
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजे कल आएंगे, उससे पहले पूरे राज्य में सियासी उत्साह चरम पर है। इस बार दो चरणों में हुए मतदान में रिकॉर्ड 67% मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया, जो राज्य के चुनावी इतिहास में अब तक का सर्वोच्च आंकड़ा है। खास बात यह रही कि महिलाओं की भागीदारी पुरुषों से 9% अधिक रही, जिससे स्पष्ट संकेत मिलते हैं कि इस बार महिला मतदाताओं की भूमिका निर्णायक रहने वाली है। लेकिन इन सबके बीच बड़ा सवाल ये उठा है कि क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मैराथन रैलियों ने चुनावी माहौल को गरमा दिया है? क्या बिहार में रिकॉर्ड मतदान के पीछे पीएम मोदी की रैलियां हैं?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एनडीए की ओर से प्रचार अभियान की शुरुआत 24 अक्टूबर को समाजवादी नेता और भारत रत्न कर्पूरी ठाकुर को श्रद्धांजलि देकर की। कर्पूरी ग्राम (समस्तीपुर) से शुरू हुआ उनका यह अभियान प्रतीकात्मक रूप से समाजवादी विचारों और समान अवसरों के प्रति सम्मान का संदेश लेकर चला। इसी दिन प्रधानमंत्री ने समस्तीपुर और बेगूसराय में जनसभाओं को संबोधित किया, जहां क्रमशः 71.74% और 69.87% वोटिंग हुई। यह इस बात का संकेत था कि मोदी की सभाओं ने मतदाताओं में उत्साह भरा।
30 अक्टूबर को प्रधानमंत्री ने मुजफ्फरपुर और छपरा में रैलियां कीं। इन इलाकों में 71.81% और 63.86% मतदान हुआ। इन सभाओं में मोदी ने विपक्षी गठबंधन पर छठी मैया और राम मंदिर के अपमान का आरोप लगाते हुए कहा था कि बिहार की संस्कृति पर हमला करने वालों को जनता जवाब देगी। 2 नवंबर को नवादा और आरा में जनसभाओं के साथ पटना में रोड शो भी हुआ। हालांकि इन तीनों जगहों पर मतदान प्रतिशत अपेक्षाकृत कम रहा, नवादा में 57.86%, आरा में 59.90% और पटना में 59.02 फीसदी ही वोट पड़े। इसके अगले दिन यानी 3 नवंबर को पीएम मोदी ने कटिहार और सहरसा में रैलियां कीं, जहां क्रमशः 79.10% और 69.38% मतदान हुआ।
दूसरे चरण में मोदी ने भागलपुर और अररिया में प्रचार किया। यहां उन्होंने खासतौर पर माताओं और बेटियों से अपील की कि राजद के जंगलराज को लौटने से रोकने के लिए बड़ी संख्या में मतदान करें। परिणामस्वरूप भागलपुर में 67.75% और अररिया में 70.62% रिकॉर्ड मतदान दर्ज हुआ। अभियान के अंतिम चरण में प्रधानमंत्री 7 और 8 नवंबर को भभुआ, औरंगाबाद, बेतिया और सीतामढ़ी पहुंचे। बेतिया में 71.38% और सीतामढ़ी में 67.21 प्रतिशत मतदान हुआ। अंतिम जनसभा में उन्होंने कहा कि मैंने अपनी यात्रा कर्पूरी ठाकुर की जन्मभूमि से शुरू की थी और इसे महात्मा गांधी की कर्मभूमि पर समाप्त कर रहा हूं। यह बिहार की आत्मा को नमन है।
दो चरणों में हुए रिकॉर्ड मतदान ने बिहार की सियासत में नई ऊर्जा भर दी है। अब सबकी निगाहें कल आने वाले नतीजों पर टिकी हैं, जो तय करेंगे कि बिहार में सत्ता की बागडोर किसके हाथ में जाएगी। क्या बिहार नीतीश के सुशासन और पीएम मोदी के विकास पर भरोसा करेगा या फिर तेजस्वी यादव का बदलाव वाला नारा बुलंद होगा।
Oops! Looks like you have exceeded the limit to bookmark the image. Remove some to bookmark this image.