
बिहार विधानसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस ने कृष्णा अल्लावरु को प्रदेश प्रभारी बनाया था। अल्लावरु सीटों पर समझौते की पुरजोर कोशिश कर रहे थे। लेकिन कामयाबी हाथ नहीं लगी। महागठबंधन का कोई भी दल ना तो सीटों के बटवारे पर कुछ बोल पाया और ना ही संयुक्त चुनाव प्रचार को लेकर कोई बयान आ रहा था। लेकिन ये सबकुछ संभव कर दिखाया कांग्रेस के कद्दावर नेता और राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने। उन्होंने दिवाली के मौके पर लालू-परिवार को शुभकामनाएं देने के लिए फोन किया और महागठबंधन की गांठ खुल गई।
कांग्रेस-आरजेडी के बीच वैसे तो सीट बटवारे से लेकर फ्रेंडली फाइट तक पर तनाव चल रहा था। लेकिन आरजेडी की सबसे बड़ी नाराजगी तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री का चेहरा नहीं घोषित करना था। अशोक गहलोत पटना पहुंचे, बंद कमरे में लालू-तेजस्वी यादव से बात हुई, लेफ्ट पार्टियों और मुकेश सहनी से चर्चा की, उसके बाद तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित कर दिया गया। अशोक गहलोत ने लगे हाथ मुकेश सहनी को उपमुख्यमंत्री का चेहरा बनाने की भी घोषणा कर दी। अब महागठबंधन में सबकुछ सामान्य नजर आ रहा है।
बताया जा रहा है कि अशोक गहलोत ने दिवाली के दिन तेजस्वी यादव को फोन किया था, उन्होंने लालू यादव से भी बात की और दोनों को दिवाली की बधाई और शुभकामनाएं दी। शुभकामनाओं से शुरू हुई बातचीत बिहार चुनाव पर चर्चा में बदल गई। दो दिन बाद 22 अक्टूबर को अशोक गहलोत पटना पहुंच गए। लालू परिवार से मुलाकात की और कांग्रेस-आरजेडी के बीच रिश्तों में आई तल्खी समाप्त हो गई।
अशोक गहलोत बिहार चुनावों के लिए अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ पर्यवेक्षक हैं। बिहार में कांग्रेस 61 सीटों पर चुनाव लड़ रही है और अशोक गहलोत को बिहार की 20 सीटें जिताने की जिम्मेदारी मिली है। गौरतलब है कि साल 2020 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस 70 सीटों पर चुनाव लड़ी थी और उसे 19 सीटों पर जीत मिली थी। इस बार कांग्रेस के सामने कम सीटों पर लड़कर पिछली बार से ज्यादा बेहतर परफॉर्मेंस करने का दबाव है।
गठबंधन के एक नेता ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि "जहां कांग्रेस तेजस्वी को चेहरा बनाने के पक्ष में नहीं थी, वहीं आरजेडी को गठबंधन में मुकेश सहनी के नेतृत्व वाली विकासशील इंसान पार्टी से दिक्कत थी। ये विवाद का एक बड़ा कारण बन गया था। आखिर में, कांग्रेस तेजस्वी को सीएम चेहरा बनाने पर सहमत हो गई, बशर्ते सहनी को उपमुख्यमंत्री का चेहरा बनाया जाए।" गठबंधन में सहनी की पार्टी 11 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। वह निषाद समुदाय के एक प्रमुख सदस्य हैं, जिन्हें अक्सर मल्लाह समुदाय भी कहा जाता है, जो परंपरागत रूप से मछली पकड़ने के व्यवसाय से जुड़े हैं। मल्लाह एक व्यापक ओबीसी समुदाय है, जो पारंपरिक रूप से उत्तर भारत, विशेष रूप से उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के कुछ हिस्सों में नाव चलाने और मछली पकड़ने के काम से जुड़ा है।
गठबंधन के एक नेता के मुताबिक "महागठबंधन में बटवारे से पहले ही मुकेश सहनी 60 सीटों के साथ डिप्टी सीएम के आश्वासन की मांग पर अड़े थे। बाद में 30 सीटों पर मानने के लिए राजी हो गए। लेकिन महागठबंधन में उन्हें 11 सीटें मिलीं। तेजस्वी वीआईपी के पक्ष में नहीं थे, क्योंकि उन्हें लगता था कि मल्लाह वैसे भी आरजेडी को ही वोट देंगे। लेकिन राहुल गांधी पिछड़े समुदाय के मुद्दों का समर्थन करते रहे हैं इसलिए सहनी जिन्हें 'सन ऑफ मल्लाह' भी कहा जाता है, उन्हें भी गठबंधन का चेहरा बनाना चाहते थे।"
अशोक गहलोत ने पटना के होटल मौर्या में मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री के चेहरों के बारे में घोषणा की। गठबंधन के नेताओं ने एकजुटता दिखाई, जिसमें आरजेडी सांसद मनोज झा ने हर सदस्य से बारे में बोलने का अनुरोध किया। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान तेजस्वी यादव, मुकेश सहनी, बिहार कांग्रेस प्रभारी कृष्णा अल्लावरू, बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष राजेश राम और लेफ्ट पार्टियों के प्रतिनिधि भी मौजूद थे।
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