
बिहार विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण में इस बार पांच प्रमुख दलों के प्रदेश अध्यक्ष खुद मैदान में हैं। कुटुंबा से कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम, लोजपा (रामविलास) के प्रदेश अध्यक्ष राजू तिवारी गोविंदगंज से, टिकारी सीट से हम पार्टी के अनिल कुमार, चैनपुर विधानसभा क्षेत्र से वीआईपी के बाल गोविंद बिंद और अमौर विधानसभा सीट से एआईएमआईएम के अख्तरूल इमान सियासी दांव आजमा रहे हैं। इनमें से अधिकांश ने पहले भी जीत दर्ज की है और अब फिर से अपनी साख बचाने व पार्टी की प्रतिष्ठा कायम रखने की जंग में हैं।
कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम औरंगाबाद जिले की कुटुंबा सीट से लगातार तीसरी बार जीत की कोशिश में हैं। पूर्व मंत्री दिलकेश्वर राम के पुत्र राजेश ने 2015 और 2020 में यहां जीत दर्ज की थी और अब हैट्रिक की तैयारी में हैं। इस बार ललन राम (हम) और राजेश राम (कांग्रेस) के बीच मुकाबला है, जिसमें श्रवण भुइयां (आप) भी मैदान में हैं, जिससे मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है। देखना यह है कि मतदाता किसे चुनते हैं।
वहीं, पूर्व बाहुबली विधायक राजन तिवारी के बड़े भाई और लोजपा (रामविलास) के प्रदेश अध्यक्ष राजू तिवारी पूर्वी चंपारण की गोविंदगंज सीट से फिर मैदान में हैं। 2015 में जीत के बाद 2020 में हार झेल चुके तिवारी इस बार वापसी की उम्मीद लगाए हैं। कांग्रेस से गप्पू राय और जनसुराज से कृष्णकांत मिश्रा चुनावी मैदान में हैं।
गया जिले की टिकारी सीट से हम पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अनिल कुमार अपनी तीसरी जीत की तलाश में हैं। 2010 और 2020 में उन्होंने जीत हासिल की थी, जबकि 2015 में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। इस बार अनिल कुमार का मुकाबला राजद के अजय कुमार से है।
कैमूर के चैनपुर से वीआईपी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष बाल गोविंद बिंद भी मैदान में हैं, जहां वे अपने संगठन को मजबूत जनाधार में बदलने की कोशिश कर रहे हैं। बीते चुनाव में जमा खान ने बसपा के सिंबल पर चुनाव जीता था, जमा खान ने बीजेपी के ब्रज किशोर बिंद को बड़े अंतर से हराया था। हालांकि बाद में जमा खान जदयू में शामिल हो गए थे। इस बार एनडीए से जमा खान मैदान में है।
पूर्णिया जिले की अमौर सीट से एआईएमआईएम के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरूल इमान फिर चुनावी अखाड़े में हैं। 2020 में इसी सीट से उन्होंने शानदार जीत दर्ज की थी और इस बार भी दोबारा कब्जा बरकरार रखने के मिशन पर हैं। इस सीट पर अख्तरूल इमान का मुकाबला सबा जफर (जेडीयू), अब्दुल जलील मस्तान (कांग्रेस), अफरोज आलम (जन सुराज) से है। इन पांच नेताओं की किस्मत अब जनता के फैसले पर टिकी है। सवाल यही है कि क्या ये दल अपने प्रदेश अध्यक्षों की अगुवाई में फिर जीत का सेहरा बांध पाएंगे या सियासी अखाड़े में कोई नया समीकरण उभरेगा?
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