
Bihar Election Result: बिहार चुनाव 2025 में एनडीए की धमाकेदार जीत के बाद सूबे की सियासत में एक नई उम्मीद की लहर दिख रही है। नतीजे जैसे ही साफ हुए, बीजेपी-जेडीयू की अगुवआई वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के धड़े जश्न में डूब गए। दिल्ली के बीजेपी हेडक्वॉर्टर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी बिहार वासियों को जीत की बधाई दी। पीएम ने अपने संबोधन में एक खास बात पर बहुत जोर दिया कि अगले पांच वर्ष में बिहार की तस्वीर बदली जाएगी।
इस बार जनता ने अपने वोट से बता दिया कि वे किस दिशा में राज्य को आगे ले जाना चाहती है। जब 14 नवंबर की शाम प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में बिहार के विकास को लेकर गंभीर प्रयास किए जाने का भरोसा दिलाया तो सरकार की सोच ज्यादा स्पष्ट हो गई। अब बिहारवासियों में उम्मीद जग सकती है कि विकास अब भाषणों से निकलकर जमीन पर अपना रंग दिखाएगा।
इस चुनाव में बेरोजगारी, पलायन और उद्योगों की कमी बड़े मुद्दे बने रहे। जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने इन मुद्दों को सबसे मुखर तरीके से उठाया। उन्होंने गांव-गांव जाकर बताया कि किस तरह बिहार के युवा रोजगार के लिए दूर-दराज राज्यों में भटक रहे हैं और यहां उद्योग लगाने का सपना वर्षों से अधूरा पड़ा है।
प्रशांत और उनकी पार्टी के ये मुद्दे बिहार के लोगों को लुभाए, लेकिन अब चुनाव नतीजे बता रहे हैं कि मतदाताओं ने सपनों को पूरा करने का दमखम नीतीश-मोदी की जोड़ी में ही देखा है। जब प्रधानमंत्री मोदी ने खुद पलायन, उद्योग और रोजगार को अपने संबोधन में केंद्र में रखा, तो लोगों का भरोसा और मजबूत हो गया है।
पीएम मोदी ने अपने भाषण में सबसे ज्यादा जोर इसी बात पर दिया कि अब बिहार को रोजगार और उद्योग के रास्ते आगे बढ़ाना होगा क्योंकि जब बिहार में ही नौकरियां बढ़ेंगी, तभी पलायन अपने आप कम होगा। सरकार ने इस दिशा में पहले से ही कई कदम बढ़ा दिए हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, बिहार बिजनेस कनेक्ट 2024 में राज्य को पूरे 1.81 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिले हैं। कुल 423 कंपनियों ने अलग-अलग क्षेत्रों में निवेश के लिए सहमति पत्र (MoU) साइन किए हैं।
सन पेट्रोकेमिकल्स, जिसने 36,700 करोड़ रुपये के नवीकरणीय ऊर्जा प्रोजेक्ट्स का प्रस्ताव दिया है। वहीं, अडानी समूह ने करीब 28,000 करोड़ रुपये के निवेश का वादा किया है, जिसमें थर्मल पावर, सीमेंट, फूड प्रोसेसिंग और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्र शामिल हैं।
नवीकरणीय ऊर्जा: 90,734 करोड़ रुपये
जनरल मैन्युफैक्चरिंग: 55,888 करोड़ रुपये
फूड प्रोसेसिंग: 13,663 करोड़ रुपये
अर्बन इन्फ्रास्ट्रक्चर: 5,566 करोड़ रुपये (142 कंपनियों के साथ MoU)
अब राज्य में स्पेशल इंडस्ट्रियल जोन बनाने की भी तैयारी चल रही है। इसके लिए नई औद्योगिक नीति लगभग तैयार हो चुकी है। माना जा रहा है कि इन जोन्स के बनने से बिहार कई क्षेत्रों में एक बड़ा इंडस्ट्रियल हब बन सकता है और आने वाले समय में यहां रोजगार के नए दरवाजे खुलेंगे।
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने साफ कहा कि आने वाले 25 साल बिहार के विकास के लिए निर्णायक होंगे। उन्होंने बुनियादी ढांचे, रोजगार, उद्योग और सामाजिक उत्थान पर तेजी से काम करने की बात कही। यह केवल आश्वासन नहीं, बल्कि जनता के जनादेश के बाद सरकार की जिम्मेदारी है।
अब जब जनता ने एक बार फिर एनडीए पर भरोसा जताया है, तो गठबंधन पर भी यह नैतिक जिम्मेदारी है कि वे बिहार की पिछली तमाम शिकायतों को गंभीरता से लें और विकास का वादा सिर्फ कागजों में नहीं, बल्कि जमीन पर दिखाएं।
केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी का बयान भी बिहार की जनता की अपेक्षा पूरी होने की उम्मीद बढ़ा रहे हैं।
एनडीए की जीत सिर्फ राजनीतिक सफलता नहीं, बल्कि एक संदेश भी है कि जनता बदलाव चाहती है और इस बार उससे कम कुछ स्वीकार नहीं करेगी। बिहार के मतदाताओं ने दर्द की दवा मिलने की उम्मीद एनडीए से लगाई, उसकी डिलीवरी नई सरकार को करनी ही होगी।
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