
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के माहौल में अब सोशल मीडिया भी चुनावी रणभूमि बन चुका है। प्रचार और पोस्ट की इस जंग पर बिहार की आर्थिक अपराध इकाई ने सख्त रुख अपनाया है। चुनाव के दौरान डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बढ़ती भड़काऊ गतिविधियों के बीच EOU ने बीजेपी, आरजेडी और कांग्रेस तीनों प्रमुख दलों के खिलाफ FIR दर्ज की है। इन दलों पर आरोप है कि उनके आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट्स से धार्मिक और जातीय नफरत फैलाने वाले पोस्ट साझा किए गए, जिससे समाज में तनाव फैलने की संभावना थी।
EOU के डीआईजी मानवजीत सिंह ढिल्लों के मुताबिक तीनों राजनीतिक दलों के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कई ऐसे कंटेंट पाए गए जो न केवल चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन करते हैं, बल्कि उनका उद्देश्य समाज में धार्मिक और जातीय वैमनस्य पैदा करना था। ढिल्लों ने कहा कि EOU की साइबर मॉनिटरिंग टीम लगातार निगरानी कर रही है। जिन पोस्ट्स की तकनीकी जांच में प्रमाण मिले हैं, उन्हीं के आधार पर संबंधित दलों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। इस कार्रवाई के बाद बिहार की सियासत में हलचल मच गई है और इसे चुनावी रणनीति से भी जोड़कर देखा जा रहा है।
EOU की रिपोर्ट के मुताबिक, जांच में पाया गया कि कुछ पोस्ट पार्टी के आधिकारिक हैंडल और कुछ प्रमाणित कार्यकर्ताओं के अकाउंट से साझा किए गए थे। इनमें धर्म, जाति और समुदाय के आधार पर आपत्तिजनक टिप्पणियां की गई थीं, जिससे सामाजिक सौहार्द बिगड़ने की आशंका थी। इन सभी मामलों में आईटी एक्ट और चुनाव आचार संहिता की संबंधित धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई है।
डीआईजी ढिल्लों ने बताया कि इस बार सोशल मीडिया निगरानी के लिए स्पेशल इलेक्शन सेल बनाया गया है, जो 24 घंटे तीन शिफ्टों में काम कर रहा है। उन्होंने कहा, हमारी टीमें हर पोस्ट, वीडियो और मैसेज की निगरानी कर रही हैं। कोई भी दल, प्रत्याशी या व्यक्ति अगर डिजिटल प्लेटफॉर्म का दुरुपयोग करेगा, तो उस पर तुरंत कार्रवाई होगी।
EOU के अनुसार, सोशल मीडिया पर AI और डीपफेक वीडियो का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। इसके लिए एक अलग AI मॉनिटरिंग डेस्क गठित की गई है। इस डेस्क ने पिछले हफ्ते 17 संदिग्ध पोस्ट हटाए हैं, जिनमें कई डीपफेक वीडियो भी शामिल थे। अब तक 67 लिंक और 25 सोशल मीडिया हैंडल्स के खिलाफ 21 अलग-अलग केस दर्ज किए जा चुके हैं। साथ ही 184 आपत्तिजनक प्रोफाइल हटाई गईं, जबकि 135 प्रोफाइल और इंटरनेट हैंडल्स को निगरानी में रखा गया है। इनमें 28 यूट्यूब चैनल, 77 सोशल मीडिया प्रोफाइल और 40 अन्य हैंडल शामिल हैं।
EOU ने यह भी बताया कि चार यूट्यूब चैनलों पर कार्रवाई की गई है, जिन पर जातीय और धार्मिक आधार पर भड़काऊ कंटेंट प्रसारित किए जा रहे थे।
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