क्विक-कॉमर्स की दुनिया में 'जेप्टो' अब केवल 10 मिनट की डिलीवरी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह मिडिल-क्लास की खरीदारी की आदत बन चुका है। लेकिन हालिया बदलाव बताते हैं कि 'मुफ्त की सुविधा' अब महंगी होने वाली है। हमारे विश्लेषण के अनुसार, कंपनी अब केवल वॉल्यूम नहीं, बल्कि वैल्यू पर ध्यान दे रही है।
जेप्टो के नए नियमों से आपकी जेब पर क्या असर होगा?
अगर आप जेप्टो से सिर्फ ₹100- ₹120 का सामान मंगवाते थे, तो अब आपको सावधान होने की जरूरत है। पहले ₹99 से ऊपर के ऑर्डर पर डिलीवरी फ्री थी, जो अब बढ़कर ₹149 हो गई है। इसका मतलब है कि ₹148 के ऑर्डर पर भी आपको एक्स्ट्रा पैसे देने होंगे। हालांकि, राहत की बात यह है कि कम कीमत वाले ऑर्डर्स पर लगने वाला ₹30 का डिलीवरी चार्ज घटाकर ₹20 कर दिया गया है।
क्या आईपीओ की तैयारी में है यह बड़ा बदलाव?
जेप्टो 2026 के मध्य तक करीब 1.2 अरब डॉलर (11,000 करोड़ रुपये) का आईपीओ लाने की तैयारी में है। मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि डिलीवरी लिमिट बढ़ाना सीधे तौर पर कंपनी के मार्जिन्स को बेहतर करने की कोशिश है। जब ग्राहक फ्री डिलीवरी के लालच में 149 रुपये तक का कार्ट बनाता है, तो जेप्टो का लॉजिस्टिक्स खर्च कम और मुनाफा ज्यादा हुआ करेगा।
ब्लिंकइट और इंस्टामार्ट के मुकाबले जेप्टो अब कहां खड़ा है?
कीमतों की इस जंग में जेप्टो अभी भी सबसे आक्रामक है। जहाँ Swiggy Instamart ₹299 (नॉन-मेंबर्स) और Blinkit ₹199 के ऊपर फ्री डिलीवरी देते हैं, वहीं जेप्टो की ₹149 की लिमिट ग्राहकों को अपनी ओर खींचने के लिए काफी है। इसके अलावा, जेप्टो ने तंबाकू उत्पादों पर हैंडलिंग फीस और देर रात के 'सर्ज चार्ज' को हटाकर खुद को 'पारदर्शी ब्रांड' के रूप में पेश किया है।
छोटे ऑर्डर्स पर 20 रुपये का चार्ज: फायदा या नुकसान?
कंपनी ने एक स्मार्ट मूव चला है। जहाँ एक तरफ फ्री डिलीवरी की सीमा बढ़ाई, वहीं छोटे ऑर्डर्स के लिए डिलीवरी फीस ₹10 कम कर दी। यह उन ग्राहकों के लिए फायदेमंद है जो केवल एक या दो जरूरी चीजें जैसे अचानक मेहमान आने पर कोल्ड ड्रिंक, मंगवाते हैं। यह 'हाइब्रिड मॉडल' जेप्टो को बाजार में पकड़ बनाए रखने में मदद करेगा।