
कौशल यादव और राजबल्लभ यादव नवादा की राजनीति के ये दो ऐसे नाम हैं जो कभी एक साथ नहीं रहे, लेकिन अलग भी नहीं रहे। एक साथ इस लिए नहीं रहे क्यों कि दोनों ने कभी एक पार्टी से चुनाव नहीं लड़ा और अलग इस लिए नहीं रहे कि दोनों एक-दूसरे की पार्टी का अदला-बदली कर चुनाव लड़ते रहे। एक बार फिर इन दोनों ने अपनी-अपनी पार्टी की अदला-बदली कर ली है। इन दोनों में एक और समानता ये भी है कि दोनों की पत्नियां भी विधायक हैं। एक और दिलचस्प बात ये है कि इनमें से एक यादव पति-पत्नी एक ही पार्टी की टिकट पर दो अलग-अलग विधानसभा सीट से चुनव लड़ रहे हैं।
कौशल यादव और राजबल्लभ यादव की राह एक-दूसरे के विपरीत ही रहती है, इस बार भी है। आरजेडी वाले राजबल्लभ अब जेडीयू वाले हो गए हैं और जेडीयू वाले कौशल यादव आरजेडी वाले हो गए हैं। दोनों यादव बंधू विधायक भी रह चुके हैं हैं और दोनों की पत्नी भी ये तमगा हासिल कर चुकी हैं। राजबल्लभ की पत्नी विभा देवी अभी नवादा से जेडीयू की प्रत्याशी हैं। चार बार विधायक रह चुके कौशल लालू के पाले में जाकर उनका पीछा कर रहे हैं। आरजेडी ने कौशल के साथ उनकी पत्नी पूर्णिमा यादव पर गोविंदपुर में दांव लगाया है। गोविंदपुर विधानसभा क्षेत्र भी नवादा जिला में ही है। एक ही पार्टी के टिकट पर पति-पत्नी के मैदान में उतरने का इस चुनाव का ये अनोखा मामला है।
कौशल की बराबरी में पूर्णिमा भी चार बार विधायक रही हैं। इस दंपती के साथ चुनावी जीत का एक और अनोखा रिकार्ड 2005 का है। तब दोनों निर्दलीय विधानसभा का चुनाव लड़े थे और दोनों जीतकर विधायक भी बने थे। जीतने के बाद दोनों नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू में शामिल हो गए। लेकिन इसी साल मई-जून में जब बिहार में चुनावी चर्चा शुरू हो रही थी तभी इनका हृदय परिवर्तन हो गया। बताया जा रहा है कि इनको राजबल्लभ यादव के आने की भनक लग गई थी। आरजेडी को भी इसी समय का इंतजार था, लिहाजा जुलाई में कौशल यादव ने तेजस्वी यादव से गले मिलकर आरजेडी का झंडा उठा लिया। राजबल्लभ यादव की तरह कौशल यादव भी राजनीतिक परिवार से ताल्लुक रखते हैं।
जहानाबाद वाले अरुण कुमार पांच साल त सांसद रहे, इनके परिवार के तीन लड़के एक साथ राजनीति की दुनिया में कदम रख चुके हैं। अरुण कुमार के बेटे ऋतुराज को जेडीयू ने घोसी के मैदान में उतारा है। ऋतुराज के लिए यह पहला चुनावी अनुभव है। उनकी जीत के लिए खुद अरुण कुमार पसीना बहा रहे हैं। अरुण कुमार के भाई अनिल कुमार जीतनराम मांझी की पार्टी से मैदान में उतरे हैं है। अनिल कुमार चार बार विधायक रह चुके हैं और अब वो राजनीति के मंझे हुए खिलाड़ी बन चुके हैं। परिवार के तीसरे सदस्य रोमित कुमार, अरुण कुमार के भतीजे हैं। रोमित अरुण कुमार के दूसरे भाई अरविंद कुमार के बेटे हैं, वो भी पहली बार चुनावी मैदान में उतरे हैं। वो भी जीतनराम मांझी की पार्टी से अतरी विधानसभा सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। टिकरी विधानसभा क्षेत्र गया जिला में आता है, जो जीतनाम मांझी का गृह जिला है।
जो कहीं देखने को नहीं मिलता वो राजनीति में देखने को मिलता है। इस बार कुछ ऐसा ही मोतिहारी विधानसभा सीट पर देखने को मिल रहा है। जहां पति-पत्नी दोनों एक-दूसरे के खिलाफ मैदान में उतर आए हैं। पति देवा गुप्ता और पत्नी प्रति कुमारी दोनों एक ही घर में एक साथ रहते हैं। लेकिन चुनाव के मैदान में एक-दूसरे के खिलाफ उतर आए हैं। देवा गुप्ता आरजेडी की टिकट पर चुनाव मैदान में हैं। तो वहीं उनकी पत्नी प्रीति कुमारी इसी मोतिहारी विधानसभा सीट से निर्दलीय मैदान में हैं। पति के खिलाफ मैदान में उतरने के सवाल पर प्रीति कहती हैं कि विरोधियों को परास्त करने की ये एक सियासी चाल है। प्रीति इस वक्त मोतिहारी शहर की मेयर भी हैं।
पूर्वी चंपारण की चिरैया विधानसभा सीट पर इस बार का चुनाव बेहद रोचक बना है। इस बार यहां से आरजेडी प्रत्याशी और पूर्व विधायक लक्ष्मी नारायण यादव के खिलाफ उनका बेटा ही मैदान में उतर आया है। लक्ष्मी नारायण का बेटा लालू प्रसाद यादव उनके खिलाफ इसी सीट से चुनाव रलड़ रहा है। हालांकि उनका मुख्य मुकाबला बीजेपी प्रत्याशी और मौजूदा विधायक लालबाबू प्रसाद गुप्ता से है। लक्ष्मीनारायण घोड़ासहन विधानसभा से दो बार विधायक रहे हैं।
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