
सुना है बिहार में दिल्ली वाले सर जी की आम आदमी पार्टी विधानसभा चुनाव लड़ रही है, पार्टी ने घोषणा तो की थी सभी 243 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने की। लेकिन अभी तक ये साफ नहीं हो पाया है कि पार्टी ने बिहार में कुल कितने सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं। ना तो पार्टी ने इसी सार्वजनिक घोषणा की है और ना ही मीडिया में किसी को इस बात की जानकारी है कि बिहार में कितने विधानसभा सीटों पर AAP चुनाव लड़ रही है। लेकिन एक बात पक्की है AAP बिहार में चुनाव जरूर लड़ रही है, वरना पार्टी नेता संजय सिंह के चुनाव प्रचार का कार्यक्रम तय नहीं हुआ होता। लेकिन अब सवाल ये उठता है कि जब पार्टी चुनाव लड़ रही है तो पार्टी का सबसे बड़ा चेहरा और पार्टी के मालिक अरविंद केजरीवाल बिहार में कहीं नजर क्यों नहीं आ रहे हैं।
दिल्ली वाले सर जी यानी अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी बिहार विधानसभा का चुनाव लड़ रही है। पार्टी के नेता चुनाव प्रचार में पसीना बहा रहे हैं, सोशल मीडिया पर पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह का चुनाव प्रचार करने का शेड्यूल नहीं जारी किया होता। लेकिन पार्टी कितनी सीटों पर चुनाव लड़ रही है ये मीडिया के सामने नहीं आया है। वैसे तो बिहार में चुनाव की घोषणा होने से पहले पार्टी ने ऐलान किया था कि वो बिहार की सभी 243 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ेगी। अब एक और सवाल ये उठ रहा है कि AAP को राष्ट्रीय पार्टी का बनाने का ख्वाब देख रहे पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल ने बिहार में अपने नेताओं और कार्यकर्ताओं को अकेला क्यों छोड़ दिया है।
AAP के संस्थापक, पार्टी के मुखिया सबकुछ अरविंद केजरीवाल ही है, उनका सपना AAP को राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा दिलाना है। लेकिन बिहार में पार्टी के सबसे बड़ा चेहरा आखिर क्यों नहीं उतर रहा है। अरविंद केजरीवाल कहां हैं इसकी भी कोई जानकारी नहीं मिल रही है। दिल्ली में हैं या पंजाब में मुख्यमंत्री भगवंत मान के साथ सरकार चला रहे हैं कोई खबर नहीं है। बिहार में चुनाव लड़ने वाली सभी पार्टियों के तमाम आला नेता प्रचार के रण में उतर चुके हैं लेकिन केजरीवाल कहीं नजर नहीं आ रहे हैं।
अरविंद केजरीवाल जब से दिल्ली की सत्ता से बेदखल हुए हैं मीडिया से भी गायब हो गया हैं, ना कोई बयान आ रहा है ना ही सार्वजनिक मंच पर कही नजर आ रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी बड़ी मुश्किल से उनका कोई बयान नजर आता है। वैसे दिल्ली का चुनाव हारते ही केजरीवाल पंजाब चले गए थे विपश्यना करने यानी मन, आत्मा, विचार सबकी शुद्धि करने। उसके बाद बड़ी मुश्किल से वो कहीं नजर आते हैं।
AAP के मुखिया अरविंद केजरीवाल पर आरोप लगे थे कि जैसे ही वो दिल्ली का चुनाव हारे अपने सभी प्रमुख चेहरों को उन्होंने पंजाब शिफ्ट कर दिया था। कई बार पार्टी के पंजाब इकाई में इसको लेकर विरोध के स्वर भी उठे थे। हालांकि बाद में मामला शांत हो गया। बीजेपी आरोप लगाती है कि केजरीवाल पंजाब में सुपर सीएम की भूमिका में आ गए हैं।
अन्ना हजारे के आंदोलन से निकले केजरीवाल ने राजनीतिक पार्टी बनाई उसके बाद उन्हें दिल्ली की सत्ता पर काबिज होने में देर नहीं लगी। लगातार दो बार वो दिल्ली के मुख्यमंत्री बने। पार्टी का विस्तार पंजाब में किया और पंजाब में भी आम आदमी पार्टी ने शानदार जीत दर्ज की और भगवंत मान मुख्यमंत्री बने। केजरीवाल ने अपनी पार्टी को गोवा और गुजरात में भी चुनाव लड़ाया लेकिन कुछ खास कामयाबी हाथ नहीं लगी। दिल्ली चुनाव होने से पहले तक कहा जा रहा था कि केजरीवाल गुजरात पर विशेष ध्यान दे रहे हैं। ऐसे में अब सवाल ये उठता है कि पार्टी ने जब बिहार की सभी 243 सीटों पर चुनाव लड़ने का ऐलान किया था तो केजरीवाल आखिर बिहार में चुनाव प्रचार करने अभी तक क्यों नहीं पहुंचे हैं।
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