Bihar Election Result 2025: RJD पर बड़ा सियासी खतरा, क्या थम जाएगी राज्यसभा में लालू की आवाज?

बिहार चुनाव में RJD की भारी हार ने पार्टी को राज्यसभा से गायब होने के कगार पर ला दिया है। 143 सीटों पर लड़कर महज 25 जीतने वाली RJD के 5 राज्यसभा सांसद अगले 4 वर्षों में रिटायर होने वाले हैं। NDA की बड़ी बहुमत के कारण 2026 और 2028 में होने वाले राज्यसभा चुनावों में RJD के लिए सीट जीतना लगभग असंभव है।

Rishabh Shukla
अपडेटेड15 Nov 2025, 09:17 PM IST
लालू यादव और तेजस्वी यादव
लालू यादव और तेजस्वी यादव (HT)

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजों ने राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के भविष्य पर कई स्तरों पर गहरा असर डालना शुरू कर दिया है। इस चुनाव में पार्टी ने सबसे ज्यादा 143 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन नतीजा बेहद निराशाजनक रहा और आरजेडी सिर्फ 25 सीटें जीत पाई। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बिहार विधानसभा में राजद की हार आने वाले वर्षों में दिल्ली की सियासत में भी पार्टी के लिए बड़ा संकट खड़ा कर देगी। अगर पार्टी अपनी वर्तमान ताकत से आगे नहीं बढ़ पाती, तो 2030 तक ऐसा पहली बार होगा कि राज्यसभा में आरजेडी का एक भी सांसद मौजूद नहीं होगा। यह वही सदन है जहां कभी लालू प्रसाद यादव और उनके सहयोगियों की जोरदार उपस्थिति राजनीतिक संतुलन तय किया करती थी।

बिहार की हार से दिल्ली में उपजा संकट

राज्यसभा में फिलहाल आरजेडी के 5 सदस्य मौजूद हैं, लेकिन इनका कार्यकाल अगले चार बरस में समाप्त हो जाएगा। प्रेमचंद गुप्ता और एडी सिंह अप्रैल 2026 में रिटायर होंगे, जबकि फयाज अहमद जुलाई 2028 में सदन से विदा लेंगे। इसके बाद साल 2030 में मनोज झा और संजय यादव का कार्यकाल पूरा होगा। नई बिहार विधानसभा की संरचना को देखते हुए स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो जाती है। 2026 में बिहार से खाली होने वाली 5 राज्यसभा सीटों का पूरा गणित एनडीए के पक्ष में है, क्योंकि जेडीयू और राष्ट्रीय लोक मोर्चा की खाली होने वाली सीटों सहित एनडीए के पास सदन में स्पष्ट बहुमत है। इसीलिए 2026 के साथ-साथ 2028 में खाली होने वाली पांचों सीटें भी स्वाभाविक रूप से एनडीए के खाते में जाने की संभावना है। इस स्थिति में आरजेडी के लिए समर्थन जुटाना लगभग असंभव होगा।

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साल 2030 में राजद के राज्यसभा में शून्य होने का खतरा

सबसे गंभीर स्थिति 2030 में बनती है, जब मनोज झा और संजय यादव के भी रिटायर होने के बाद आरजेडी को अपना प्रतिनिधित्व बचाने के लिए बिहार विधानसभा में पर्याप्त संख्या चाहिए। पर मौजूदा शक्ति संतुलन में यह लगभग असंभव दिखता है। यहां तक कि यदि AIMIM उस वक्त आरजेडी का समर्थन भी करे, तब भी गणित ऐसा बन रहा है कि पार्टी के पास राज्यसभा चुनाव जीतने के लिए जरूरी मतों का अभाव रहेगा। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि छोटी पार्टियां आम तौर पर राज्यसभा चुनाव में तत्कालीन राजनीतिक फायदे और समीकरण देखकर वोट करती हैं इसलिए 2030 में आरजेडी का एक भी सदस्य सदन में न रहे इस बात की संभावना प्रबल है। बिहार की इस हार से राजद की आवाज राज्य के साथ दिल्ली के ऊपरी सदन में भी कमजोर होती दिख रही है।

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राज्यसभा का पूरा गणित समझें

राज्यसभा में बिहार से 16 सीटें हैं। इस समय ऊपरी सदन में एनडीए का 10 सीटों पर कब्जा है। वहीं विपक्ष के पास कुल 6 सीटें हैं, जिनमें से 5 आरजेडी और एक कांग्रेस के पास है। राज्यसभा चुनाव में जीत के लिए कितने वोटों की जरूरत होती है, ये पहले से ही तय होता है। वोटों की संख्या, कुल विधायकों की संख्या और राज्यसभा सीटों की संख्या के आधार पर निकाली जाती है। इसमें एक विधायक की वोट की वैल्यू 100 होती है।

राज्यसभा चुनाव के लिए फॉर्मूला

कुल विधायकों की संख्याx100/(राज्यसभा की सीटें+1)= +1

उदाहरण के तौर पर... जैसे- बिहार में राज्यसभा चुनाव होने हो और राज्य में राज्यसभा की कुल 16 सीटें हैं। बिहार विधानसभा में वर्तमान में 243 विधायक हैं। उदहारण के तौर पर साल 2026 में 5 सीटों पर चुनाव होने हैं, तो इसका फॉर्मूला कुछ ऐसा होगा...

243*100= 24300/5+1= 4860+1= 4861

चूंकि एक विधायक के वोट की वैल्यू 100 होती है। इसलिए बिहार में एक राज्यसभा सीट पर जीत के लिए कम से कम 48 विधायकों की जरूरत होगी।

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