Bihar Election Result: बिहार चुनाव में '0' सीट जीतकर CPI ने बनाया ऐसा रिकॉर्ड, जिंदगी भर नहीं भूल पाएगी पार्टी

Bihar Election Result: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में भाकपा को हार का सामना करना पड़ा है। यह तीसरी बार है जब भाकपा का खाता नहीं खुला। पार्टी ने नौ सीटों पर उम्मीदवार उतारे, लेकिन सभी सीटों पर हार मिली…

Anuj Shrivastava
अपडेटेड16 Nov 2025, 02:42 PM IST
बिहार में CPI ने बनाया एतिहासिक रिकॉर्ड
बिहार में CPI ने बनाया एतिहासिक रिकॉर्ड

Bihar Election Result: वर्ष 2025 बिहार विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की प्रचंड लहर में महागठबंधन के घटक दल भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) का सूपड़ा साफ हो गया है।बिहार में 1952 से लेकर 2025 तक हुये विधानसभा चुनावों में ऐसा तीसरी बार हुआ है कि भाकपा का खाता नहीं खुला है। वर्ष 1952 और 2015 के विधानसभा चुनाव में भी भाकपा का खाता नहीं खुला था। यह तीसरा मौका है जब भाकपा को इतनी करारी हार का सामना करना पड़ा है।

इस बार के चुनाव में भाकपा ने नौ सीटों बिहारशरीफ, करहगर, राजापाकड़ (सुरक्षित), बछ़वाडा, तेघड़ा, बखरी (सुरक्षित),बांका,हरलाखी और झंझारपुर सीट पर अपने उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन सभी को शिकस्त का सामना करना पड़ा। वर्ष 2020 के चुनाव दो सीटों तेघड़ा और बखरी (सुरक्षित) सीट पर भाकपा के उम्मीदवारों ने जीत हासिल की थी, लेकिन इस चुनाव में ये दोनों सीटे भाकपा के हाथों से फिसल गयी।तेघड़ा के निवर्तमान विधायक राम रतन सिंह को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) उम्मीदवार रजनीश कुमार सिंह ने 35634 मतों के अंतर से मात दे दी, वहीं बखरी (सुरक्षित) सीट के निवर्तमान विधायक सूर्यकांत पासवान को लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के उम्मीदवार संजय कुमार ने 17318 मतो के अंतर से शिकस्त दी।

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सभी सीटों पर हार गई CPI

इस बार के चुनाव में इन नौ सीटों में से चार सीटों बिहारशरीफ, करहगर, राजापाकड़ (सुरक्षित) और बछ़वाडा में भाकपा और महागठबंधन के ही घटक कांग्रेस के प्रत्याशी भी एक-दूसरे को चुनौती देते नजर आये। इन सभी चार सीटों पर हुये दोस्ताना संघर्ष में न ही भाकपा और न ही कांग्रेस को जीत मिली। राजग के उम्मीदवारों ने बाजी अपने नाम कर ली। इनमें दो सीटें राजापाकड़ (सुरक्षित) और करहगर जिस पर कांग्रेस ने वर्ष 2020 में कब्जा जमाया था ,यह सीट भी उसके हाथ से निकल गयी। राजापाकड़ की निवर्तमान विधायक प्रतिमा कुमारी और करहगर के निवर्तमान विधायक संतोष कुमार मिश्रा को हार का सामना करना पड़ा। ऐसा माना जा रहा है कि इन दोनों सीटों पर यदि कांग्रेस या फिर भाकपा अकेले चुनाव लड़ती तो परिणाम महागठंधन के उम्मीदवारो के पक्ष में जा सकते थे।

अन्य पांच सीटों में बिहारशरीफ, बछ़वाडा, बांका,हरलाखी और झंझारपुर में वर्ष 2020 के चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के उम्मीदवारों ने कब्जा जमाया था। इस बार भी सभी पांच सीटें राजग के उम्मीदवारों ने अपने नाम की। इनमें तीन सीटों पर बिहार सरकार के मंत्री चुनाव जीते।इनमें बिहारशरीफ से भाजपा प्रत्याशी एवं पर्यावरण एवं वन मंत्री डॉ. सुनील कुमार ,बछवाड़ा से भाजपा के उम्मीदवार और खेल मंत्री सुरेन्द्र मेहता और झंझारपुर से पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय जगन्नाथ मिश्रा के पुत्र जनता दल यूनाईटेड (जदयू) उम्मीदवार और उद्योग मंत्री नीतीश मिश्रा ने जीत दर्ज की। पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्रा ने लगातार पांच बार 1972 से 1990 तक इस सीट पर जीत हासिल की थी।

2015 में भी नहीं खुला था खाता

इसके अलावा बांका और हरलाखी में भी भाकपा उम्मीदवारों को हार मिली। बांका से भाजपा के निवर्तमान विधायक और पूर्व मंत्री राम नारायण मंडल ने सातवीं बार जीत दर्ज की, वहीं हरलाखी में जदयू के उम्मीदवार और निवर्तमान विधायक सुधांशु शेखर ने जीत हासिल की। वर्ष 1952 के पहले विधानसभा चुनाव में भाकपा का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा था। इस वर्ष भाकपा ने 24 प्रत्याशियों को चुनावी मैदान में उतारा,लेकिन उसका कोई सदस्य विधानसभा नहीं पहुंच सका था। वर्ष 2015 में बिहार विधानसभा में चुनाव में भाकपा ने 98 सीटों पर अपने उम्मीदवार चुनावी मैदान में उतारे, लेकिन सभी को पराजय मिली।

वर्ष 1972 में भाकपा ने बिहार विधानसभा चुनाव में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया है। छठे विधानसभा चुनाव में भाकपा ने कांग्रेस से तालमेल कर 55 प्रत्याशी खड़े किये और उसके 35 प्रत्याशी जीत हासिल करने में कामयाब रहे।

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एक दौर था जब बिहार की कई विधानसभा सीटों पर भाकपा का लाल झंडा बुलंद था। वक्त बदला। हालात बदले। मतदाताओं का मन और मूड भी बदल गया। वामदल की उपस्थिति बिहार के हर इलाके में थी। भाकपा के प्रत्याशी कई सीटों पर मुकाबले में रहते थे। भाकपा के विभाजन और कुछ राजनीतिक समीकरण में बदलाव के बाद वामदल की स्थिति कमजोर हुयी। बिहार में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के उदय से पहले 90 के दशक के अंत तक बिहार में वामपंथी दलों की मौजूदगी सड़क से लेकर सदन तक दिखाई देती थी।

बिहार में वाम दल मजबूत स्थिति में था, लेकिन राजद प्रमुख लालू प्रसाद के उभार में वामदल अपनी सियासी जमीन गंवा बैठे। वाम दलों के वोटर राजद में शिफ्ट हो गए।बाद के दिनों में लालू प्रसाद यादव ने वामदल को तगड़ी चोट दी।इसके बाद नीतीश कुमार और रामविलास पासवान ने भी अतिपिछड़े, पिछड़े और दलित तमाम जातियों की गोलबंदी कर वामपंथी दलों की बची-खुची जमीन अपने नाम कर ली। बिहार में कई इलाके वामदल का कभी गढ़ रहे थे। समय के साथ वामदल का जनाधार बिहार में घटता गया। वर्ष 2020 में बिहार विधानसभा चुनाव में भाकपा को केवल दो सीटों पर जीत मिली थी लेकिन इस बार वह शून्य पर सिमट गयी।

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