Nitish Kumar: कभी सुशासन बाबू, कभी ‘पलटू राम’, लेकिन गेम हमेशा उनके हाथ में, अब 10वीं बार CM बनेंगे नीतीश कुमार

Nitish Kumar CM for 10th time: नीतीश कुमार का राजनीतिक सफर नौ बार सीएम बनने वाला अनोखा रिकॉर्ड रखता है। सुशासन, महिलाओं के लिए योजनाएं और गठबंधन बदलने की रणनीति उन्हें हमेशा केंद्र में रखती रही। 2024 में फिर से NDA के साथ लौटे नीतीश 10वीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने से बस कुछ ही कदम दूर हैं।

Priya Shandilya
अपडेटेड14 Nov 2025, 04:53 PM IST
नीतीश कुमार का राजनीतिक सफर
नीतीश कुमार का राजनीतिक सफर(X)

Nitish Kumar CM for 10th time: बिहार विधानसभा चुनावों के परिणाम अब लगभग साफ हो चुके हैं। नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बीजेपी की अगुवाई वाले गठबंधन एनडीए को बहुमत मिल गया है। एग्जिट पोल्स पहले ही इस जीत का इशारा दे चुके थे, लेकिन अब नतीजों के बाद उस अनुमान पर आधिकारिक मुहर लगने वाली है। इसी के साथ साफ हो गया है कि नीतीश कुमार 10वीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने जा रहे हैं।

नीतीश कुमार क्या आखिरी चुनाव लड़ रहे हैं

बिहार की राजनीति में नीतीश कुमार एक ऐसा नाम हैं, जिनके फैसले, गठबंधन और कामकाज हमेशा सुर्खियां बनाते रहे हैं। अब जब एनडीए की बड़ी जीत में महिलाओं का वोट और नीतीश कुमार की छवि को बड़ा कारण बताया जा रहा है, तो एक सवाल उठ रहा है- क्या नीतीश यह आखिरी चुनाव लड़ रहे हैं? और अगर हां, तो उनका ये लंबा सफर आखिर इतना खास क्यों रहा? चलिए एक नजर डालते हैं नीतीश कुमार के राजनीतिक सफर पर।

नीतीश कुमार ने कुल नौ बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली है, और दसवीं शपथ आधिकारिक नतीजों के बाद होनी है।

ये रहा उनका सीएम कार्यकाल:

पहली बार: 03.03.2000 – 10.03.2000

दूसरी बार: 24.11.2005 – 25.11.2010

तीसरी बार: 26.11.2010 – 19.05.2014

चौथी बार: 22.02.2015 – 19.11.2015

पांचवीं बार: 20.11.2015 – 26.07.2017

छठी बार: 27.07.2017 – 12.11.2020

सातवीं बार: 16.11.2020 – 09.08.2022

आठवीं बार: 10.08.2022 – 28.01.2024

नौवीं बार: 28.01.2024 – वर्तमान

दसवीं बार: चुनावी नतीजों के बाद तय होगी

पहली बार CM (2000): 7 दिन की कुर्सी और बड़ा राजनीतिक संदेश

मार्च 2000 में नीतीश कुमार पहली बार मुख्यमंत्री बने, लेकिन यह कार्यकाल सिर्फ 7 दिन चला। उनके पास बहुमत नहीं था, NDA के पास 151 और लालू यादव खेमे के पास 159 विधायक थे, यानी दोनों ही बहुमत से नीचे। नीतीश ने संख्या पूरी न होने पर खुद ही इस्तीफा दे दिया।

दूसरी जीत (2005–2010): बदलाव का दौर

2005 की जीत से नीतीश की असली शुरुआत हुई। नीतीश कुमार 15 साल के 'जंगल-राज' के बाद मुख्यमंत्री बने, तो उन्होंने एक ही लक्ष्य रखा- बिहार की छवि बदलनी है। सड़कों का विस्तार, गांवों में बिजली, महिलाओं को मजबूत बनाने वाली योजनाएं और शिक्षा में सुधार। इन सबने उनकी एक मजबूत पहचान बनाई। इसी दौर में उन्हें 'सुशासन बाबू' कहा जाने लगा। खास बात यह है कि महिलाओं और EBC (अत्यंत पिछड़ा वर्ग) का एक बड़ा वोट बैंक उनके साथ मजबूती से खड़ा रहा, जो आज भी उनकी ताकत माना जाता है।

तीसरी जीत (2010–2014): सुशासन का सबसे मजबूत दौर

2010 में जेडीयू–BJP गठबंधन ने भारी जीत दर्ज की और नीतीश फिर मुख्यमंत्री बने। लड़कियों को साइकिल और मिड-डे मील जैसे फैसलों ने स्कूल जाने वाली लड़कियों की संख्या अचानक बढ़ा दी। इस बार महिलाओं और युवाओं की रिकॉर्ड वोटिंग ने उन्हें धमाकेदार जीत दिलाई। यह चुनाव बिहार का सबसे शांतिपूर्ण चुनाव भी माना गया। 2014 में लोकसभा चुनाव के खराब परिणाम के बाद नीतीश ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दे दिया।

