बिहार चुनाव: भागलपुर दंगों के पीड़ित मुसलमानों का मुफ्त लड़ा था मुकदमा, अभयकांत झा को अब जनसुराज ने बनाया उम्मीदवार

Jansuraj Candidates List: 74 साल के वकील अभयकांत झा को प्रशांत किशोर की पार्टी जनसुराज ने भागलपुर विधानसभा सीट से उम्मीदवार बनाया है। झा ने दंगा पीड़ित 880 मुस्लिमों का केस लड़ा था और कई दोषियों को सजा दिलवाई थी।

Naveen Kumar Pandey
अपडेटेड13 Oct 2025, 09:40 PM IST
अभयकांत झा को जनसुराज ने भागलपुर से दिया टिकट।
अभयकांत झा को जनसुराज ने भागलपुर से दिया टिकट।(Mint)

Jansuraj Candidate from Bhagalpur: बिहार विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुटे सूबे में सक्रिय चारों प्रमुख दलों बीजेपी, जेडीयू, आरजेडी और कांग्रेस ने अभी तक उम्मीदवारों की घोषणा नहीं की है। एनडीए में सीटों का बटवारा हो गया है। वहीं महागठबंधन में अभी भी समझौते पर नूरा कुश्ती जारी है। दूसरी तरफ प्रदेश की पांचवीं प्रमुख पार्टी का तमगा हासिल करने वाली प्रशंत किशोर की पार्टी जनसुराज ने अपनी दूसरी लिस्ट जारी कर दी है।

जनुसराज ने जारी की उम्मीदवारों की दूसरी लिस्ट

पहली लिस्ट में 51 तो दूसरी लिस्ट में 65 उम्मीदवारों के नामों की घोषणा की गई है। जनसुराज के इन 116 उम्मीदवारों में एक ऐसा नाम है जिसने 74 साल की उम्र में पहली बार राजनीति की दहलीज पर कदम रखा और उसे जनसुराज ने प्रत्याशी बना दिया है। हम बात कर रहे हैं अभयकांत झा की जिन्होंने 1989 में हुए भागलपुर दंगे के पीड़ित मुसलमानों का मुकदमा मुफ्त में लड़ा था।

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अभयकांत झा को टिकट और पीके का लालू पर तंज

अभयकांत झा को भागलपुर विधानसभा सीट से प्रत्याशी घोषित किए जाने के बाद पार्टी सुप्रीमो प्रशांत किशोर ने लालू यादव पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जिस वक्त अभयकांत झा दंगा पीड़ित मुसलमानों का केस लड़ रहे थे, उस वक्त हिन्दूवादी संगठनों की तरफ से उनका विरोध हो रहा था। दूसरी तरफ लालू यादव राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ (आरएसएस) का बचाव कर रहे थे।

1989 में हुआ था भागलपुर में दंगा

भागलपुर में दंगा उस वक्त भड़का था, जब मुस्लिम बहुल इलाके ततारपुर से गुजर रहे एक जुलूस पर पत्थरबाजी की गई थी। भागलपुर में हुए सांप्रदायिक दंगों में 1,070 लोगों की जान चली गई थी। 68 मस्जिदें और 20 मजार को तहस नहस कर दिया गया था। 50 हजार से ज्यादा लोग अपना घर छोड़ने को मजबूर हो गए थे। शरणार्थी शिविरों में रहने वाले लोगों के बीच भी भय का माहौल था। इस दंगे में 93 प्रतिशत जान गंवाने वाले मुस्लिम समुदाय के थे।

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बिना फीस लिए लड़े थे मुस्लिमों का मुकदमा

भागलपुर दंगे के पीड़ित 880 से ज्यादा मुसलमानों का केस अभयकांत झा ने मुफ्त लड़ा था। इस दौरान कई हिन्दूवादी संगठनों ने उनके इस फैसले पर सवाल उठाए। उन्होंने अभयकांत झा पर तंज कसा कि ब्राह्मण होते हुए भी आप मुसलमानों का केस लड़ रहे हैं। भागलपुर दंगे की जांच के लिए जस्टिस रामनंदन प्रसाद, जस्टिस रामचंद्र प्रसाद सिन्हा और जस्टिस शमसुल हसन की अध्यक्षता में एक आयोग बनाया गया। इस आयोग ने 1995 में 323 पन्नों की अपनी जांच रिपोर्ट सौंपी। 2005 में दंगों की फाइलों को फिर से खुलवाया गया और अभयकांत झा ने पीड़ितों का केस लड़ते हुए कई दोषियों को उम्रकैद तक की सजा दिलवाई।

सामाजिक कार्यों में भी रहे हैं आगे

मुस्लिमों का केस मुफ्त में लड़ने और दंगे के दोषियों को सजा दिलवाने के बाद अभयकांत झा की पहचान भागलपुर में न्यायप्रिय वकील के रूप में होने लगी। वो दंगा पीड़ितों की लगातार मदद करते रहे। शिक्षा के क्षेत्र और सामाजिक कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाते रहे। अभयकांत झा भागलपुर बार एसोसिएशन के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। इस वक्त वो जनसुराज पार्टी के जिला संयोजक हैं और प्रत्याशियों के चयन के साथ बूथ स्तर पर मैनेजमेंट की जिम्मेदारी निभा रहे हैं।

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