टिकल्स जैसे अनाज, गेहूं, सब्जियां
  • नॉन फूड आर्टिकल में ऑयल सीड आते हैं
  • मिनरल्स
  • क्रूड पेट्रोलियम

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आम जनता पर असर

थोक महंगाई बढ़ने का असर आम लोगों और बाजार दोनों पर पड़ता है। जब थोक महंगाई बढ़ती है, तो कच्चा माल, ईंधन और उत्पादन की लागत बढ़ जाती है। इससे कंपनियां अपने प्रोडक्ट्स महंगे बेचती हैं, जिससे खुदरा महंगाई (CPI) भी बढ़ने लगती है। इसका सीधा असर लोगों की जेब पर पड़ता है और उनकी खरीदने की क्षमता कम हो जाती है, जिससे पूरी अर्थव्यवस्था प्रभावित होती है।

मार्च में रिटेल महंगाई बढ़कर 3.4% पहुंची

मार्च में रिटेल महंगाई बढ़कर 3.4% पहुंच गई है। इससे पहले फरवरी में यह 3.21% थी। महंगाई में यह बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है जब इजराइल-अमेरिका और ईरान के बीच जंग चल रही है।

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