
Year Ender 2025: साल 2025 भारत के निर्यातकों के लिए चुनौतियों भरा रहा। अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर करीब 50 प्रतिशत तक ऊंचे टैरिफ लगाए। इसके बावजूद भारत का निर्यात डगमगाया नहीं। नए बाजारों की तलाश, उत्पादों में विविधता और सरकारी समर्थन के सहारे निर्यात ने संतुलन बनाए रखा है। संकेत साफ हैं कि यह गति 2026 में भी जारी रह सकती है। वाणिज्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि व्यापार पानी की तरह है, यह अपना मार्ग खुद ढूंढ लेता है।
कोविड-19 महामारी, रूस-यूक्रेन युद्ध, इस्राइल-हमास संघर्ष, रेड सी संकट, सेमीकंडक्टर की कमी और अब अमेरिकी टैरिफ, इन सभी झटकों के बावजूद भारतीय निर्यात ने खुद को संभाला है। भारतीय निर्यातकों ने अमेरिका पर निर्भरता कम कर एशिया, अफ्रीका, मध्य-पूर्व और लैटिन अमेरिका जैसे नए बाजारों पर ध्यान केंद्रित किया। इस बाजार विविधीकरण ने अमेरिकी शुल्क के नकारात्मक प्रभाव को काफी हद तक संतुलित कर दिया।
बीते कुछ वर्षों में वैश्विक व्यापार कई संकटों से गुजरा है। कोविड-19 महामारी, रूस-यूक्रेन युद्ध, इजराइल-हमास संघर्ष, लाल सागर शिपिंग संकट और सेमीकंडक्टर आपूर्ति में बाधाओं ने वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं को प्रभावित किया। इसके बावजूद भारत ने तेजी से अनुकूलन करते हुए अपने निर्यात को बनाए रखा।
भारत का वस्तु निर्यात 2020 में लगभग 276.5 अरब डॉलर था, जो 2021 में बढ़कर 395.5 अरब डॉलर और 2022 में 453.3 अरब डॉलर तक पहुंच गया। हालांकि 2023 में वैश्विक मंदी के कारण यह घटकर 389.5 अरब डॉलर रह गया। इसके बाद 2024 में निर्यात फिर से बढ़कर 443 अरब डॉलर तक पहुंच गया। वर्ष 2025 के जनवरी से नवंबर के बीच निर्यात लगभग 407 अरब डॉलर दर्ज किया गया।
वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में भारत का कुल माल और सेवा निर्यात 825.25 अरब डॉलर के ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गया, जिसमें सालाना आधार पर 6 फीसदी से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई। चालू वित्त वर्ष 2025-26 के अप्रैल से नवंबर के बीच भी निर्यात 562 अरब डॉलर रहा।
अमेरिका की तरफ से लगाए गए ऊंचे टैरिफ का असर सितंबर-अक्तूबर 2025 में दिखा, लेकिन नवंबर में अमेरिका को निर्यात 22.61 प्रतिशत बढ़कर 6.98 अरब डॉलर पहुंच गया। यह दिखाता है कि भारतीय निर्यातक हालात के अनुसार खुद को ढाल रहे हैं। हालांकि, वैश्विक हालात को लेकर चिंता बनी हुई है। विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) का अनुमान है कि 2025 में वैश्विक व्यापार 2.4 प्रतिशत बढ़ेगा, लेकिन 2026 के लिए अनुमान घटकर सिर्फ 0.5 प्रतिशत रह गया है। डब्ल्यूटीओ के अनुसार, ऊंचे टैरिफ, नीतिगत अनिश्चितता, विकसित देशों में मांग में कमजोरी और रोजगार व आय की धीमी वृद्धि से व्यापार पर दबाव पड़ सकता है।
इसके बावजूद भारत सरकार आशावादी है। सरकार ने निर्यात को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए हैं, जैसे 25,060 करोड़ रुपये का निर्यात प्रोत्साहन मिशन, 20,000 करोड़ रुपये तक अतिरिक्त बिना गारंटी वाला ऋण, निर्यात ऋण पर मोरेटोरियम और अवधि में राहत, मुक्त व्यापार समझौतों का बेहतर इस्तेमाल। पिछले पांच वर्षों में एनडीए सरकार ने सबसे ज्यादा एफटीए किए हैं, इसमें मॉरीशस, ऑस्ट्रेलिया, यूएई, ओमान, यूके, ईएफटीए और न्यूजीलैंड शामिल हैं।
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