
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 अपने निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुका है। पहले चरण की वोटिंग के बाद अब पूरे राज्य की नजर कल यानी 11 नवंबर को होने वाले दूसरे चरण के मतदान पर टिकी है। इस चरण में 20 जिलों की 122 सीटों पर कुल 1,302 उम्मीदवारों की किस्मत 3 करोड़ 70 लाख से अधिक मतदाता तय करेंगे। 14 नवंबर को नतीजे आएंगे, लेकिन उससे पहले सियासी समीकरणों की गुत्थियां और पेचीदा होती जा रही हैं।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अगुवाई में एनडीए एक बार फिर सत्ता में वापसी की जद्दोजहद में जुटा है। एनडीए की सबसे बड़ी ताकत अब भी सुशासन बाबू की छवि और प्रधानमंत्री मोदी की लोकप्रियता बनी हुई है। बीजेपी-जेडीयू गठबंधन का संगठनात्मक ढांचा और RSS-AVBP से जुड़ी टीमों की सक्रियता भी NDA के लिए एक बड़ा सहारा हैं। पेंशन, महिला सशक्तिकरण और सड़क-बिजली परियोजनाओं पर भी एनडीए भरोसा कर रहा है। लेकिन दो दशक की सत्ता के बाद सत्ता-विरोधी लहर से इनकार नहीं किया जा सकता। बीजेपी की सवर्ण पार्टी की छवि अब भी उसे सीमित जनाधार में बांधती है। इसके साथ ही प्रशांत किशोर जैसे नए चेहरों का मैदान में उतरना और इंडिया ब्लॉक का आक्रामक अभियान एनडीए के लिए चुनौती बन सकता है।
राजद नेता तेजस्वी यादव की अगुवाई में महागठबंधन इस बार पूरी तैयारी के साथ मैदान में है। उसकी सबसे बड़ी ताकत मुस्लिम-यादव समीकरण है, जो बिहार की लगभग 32% आबादी पर असर रखता है। युवाओं में तेजस्वी की लोकप्रियता और रोजगार बनाम वादाखिलाफी का नैरेटिव महागठबंधन को ऊर्जा दे रहा है। कांग्रेस, आरजेडी और वामपंथी दलों के तालमेल ने एक साझा मोर्चा तो बनाया है लेकिन नेतृत्व की अस्पष्टता और अंदरूनी मनमुटाव अब भी उसकी कमजोरी है। कांग्रेस के पास न तो कोई बड़ा स्थानीय चेहरा है और न ही एक मजबूत संगठनात्मक ढांचा। फिर भी जाति सर्वेक्षण और सामाजिक न्याय के मुद्दे पर महागठबंधन ने NDA को रक्षात्मक स्थिति में ला दिया है।
दूसरे चरण में सीमांचल और मगध क्षेत्र की सीटें अहम हैं, जहां AIMIM की मौजूदगी मुस्लिम वोटों के बिखराव का कारण बन सकती है। वहीं प्रशांत किशोर युवाओं में रोजगार और पलायन के मुद्दे को लेकर एक नई राजनीति गढ़ने की कोशिश में हैं, जो सीधे तेजस्वी यादव के जनाधार को चुनौती देती है। यह चरण एनडीए और महागठबंधन दोनों के लिए निर्णायक है। जहां एक ओर एनडीए विकास और स्थिरता की अपील के साथ मैदान में है, वहीं महागठबंधन परिवर्तन और रोजगार की उम्मीद के साथ जनता के दरवाजे पर दस्तक दे रहा है। अब देखना यह है कि जनता परंपरा को बरकरार रखती है या परिवर्तन की राह चुनती है।
बिहार विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण के लिए 11 नवंबर यानी की कल मतदान होगा, नतीजे 14 नवंबर को आएंगे। दूसरे चरण के मतदान में मतदाता यह तय करेंगे कि राज्य एक बार फिर नीतीश कुमार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व पर भरोसा जताएगा या तेजस्वी यादव के नई सोच, नया बिहार के नारे को मौका देगा। दूसरे चरण की वोटिंग बिहार की दिशा और दशा तय करने वाली लड़ाई है।
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