
बिहार में विधानसभा चुनाव की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है, लेकिन महागठबंधन में सीट बंटवारे का पेच सुलझ नहीं पाया है। ओवैसी ने गठबंधन में शामिल होने को लेकर तेजस्वी और लालू यादव से बात की थी, लेकिन महागठबंधन ने अपना दरवाजा नहीं खोला। इस पर AIMIM के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल ईमान ने कहा कि महागठबंधन में उन्होंने सिर्फ छह सीटें मांगी थीं, वो भी नहीं मिलीं। उन्होंने लगे हाथ यह भी बता दिया कि एआईएमआईएम के नेतृत्व में अब 'ग्रैंड डेमोक्रेटिक अलायंस यानी जीडीए' के नाम से तीसरा मोर्चा बनाने की पहल हो रही है।
जीडीए के बैनर तले प्रदेश में 100 सीटों पर उम्मीदवार उतारने की तैयारी है। हालांकि AIMIM ने खुद 32 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारने का ऐलान किया है। वहीं गठबंधन के दूसरे साथी स्वामी प्रसाद मौर्य की 'अपनी जनता पार्टी' ने अभी तक साफ नहीं किया है कि वो कितने सीटों पर चुनाव लड़ेगी। गठबंधन में पशुपति पारस जैसे नेताओं को भी जोड़ने की कोशिश की जा रही है। ईमान ने कहा कि जल्दी ही गठबंधन में कुछ और पार्टियों को जोड़ने की घोषणा की जाएगी।
ओवैसी की पार्टी बिहार में किशनगंज, पूर्णिया, कटिहार और अररिया जैसे जिलों में अपने प्रत्याशी उतारेगी। इन जिलों में 40 से लेकर 68 प्रतिशत तक मुस्लिम आबादी है। इसके अलावा सीवान, गोपालगंज, जमुई, भागलपुर, दरभंगा, समस्तीपुर, सीतामढ़ी, मधुबनी, गया और वैशाली जैसे जिलों की मुस्लिम बहुल सीटों पर भी प्रत्याशी उतारने की योजना है।
जीडीए की घोषणा करते हुए ईमान ने कहा कि तेजस्वी यादव खुद ही विपक्ष में बैठना चाह रहे हैं। महागठबंधन के लोग AIMIM पर बीजेपी की बी टीम होने का आरोप लगाते हैं, लेकिन खुद आरजेडी पर दबाव है कि वो मजबूती के साथ एकजुट होकर बिहार का चुनाव न लड़े। अगर ऐसा नहीं होता तो AIMIM को भी गठबंधन में शामिल किया जाता। उन्होंने आरोप लगाया कि एमवाई यानी मुस्लिम यादव समीकरण के सहारे चुनाव जीतने वाली राजद बिहार के 18 प्रतिशत मुसलमानों को उचित भागीदारी नहीं दे रही है। इन्हें सिर्फ वोटबैंक की तरह इस्तेमाल किया जाता है।
उधर, एनडीए छोड़ बेहतर डील की तलाश में महागठबंधन का दामन थामने वाले पशुपति पारस का मोहभंग हो गया है। तेजस्वी यादव कांग्रेस, लेफ्ट और मुकेश सहनी की वीआईपी पार्टी के दबाव से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं कि वो पारस की एलजेपी(पी) के बारे में सोचें। लिहाजा खुद को उपेक्षित होता देख पशुपति पारस ने महागठबंधन से दूरी बनाने का फैसला किया है। AIMIM पशुपति पारस को भी अपने गठबंधन में शामिल करने की कोशिश में जुटी है। पशुपति पारस भी इस वक्त चुनाव लड़ने के लिए किसी गठबंधन के सहारे की तलाश में हैं।
बहरहाल, यह सवाल तो पैदा हो गया है कि अगर तीसरा मोर्चा बना तो यह क्या गुल खिला पाएगा। यह आशंका तो बन सकती है कि चुनाव में महागठबंधन की राह थोड़ी मुश्किल हो जाए। डर इस बात का है कि जिस सीट पर भी AIMIM के नेतृत्व वाला मोर्चा अपने उम्मीदवार उतारेगा, वो सीधे महागठबंधन का वोट काट सकता है।
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