
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में NDA ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की और महागठबंधन को करारी हार का सामना करना पड़ा। नतीजों में 89 सीटें जीतकर भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनी, वहीं 85 सीटों पर जीत दर्ज कर जदयू दूसरे नंबर की पार्टी रही। जबकि महागठबंधन का नेतृत्व करने वाली राजद महज 25 सीटों पर सिमट गई और तीसरे नंबर खिसक गई। इन नतीजों में चौंकाने वाली बात यह रही है कि एनडीए की प्रचंड लहर के बावजूद जेडीयू के दिग्गज और दो-दो बार विधायक रह चुके नेता अपनी सीट नहीं बचा सके। इनमें पूर्व सांसद चंदेश्वर चंद्रवंशी, चार बार विधायक और दो बार सांसद रहे महाबली सिंह कुशवाहा, और तीन बार के विधायक छोटेलाल राय जैसे बड़े नाम शामिल हैं।
इस चुनाव में जेडीयू 101 सीटों पर चुनाव लड़ रहा था, बेहतरीन स्ट्राइक रेट के साथ जदयू ने 85 सीटों पर जीत दर्ज की और 16 सीटों पर जदयू को हार का सामना करना पड़ा। जेडीयू की हार का विश्लेषण बताता है कि पार्टी 9 सीटों पर राजद से, 3 सीटों पर कांग्रेस से, 2 सीटों पर AIMIM से, 1 सीट पर CPI(माले) से और 1 सीट पर CPM उम्मीदवार से पराजित हुई। कई क्षेत्रों में जेडीयू उम्मीदवारों की हार बेहद कम अंतर से हुई। जहानाबाद में 793 वोटों से और वाल्मिकीनगर में 1,675 वोटों से। जबकि अमौर और जोकीहाट जैसी सीटों पर AIMIM उम्मीदवारों से नीतीश की जेडीयू को बड़ी हार मिली, जो जेडीयू के लिए रणनीतिक चुनौती को उजागर करती है। मधेपुरा, मटिहानी, महिषी जैसी सीटें भी जेडीयू के हाथ से फिसल गईं, जबकि पार्टी इन्हें सुरक्षित मानकर चल रही थी।
इन 16 उम्मीदवारों में पुराने और अनुभवी नेता से लेकर नए चेहरे तक शामिल थे। पूर्व सांसद और अनुभवी नेता महाबली सिंह तथा तीन बार के विधायक छोटेलाल राय भी प्रचंड लहर में सीट नहीं संभाल पाए। दूसरी ओर कविता साहा, रवीना कुशवाहा और विकास सिंह जैसे नए चेहरे भी अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर सके। शगुफ्ता अजीम और विद्यासागर निषाद जैसे एक बार के विधायक अपनी सीट बचाने में असफल रहे, जबकि शम्भु सुमन को लगातार दूसरी बार हार मिली।
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