
बिहार विधानसभा चुनाव के लिए शुक्रवार को मतगणना जारी है। इस बार राज्य की 243 विधानसभा सीटों के लिए दो चरणों में मतदान हुए थे। वहीं, फिलहाल तो राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) बढ़त बनाए हुए है। इस बीच प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और भारतीय राजनीति में सबसे चर्चित चेहरों में से एक लालू प्रसाद यादव भी चर्चा का विषय बने हुए हुए हैं।
दरअसल, बिहार चुनाव में लालू फैक्टर हर बार देखने को मिलता है, लेकिन इस बार लालू यादव किन्हीं अन्य कारणों से सुर्खियां बटोर रहे हैं। इस बार मुद्दे अनेक हैं। बता दें कि बिहार चुनाव के बीच पूर्व रेल मंत्री अपने परिवार की वजह से भी काफी चर्चा में रहे।
यह चुनाव पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के परिवार के लिए बेहद व्यक्तिगत हो गया है, क्योंकि उनके दो बेटे एक ही राजनीतिक मैदान में अलग-अलग पक्षों से चुनाव लड़ रहे हैं। मगर काउंटिंग के दौरान तेजस्वी राघोपुर में और तेज प्रताप महुआ में आगे-पीछे होते हुए नजर आ रहे हैं। इन सबके बीच देखने वाली बात तो ये है कि आखिर इस बार का चुनाव लालू यादव के लिए व्यक्तिगत क्यों हो गया है। तो चलिए जानते हैं इसका जवाब।
बता दें कि 25 मई 2025 को आरजेडी अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने अपने बड़े बेटे तेज प्रताप को गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार और पार्टी की मर्यादा तथा पारिवारिक मूल्यों का पालन न करने के आरोप में छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया। यह कार्रवाई एक कथित फेसबुक पोस्ट के बाद हुई, जिसमें 37 वर्षीय तेज प्रताप ने अनुष्का यादव के साथ अपने लंबे रिलेशनशिप का ज़िक्र किया बताया गया था।
बाद में तेज प्रताप ने कहा कि उनका अकाउंट हैक कर लिया गया था और फोटो एडिट करके उन्हें और उनके परिवार को बदनाम करने की साज़िश की गई।
पार्टी से अलग होने के बाद तेज प्रताप ने जनशक्ति जनता दल (JJD) बनाया और 5 अगस्त को बिहार की 5 छोटी पार्टियों वंचित विकास इंसान पार्टी, भोजपुरीया जन मोर्चा, प्रगतिशील जनता पार्टी, वाजिब अधिकार पार्टी और संयुक्त किसान विकास पार्टी के साथ गठबंधन का एलान किया। इसी नए मंच से वे विधानसभा चुनाव लड़ रहे हैं। दूसरी ओर, खबर लिखे जाने तक महागठबंधन के सीएम चेहरे तेजस्वी यादव मामूली अंतर से पीछे चल रहे हैं।
मतगणना के दिन की तस्वीर दो भाइयों की अलग-अलग दिशा में बढ़ती राजनीतिक कहानी दिखाती है, एक भाई परिवार की पार्टी से निकाले जाने के बाद नई पहचान बनाने की कोशिश कर रहा है, तो दूसरा विपक्षी गठबंधन का प्रमुख चेहरा बना हुआ है। वहीं महुआ के आंकड़े बताते हैं कि तेज प्रताप का अलग होना उनके लिए चुनावी संघर्ष को और मुश्किल बना रहा है।
इसके अलावा राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के घर में चल रही खटपट का एक कारण उनकी बेटी रोहिणी आचार्य भी हैं। ये वो ही शख्स हैं, जिन्होंने अपने पिता को बचाने के लिए उन्हें एक किडनी दी। परिवार में उठते मतभेद के बीच सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर रोहिणी ने ट्वीट करते हुए कहा था कि उन्हें कभी भी किसी पद की लालसा नहीं रही है और उनकी कोई राजनीतिक महत्वकांक्षा नहीं है। उन्होंने ये भी कहा था कि वो बहन और बेटी का फर्ज निभाती रहेंगी।
