
बिहार की राजनीति में इस वक्त चुनावी तापमान अपने चरम पर है। इसी बीच राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव का एक ट्वीट सियासी गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। तेजस्वी ने कहा कि NCRB के आंकड़ों के अनुसार बिहार अपराध में शीर्ष पर है लेकिन 14 नवंबर को चुनाव परिणाम आने के बाद हालात बदल जाएंगे। उन्होंने दावा किया कि 18 नवंबर को महागठबंधन की सरकार शपथ लेगी और 26 नवंबर से 26 जनवरी 2026 तक अपराधियों का खात्मा किया जाएगा। तेजस्वी ने लिखा कि खरमास में सब अपराधियों का खात्मा हो जाएगा, किसी को भी नहीं बख्शा जाएगा।
तेजस्वी का यह बयान केवल राजनीतिक घोषणा नहीं, बल्कि NDA सरकार के सुशासन दावों पर सीधा सवाल है। NCRB की रिपोर्ट में बिहार हत्या, अपहरण और लूट जैसे गंभीर अपराधों के मामलों में शीर्ष राज्यों में शामिल है। विपक्ष लगातार यह आरोप लगाता रहा है कि भाजपा-जदयू गठबंधन की सरकार में कानून व्यवस्था बुरी तरह चरमरा चुकी है और जनता भय के साये में जी रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि तेजस्वी यादव ने खरमास का प्रतीक इस्तेमाल कर जनता के बीच एक सांस्कृतिक और भावनात्मक जुड़ाव बनाने की कोशिश की है। हिंदू पंचांग के अनुसार खरमास वह अवधि होती है जब शुभ कार्य नहीं किए जाते, लेकिन तेजस्वी ने उसी को अपराधियों के सफाए के रूप में पेश किया। यह चुनावी नैरेटिव को एक नए अंदाज में पेश करने का प्रयास है, जो भयमुक्त बिहार की छवि से जुड़ता है।
तेजस्वी यादव का यह ट्वीट उनके आत्मविश्वास को दर्शाता है और यह संकेत भी देता है कि वे खुद को अब नेक्स्ट जेनरेशन लीडर के रूप में स्थापित करना चाहते हैं, जो सामाजिक न्याय के साथ सुशासन और सुरक्षा दोनों की बात करता है। तेजस्वी का यह बयान बिहार की राजनीति में एक नया विमर्श लेकर आया है, जहां अपराध के खिलाफ सख्ती और शासन में पारदर्शिता को केंद्र में रखा गया है। आने वाले हफ्तों में यह ट्वीट महागठबंधन के चुनावी प्रचार का प्रमुख नारा बन सकता है।
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