महाराष्ट्र के निकाय चुनावों में बीजेपी बमबम होती दिख रही है और विपक्षी चित। महाराष्ट्र के 29 में से 20 निकायों में बीजेपी गठबंधन ने भारी बढ़त हासिल कर ली है। बीजेपी और शिवसेना गठबंधन देश की सबसे धनी नगर निकाय बृहन्ममुंबई नगर निगम (BMC) पर दशकों से चले आ रहे ठाकरे परिवार के राज को उखाड़ फेंकने जा रहा है। इसी तरह, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के गृह नगर नागपुर में बीजेपी गठबंधन ने कुल 151 में से 143 सीटों पर बढ़त बनाकर विपक्ष को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है। महाराष्ट्र के 29 नगर निगमों के चुनाव कई वर्षों के अंतराल के बाद कराए गए जबकि इनमें से अधिकतर के कार्यकाल 2020 से 2023 के बीच समाप्त हो गए थे।
एग्जिट पोल्स में ही दिख गया था बीजेपी का शानदार प्रदर्शन
महाराष्ट्र के इन 29 महानगरपालिकाओं के लिए 15 जनवरी को मतदान हुए थे। राज्य निर्वाचन आयोग ने बताया कि इन महानगरपालिकाओं में 54.77 प्रतिशत मतदाताओं ने मतदान किया था। वोटिंग खत्म होने के बाद आए एग्जिट पोल रिजल्ट्स में ही साफ हो गया था कि इस बार महाराष्ट्र के नगर निकाय चुनावों में बीजेपी का डंका बजने वाला है। खासकर बीएमसी पर ठाकरे परिवार का कब्जा खत्म होने के साफ संकेत इन एग्जिट पोल्स से मिल गए थे। अब तक हुई मतगणना के रुझानों में बीजेपी 118 गठबंधन 118 सीटों के साथ बहुमत हासिल करता दिख रहा है। यानी इस बार बीएमसी में बीजेपी की सरकार तय हो गई है।
पश्चिमी महाराष्ट्र में भी बीजेपी का दबदबा
बीजेपी ने महाराष्ट्र की तीर्थयात्रा राजधानी के रूप में जाने जाने वाले नासिक और आध्यात्मिक राजधानी सोलापुर में भी आगे है। ये रुझान पूरे राज्य में भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन के मजबूत प्रदर्शन का संकेत देते हैं, जो महाराष्ट्र में नगर निगम की सत्ता में बड़े बदलाव का संकेत है। बीजेपी ने पश्चिमी महाराष्ट्र क्षेत्र में कोल्हापुर, सातारा और सांगली नगर निकायों में भी बढ़त बनाए हुए है।
पवार परिवार के हाथ से निकला पुणे
बीजेपी ने पुणे और पिंपरी चिंचवड नगर निगमों में भी उपमुख्यमंत्री अजित पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) और उनके चाचा शरद पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी (एससीपी) के गठबंधन से आगे निकल गई। पुणे और पिंपरी चिंचवड में बीजेपी का प्रदर्शन संकेत देता है कि एनसीपी के दोनों गुटों की एकजुटता भी बीजेपी के आगे टिक नहीं पाई।
अजित पवार ने भी बीजेपी पर साधा था निशाना
पुणे और पिंपरी चिंचवड में चुनाव प्रचार के दौरान उपमुख्यमंत्री अजित पवार और बीजेपी के बीच तीखी नोकझोंक देखी गई। अजित पवार ने दोनों नगर निकायों के कामकाज में कथित अनियमितताओं को लेकर स्थानीय बीजेपी नेतृत्व को निशाना बनाया था। भाजपा ने 2017 से 2022 तक पुणे और पिंपरी चिंचवड नगर निकायों में अकेले सत्ता संभाली थी। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने आरक्षण मुद्दे को लेकर नगर निकाय चुनावों पर रोक लगा दी। इस कारण चुनाव में हुई देरी हुई, इसलिए इन निकायों का नियंत्रण प्रशासक के पास रहा।