मगर बिहार विधानसभा चुनाव 2025 को देखते हुए नजर आ रहा है कि इस बार लालू फैक्टर अपना काम पूरा नहीं कर पाया है। कई मीडिया रिपोर्ट्स में इसके पीछे कुछ खास कारण बताए जा रहे हैं, जिनमें से सबसे अहम है खुद लालू प्रसाद यादव का चुनाव प्रचार से दूर रहना। दरअसल, इस बार लालू यादव प्रचार करते कम और पर्दे के पीछे काम करते हुए ज्यादा नजर आए। इसके अलावा परिवार में कलह भी एक अहम मुद्दा था। इससे विरोधियों का फायदा जरूर हुआ।
इसके अलावा जहां एक ओर नीतीश कुमार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बेहतरीन जुगलबंदी देखने को मिली तो वहीं महागठबंधन के बीच बंटी सीटों ने भी कहीं न कहीं लालू फैक्टर को सेंध लगाई। साथ ही, तेजस्वी यादव ने बिहार की जनता से इस चुनाव में हर परिवार में से किसी एक को सरकारी नौकरी देने का वादा भी किया था, लेकिन सीएम नीतीश कुमार की 10 हजार रुपये देने की स्कीम इसपर भारी पड़ती नजर आ रही है।
इन सबके बीच लालू प्रसाद यादव को एक बड़ा झटका और लगा है। बताते चलें कि राष्ट्रीय राजधानी की एक अदालत ने पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव और उनकी पत्नी राबड़ी देवी की आईआरसीटीसी घोटाला मामले में दैनिक सुनवाई के खिलाफ याचिका खारिज कर दी है।
इससे पहले, विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने राष्ट्रीय जनता दल (राजद) प्रमुख और अन्य के खिलाफ धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश के दंडात्मक प्रावधानों के अलावा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की सुसंगत धाराओं के तहत आरोप तय किए थे।
इसने मामले को अभियोजन पक्ष के साक्ष्य के चरण में डाल दिया था, जिसके तहत 27 अक्टूबर से सात नवंबर तक प्रतिदिन औपचारिक गवाहों से जिरह की जानी थी, लेकिन अदालत ने बाद में कुछ आरोपियों की याचिका पर गवाहों से जिरह की अवधि 17 नवंबर तक के लिए टाल दी थी।
लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी और मेसर्स लारा प्रोजेक्ट द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायाधीश गोगने ने कहा, ‘‘अदालत मामलों को दैनिक आधार पर, एक साथ कई तारीखों में या किसी अन्य क्रम में सूचीबद्ध करने का अधिकार सुरक्षित रखती है।’’ इनकी याचिकाओं में ‘‘प्रत्येक सुनवाई के एक सप्ताह बाद तक मामले को सूचीबद्ध न करने’’ का अनुरोध किया था।
उन्होंने कहा कि किसी मामले को किसी विशेष तारीख पर या तारीखों के किसी विशेष क्रम में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करना निचली अदालत के आवश्यक कार्य का एक हिस्सा है, और यह कार्य मामले की प्रकृति, आरोपों की गंभीरता, अभियुक्तों और गवाहों की संख्या, और अन्य कई परिस्थितियों पर विचार करने के बाद किया जाता है।
न्यायाधीश ने कहा, ‘‘मुकदमे पर नियंत्रण अदालत का विशेषाधिकार है, साथ ही यह एक गतिशील प्रक्रिया भी है। हालांकि अदालत हमेशा संबंधित वकीलों की सुविधा का ध्यान रखती है, लेकिन अदालत के विशेषाधिकार को केवल पक्षकारों के कहने पर किसी अनिवार्य आदेश द्वारा छोड़ा या बाध्य नहीं किया जा सकता।’’
उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय और दिल्ली उच्च न्यायालय ने निर्देश दिया है कि अदालतें मामलों का शीघ्र निपटारा करें, स्थगन से बचें और सुनवाई शुरू होने के बाद प्रतिदिन साक्ष्य दर्ज करें।
न्यायाधीश ने कहा, ‘‘अदालत, याचिकाकर्ताओं की अर्जी के अनुसार, प्रत्येक सुनवाई के एक सप्ताह बाद मामले को सूचीबद्ध न करके, अन्य बातों के साथ-साथ, अपने भविष्य के दैनिक आदेशों को बाध्यकारी और प्रतिबंधित करने के लिए अनिच्छुक है।’’
(भाषा इनपुट के साथ)
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