बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के एग्जिट पोल्स ने असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM को बड़ा झटका दिया है। बीते चुनाव में सीमांचल की राजनीति में 5 सीटें जीतकर चर्चा में आई AIMIM अब एक या दो सीटों पर सिमटती दिख रही है। दैनिक भास्कर और Chanakya Strategies जैसे एग्जिट पोल्स का अनुमान है कि अन्य दलों को 3 से 5 सीटें मिल सकती हैं, जिनमें AIMIM भी शामिल है। यानी सीमांचल में पार्टी का प्रभाव घटा है और उसका वोट शेयर 1% के आसपास सिमट गया है।
AIMIM-RJD में बंटा मुस्लिम वोट, NDA को फायदा
सीमांचल क्षेत्र यानी की किशनगंज, कटिहार, अररिया, पूर्णिया AIMIM का गढ़ माना जा रहा था। लेकिन इस बार यहां आरजेडी और एनडीए दोनों ने अपना नेटवर्क मजबूत किया। कई मुस्लिम बहुल सीटों पर RJD और AIMIM के बीच सीधा वोट बंट गया, जिससे दोनों को नुकसान हुआ और एनडीए को अप्रत्यक्ष फायदा पहुंचा। विश्लेषकों का मानना है कि ओवैसी की पार्टी पहचान की राजनीति पर अटकी रह गई, जबकि मतदाता अब रोजगार, सड़क और शिक्षा जैसे मुद्दों पर वोट कर रहे हैं।
AIMIM की चुनावी रणनीति पर सवाल
राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, AIMIM ने बिहार में स्थानीय नेतृत्व तैयार नहीं किया। पार्टी का चेहरा सिर्फ असदुद्दीन ओवैसी तक सीमित रहा, जिससे जमीनी कार्यकर्ताओं का नेटवर्क कमजोर पड़ा। मैट्रिज सर्वे के अनुसार AIMIM को इस बार 2–3 सीटें मिल सकती हैं, जबकि वोट शेयर सिर्फ 1% रहने का अनुमान है। यह गिरावट बताती है कि ओवैसी की रैलियों और भाषणों के बावजूद मतदाता पार्टी को गंभीर विकल्प के रूप में नहीं देख रहे।
2020 से 2025 तक का सफर
2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में AIMIM ने 20 सीटों पर चुनाव लड़ा और अमौर, बहादुरगंज, कोचाधामन, बिस्फी और जोकीहाट की सीटों पर कब्जा जमाया था। लेकिन एग्जिट पोल्स बताते हैं कि 2025 में यह ग्राफ तेजी से नीचे आ रहा है। अब पार्टी 25 सीटों पर लड़ी, जिनमें से 15 सीमांचल में थीं, लेकिन एग्जिट पोल्स के मुताबिक प्रदर्शन कमजोर रहा। यह दर्शाता है कि AIMIM की शुरुआती सफलता स्थायी जनाधार में तब्दील नहीं हो पाई।
क्या मुस्लिम वोट की बदल रही दिशा?
एग्जिट पोल्स के मुताबिक, मुस्लिम वोट अब एकमुश्त AIMIM की ओर नहीं जा रहे। मतदाता उन दलों की ओर झुक रहे हैं जो सत्ता तक पहुंचने की अधिक संभावना रखते हैं। यह संकेत है कि बिहार के मुस्लिम मतदाता अब पहचान आधारित राजनीति की बजाय प्रभाव आधारित राजनीति को प्राथमिकता दे रहे हैं।
एग्जिट पोल्स ओवैसी की पार्टी के लिए खतरे की घंटी
कुल मिलाकर अगर एग्जिट पोल्स के अनुमान सही साबित होते हैं, तो यह ओवैसी की पार्टी के लिए खतरे की घंटी होगी और स्पष्ट संदेश होगा कि सीमांचल अब पहले जैसा नहीं रहा। यानी AIMIM को भविष्य में टिके रहने के लिए स्थानीय नेतृत्व, विकास एजेंडा और गठबंधन राजनीति पर नए सिरे से सोचने की जरूरत होगी। 14 नवंबर को नतीजे तस्वीर साफ करेंगे कि क्या AIMIM वापसी कर पाएगी या यह चुनाव उसके लिए सिर्फ एक पॉलिटिकल रियलिटी चेक बनकर रह जाएगा?