बिहार विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण में उम्मीदवारों की छवि पर एडीआर रिपोर्ट ने गंभीर तस्वीर पेश की है। 1,302 में से 43% उम्मीदवार करोड़पति हैं, जबकि 32% पर आपराधिक मामले दर्ज हैं। यानी की हर तीसरा उम्मीदवार आपराधिक छवि वाला है। इनमें 26% पर हत्या, हत्या की कोशिश और महिलाओं पर अत्याचार जैसे गंभीर आरोप हैं। शिक्षा के लिहाज से 48% उम्मीदवार स्नातक या उससे अधिक हैं, लेकिन महिला उम्मीदवारों की संख्या मात्र 10% है। आयु वर्ग में 34% प्रत्याशी 25-40 वर्ष के बीच हैं।
हर तीसरे उम्मीदवार का अपराध से नाता!
एडीआर और बिहार इलेक्शन वॉच ने 1,297 उम्मीदवारों के शपथपत्रों का विश्लेषण कर बताया कि 26% प्रत्याशियों पर गंभीर आपराधिक आरोप हैं; जिनमें 193 पर हत्या, 79 पर हत्या की कोशिश और 52 पर महिलाओं के खिलाफ अत्याचार के मामले शामिल हैं। वहीं, तीन उम्मीदवारों ने खुद पर दुष्कर्म के मामले दर्ज होने की जानकारी दी है। सबसे ज्यादा गंभीर आपराधिक पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवार सीपीएम (100%), सीपीआई (माले) (76%), और लोजपा (रामविलास) (60%) से हैं। कांग्रेस के 54%, भाजपा के 42% और राजद के 39% उम्मीदवारों पर भी गंभीर आरोप हैं।
34 फीसदी युवा सियासी मैदान में
दूसरी ओर शिक्षा और संपत्ति के लिहाज से भी तस्वीर दिलचस्प है। कुल उम्मीदवारों में से 48% स्नातक या उससे अधिक शिक्षित हैं, जबकि 10% यानी 133 महिलाएं चुनावी मैदान में हैं। आयु वर्ग की बात करें तो 34% उम्मीदवार 25 से 40 वर्ष, 52% उम्मीदवार 41 से 60 वर्ष और 13% उम्मीदवार 61 से 80 वर्ष के बीच हैं। दो उम्मीदवारों ने अपनी आयु 80 वर्ष से अधिक बताई है। यह रिपोर्ट बताती है कि बिहार की राजनीति में पैसा, प्रभाव और अपराध अभी भी उम्मीदवार चयन के निर्णायक तत्व बने हुए हैं, जबकि युवा और महिला प्रतिनिधित्व अब भी सीमित दायरे में है।