चौथा कार्यकाल (2015): चुनाव से ठीक पहले वापसी

फरवरी 2015 में वे कम समय के लिए सही पर नीतीश फिर एक बार मुख्यमंत्री बने। उसी साल होने वाला विधानसभा चुनाव उनका सबसे कठिन चुनाव माना जा रहा था। इस बार वे RJD और कांग्रेस के साथ मिलकर महागठबंधन में उतरे, ताकि BJP को कड़ी टक्कर दे सकें।

पांचवां कार्यकाल (2015–2017): महागठबंधन की बड़ी जीत और IPAC की रणनीति

2015 के चुनाव में महागठबंधन को जबरदस्त जीत मिली, RJD सबसे बड़ी पार्टी बनी और जेडीयू दूसरे नंबर पर। 20 नवंबर 2015 को नीतीश 5वीं बार CM बने और तेजस्वी यादव डिप्टी चीफ मिनिस्टर बने। इस चुनाव में प्रशांत किशोर की टीम ने DNA कैंपेन, हर घर दस्तक और साइकिल कैंपेन जैसी रणनीतियों से बड़ा रोल निभाया।

छठा कार्यकाल (2017–2020): भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस

जब उस वक्त डिप्टी CM तेजस्वी यादव पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे और RJD ने उन्हें हटाने से मना किया, तो नीतीश ने बिना देर किए 26 जुलाई 2017 को इस्तीफा दे दिया और महागठबंधन तोड़कर उसी दिन NDA में वापस चले गए। कुछ घंटों बाद वे फिर मुख्यमंत्री बन गए, यही वजह है कि उन्हें 'पलटू राम' कहा जाने लगा।

सातवां कार्यकाल (2020–2022): कठिन चुनाव, पर फिर भी CM वही

2020 के चुनाव में NDA को कम अंतर से जीत मिली, 125 बनाम 110। जेडीयू की सीटें कम हुईं, लेकिन मुख्यमंत्री फिर भी नीतीश ही बने।

इससे साबित हुआ कि बिहार में गठबंधन चाहे कोई भी हो, चेहरा अक्सर वही होते हैं। बाद में उन्होंने गठबंधन बदला और अगस्त 2022 में RJD–कांग्रेस के साथ फिर महागठबंधन बना लिया।

आठवां कार्यकाल (2022–2024): महागठबंधन में वापसी और समाधान यात्रा

2022 में BJP से अलग होकर महागठबंधन में लौटे और 10 अगस्त को 8वीं बार CM बने। इस दौरान उन्होंने समाधान यात्रा की- 38 जिलों में जाकर जमीन पर चल रहे कामों की समीक्षा की। 2023 के कास्ट-बेस्ड सर्वे की शुरुआत भी इसी दौर में हुई। लेकिन नवंबर 2023 में महिलाओं पर टिप्पणी को लेकर विवाद हुआ, जिसके बाद माफी मांगनी पड़ी। जनवरी 2024 में उन्होंने फिर सरकार छोड़ दी और NDA में लौट आए।

नौवां कार्यकाल (2024–वर्तमान): फिर NDA, फिर शपथ

28 जनवरी 2024 को उन्होंने RJD–कांग्रेस गठबंधन छोड़कर फिर NDA में वापसी की और उसी दिन 9वीं बार मुख्यमंत्री बने। 2025 में एक केस भी दर्ज हुआ जिसमें उन पर कार्यक्रम में राष्ट्रीय गान का सम्मान न करने का आरोप लगा।

कुल मिलाकर नीतीश कुमार का सफर

बिहार में शायद ही कोई नेता इतने उतार-चढ़ाव से गुजरा हो। कभी सुशासन वाले फैसलों से लोगों का दिल जीता, कभी गठबंधन बदलने से चर्चा में रहे। लेकिन एक चीज लगातार रही, बिहार की राजनीति में नीतीश कुमार हमेशा मेन करैक्टर रहे हैं।

अब देखने वाली बात ये होगी कि आगे राजनीति का रास्ता उन्हें कहां ले जाता है। क्या वो दसवीं बार भी सीएम कुर्सी तक पहुंचेंगे? किसके साथ जाएंगे? और क्या सच में ये उनका आखिरी बड़ा चुनाव सफर होगा? आने वाला वक्त ही बताएगा, लेकिन इतना तय है कि नीतीश कुमार का रोल बिहार की राजनीति में अभी भी खत्म नहीं हुआ है।

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