
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की मतगणना अंतिम दौर में है और अब तक आए परिणामों ने चुनावी तस्वीर लगभग साफ कर दी है। अब तक के परिणाम महागठबंधन के लिए बेहद निराशाजनक रहे हैं, जबकि एनडीए अभूतपूर्व बढ़त बनाता दिख रहा है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक महागठबंधन अब महज 33 सीटों पर आगे है, जिसमें आरजेडी 23 सीटों पर, कांग्रेस 6 सीटों पर, सीपीआई (एमएल) 2 सीटों पर, सीपीएम 1 सीट पर और IIP पर एक सीट पर बढ़त बनाए हुए हैं, जबकि मुकेश सहनी की पार्टी VIP और सीपीआई का खाता भी नहीं खुला। इन आंकड़ों से साफ है कि महागठबंधन की सबसे कमजोर कड़ी इस बार कांग्रेस, VIP और वाम दल साबित हुए हैं।
61 सीटों पर चुनाव लड़ने के बावजूद कांग्रेस महज 6 स्थानों पर बढ़त बनाने में सफल दिख रही है, वीआईपी 12 जगह मैदान में थी लेकिन खाता भी नहीं खोल पाई, वाम दल 33 सीटों पर ताल ठोंक रहे थे लेकिन तीन सीटों पर ही आगे चल रही है। इन पार्टियों का प्रदर्शन महागठबंधन के लिए चिंताजनक रहा। हालांकि महागठबंधन की अगुवाई राजद कर रहा था, जिसका प्रदर्शन भी अब तक के सबसे खराब प्रदर्शन में से एक है, क्योंकि राजद 143 सीटों पर लड़ने के बाद महज 23 सीटों पर ही बढ़त बनाए हुए है।
दूसरी तरफ एनडीए ने चुनावी मैदान में स्पष्ट बढ़त बनाकर मुकाबले को एकतरफा कर दिया है। बीजेपी 91 सीटों पर, जेडीयू 85 सीटों पर, एलजेपी (चिराग) 20 सीटों पर और अन्य सहयोगी 9 सीटों पर आगे हैं। कुल मिलाकर एनडीए 205 सीटों को जीतता दिख रहा है, जो बिहार की राजनीति में एक निर्णायक बदलाव का संकेत देता है। वहीं एआईएमआईएम भी 5 सीटों पर मजबूत स्थिति में दिखाई दे रही है। जबकि जन सुराज का खाता खोलने में नाकाम रही है।
2020 के विधानसभा चुनाव में राजद सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी, जब उसने 75 सीटें अपने नाम की थीं। उस समय राजद का स्ट्राइक रेट 52 प्रतिशत के आसपास था। कांग्रेस को 70 सीटें मिलने के बावजूद वह 19 सीटें ही जीत पाई थी, यानी जीत प्रतिशत मात्र 27.1 रहा था। वाम दलों ने 16 सीटें (भाकपा माले 12, भाकपा और माकपा ने दो-दो सीटें) जीती थीं। लेकिन इस बार हालात और भी चुनौतीपूर्ण दिख रहे हैं। तेजस्वी यादव की आक्रामक कैंपेनिंग और विपक्ष की ओर से उठाए गए मुद्दे शुरुआती रुझानों के दबाव में फीके पड़ते दिखाई दे रहे हैं। कांग्रेस और वाम दलों के कमजोर होने से महागठबंधन को बड़ा नुकसान हुआ है।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने चुनाव अभियान के दौरान वोट चोरी, मतदाता सूची में गड़बड़ी और ईसीआई की प्रक्रियाओं को मुद्दा बनाकर माहौल बनाने की कोशिश की थी। पार्टी ने इसे एक बड़े नैरेटिव के रूप में आगे बढ़ाया था, लेकिन चुनाव परिणाम बता रहे हैं कि यह रणनीति मतदाताओं को पर्याप्त रूप से आकर्षित नहीं कर पाई। राजद के लिए भी स्थिति उत्साहजनक नहीं है, क्योंकि इस बार उसका स्ट्राइक रेट 2020 की तुलना में काफी कम दिख रहा है। महागठबंधन का पूरा प्रदर्शन यह संकेत देता है कि मतदाताओं ने स्थिरता, अनुभव और गठबंधन की एकजुटता को प्राथमिकता दी है।
अंतिम परिणाम आने में अभी थोड़ा समय है लेकिन इन आंकड़ों ने यह साफ कर दिया है कि बिहार की सत्ता का झुकाव इस बार भी एकतरफा एनडीए की ओर है। महागठबंधन को उम्मीद से कहीं बड़ा झटका लगा है और 2025 का जनादेश सत्ता समीकरणों को नए सिरे से परिभाषित करता दिख रहा है।
Oops! Looks like you have exceeded the limit to bookmark the image. Remove some to bookmark this image.