
बिहार विधानसभा चुनाव के दूसरे और अंतिम चरण से ठीक पहले केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने सासाराम में एक बड़ी रैली कर विपक्ष और प्रतिद्वंद्वी दलों पर जमकर हमला बोला। शाह ने कहा कि पहले चरण के मतदान में लालू की पार्टी का सूपड़ा साफ हो गया और उनका दावा था कि बिहार में फिर से एनडीए की सरकार बनने जा रही है। साथ ही उन्होंने मतदाताओं से सतर्क रहने की अपील करते हुए कहा कि अगर जरा सी भी चूक हुई तो जंगलराज लौट सकता है।
रैली में अमित शाह ने विपक्षी नेताओं राहुल गांधी और तेजस्वी यादव पर तीखा हमला किया। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल-तेजस्वी की हालिया यात्रा घुसपैठियों की रक्षा के लिए निकाली गई थी और ऐसे लोग स्थानीय नौकरियों व राशन का हिस्सा हड़प कर रहे हैं। शाह ने कहा कि ये लोग घुसपैठियों को वोट बैंक बना रहे हैं। हमें ऐसा वोट बैंक नहीं चाहिए; हमें सासाराम के युवाओं और मेहनती बहनों-भाइयों के वोट चाहिए।
सुरक्षा और आतंकवाद के मुद्दे पर अमित शाह ने केंद्र की नीतियों का पिछली सरकारों की तुलना करते हुए कहा कि वर्तमान सरकार ने सख्ती दिखाई है। उन्होंने उरी, पुलवामा और पहलगाम घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में सुरक्षा कार्रवाई हुईं और ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान में आतंकियों पर कार्रवाई की गई। इन दावों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा अब मजबूत है और वह इसे और पुख्ता रखना चाहते हैं।
शाह ने लालू-राबड़ी व सोनिया परिवार पर भी निशाना साधा और कहा कि वे अपने-अपने परिवारवादी हित साधने की कोशिश में हैं। उन्होंने तंज में कहा कि न तो लालू का बेटा मुख्यमंत्री बनेगा और न ही सोनिया का बेटा प्रधानमंत्री। पटना में नीतीश कुमार और दिल्ली में मोदी जी हैं; वहां कोई वैकेंसी नहीं है। आर्थिक व कल्याण वादों को भी शाह ने रैली का हिस्सा बनाया। उन्होंने कहा कि जब एनडीए फिर से सत्ता में आएगा तो प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की राशि 6,000 रुपए से बढ़ाकर 9,000 रुपए कर दी जाएगी।
रैली के दौरान शाह ने चुनावी हिंसा व कानून-व्यवस्था के संभावित खतरों का भी हवाला देते हुए मतदाताओं को सतर्क रहने का संदेश दिया। उन्होंने स्थानीय व राष्ट्रीय मुद्दों को जोड़कर यह संदेश देने की कोशिश की कि विकास और सुरक्षा के एजेंडे पर ही बिहार की प्रगति संभव है। राजनीतिक विश्लेषक कहते हैं कि चुनाव के अंतिम दिनों में ऐसे तीखे बयान आम हैं। यह मतदाताओं की भावना को भुनाने और अपने वोट बैंक को प्रेरित करने की रणनीति का हिस्सा है। बता दें कि बिहार में दूसरे चरण का मतदान 11 नवंबर को होगा और नतीजे 14 नवंबर को आएंगे।
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