WPI: दिसंबर में थोक महंगाई (WPI) बढ़कर 0.83% पर पहुंच गई है। ये 8 महीनों का हाई लेवल है। खाने-पीने की चीजें महंगी होने से महंगाई बढ़ी है। इससे पहले नवंबर में ये माइनस 0.32% पर थी। वहीं अक्टूबर में ये माइनस 1.21% पर आ गई थी। कॉमर्स मिनिस्ट्री ने आज यानी 14 दिसंबर को थोक महंगाई के आंकड़े जारी किए हैं। खाद्य पदार्थों, गैर-खाद्य वस्तुओं और विनिर्मित वस्तुओं की कीमतों में मासिक आधार पर बढ़ोतरी से इसमें वृद्धि दर्ज की गई। दिसंबर 2024 में थोक महंगाई दर 2.57 फीसदी थी।
खाने-पीने की चीजें महंगी हुईं
रोजाना की जरूरत वाले सामानों (प्राइमरी आर्टिकल्स) की महंगाई माइनस 2.93% से बढ़कर 0.21% हो गई। वहीं खाने-पीने की चीजों (फूड इंडेक्स) की महंगाई माइनस 2.60% से बढ़कर 0% हो गई। फ्यूल और पावर की थोक महंगाई दर माइनस 2.27% से घटकर माइनस 2.31% रही। मैन्युफैक्चरिंग प्रोडक्ट्स की थोक महंगाई दर 1.33% से बढ़कर 1.82% रही। गैर-खाद्य वस्तुओं की श्रेणी की महंगाई दर दिसंबर में 2.95 फीसदी रही, जबकि नवंबर में यह 2.27 फीसदी थी। यही वजह है कि इसका असर थोक महंगाई पर भी ज्यादा दिखा है।
खाने-पीने की चीजों पर असर
सब्जी, अंडा और दाल समेत रसोई की आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि के कारण बीते महीने दिसंबर में खुदरा महंगाई दर बढ़कर तीन महीने के हाई लेवल 1.33 फीसदी पर पहुंच गई थी। नवंबर में यह महंगाई दर 0.71 फीसदी थी। इससे पहले पिछला उच्च स्तर सितंबर में 1.44 फीसदी दर्ज किया गया था। सरकार ने इस हफ्ते ही इस संबंध में आंकड़े जारी किए थे। चौंकाने वाली बात ये है कि रिटेल महंगाई के बाद अब थोक महंगाई दर में भी उछाल दिख रहा है।
होलसेल प्राइस इंडेक्स (WPI) का आम आदमी पर असर
थोक महंगाई के लंबे समय तक बढ़े रहने से ज्यादातर प्रोडक्टिव सेक्टर पर इसका बुरा असर पड़ता है। अगर थोक मूल्य बहुत ज्यादा समय तक ऊंचे स्तर पर रहता है तो प्रोड्यूसर इसका बोझ कंज्यूमर्स पर डाल देते हैं। सरकार केवल टैक्स के जरिए WPI को कंट्रोल कर सकती है। जैसे कच्चे तेल में तेज बढ़ोतरी की स्थिति में सरकार ने ईंधन पर एक्साइज ड्यूटी कटौती की थी। हालांकि, सरकार टैक्स कटौती एक सीमा में ही कम कर सकती है। WPI में ज्यादा वेटेज मेटल, केमिकल, प्लास्टिक, रबर जैसे फैक्ट्री से जुड़े सामानों का होता है।