BMC Election Results: शरद-अजित मिलकर भी नहीं बचा पाए गढ़, पुणे और पिंपरी दोनों से पवार परिवार बेदखल

BMC Election Results: पुणे और पिंपरी-चिंचवड नगर निकाय चुनावों में एनसीपी के दोनों गुटों को भाजपा से करारी हार मिली। शरद-अजित पवार का गठबंधन भी पुराने गढ़ नहीं बचा सका। 

Priya Shandilya( विद इनपुट्स फ्रॉम भाषा)
पब्लिश्ड16 Jan 2026, 09:27 PM IST
पुणे-पिंपरी में पवार परिवार का किला ढहा (फाइल फोटो)
पुणे-पिंपरी में पवार परिवार का किला ढहा (फाइल फोटो)(HT)

BMC Election Results: महाराष्ट्र की सियासत में पुणे और पिंपरी-चिंचवड हमेशा से पवार परिवार का मजबूत गढ़ माने जाते रहे हैं। लेकिन इस बार हालात बदले-बदले नजर आए। गठबंधन, पुराने चेहरे और जोरदार प्रचार के बावजूद नतीजों ने साफ कर दिया कि जमीन पर पकड़ कमजोर पड़ी है और मुकाबले में बाजी किसी और के हाथ चली गई।

पवार परिवार को बड़ा झटका

महाराष्ट्र में निकाय चुनाव के लिए अपने चाचा शरद पवार के नेतृत्व वाले गुट के साथ गठबंधन करने के बावजूद राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) प्रमुख एवं महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार पुणे व पिंपरी-चिंचवड में पार्टी के पुराने गढ़ों को बचाने में नाकाम रहे। यहां भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने राकांपा के दोनों गुटों को करारी शिकस्त दी।

प्रचार में आक्रामक तेवर

चुनाव प्रचार के दौरान अजित पवार ने अपने राज्य स्तरीय सहयोगी भाजपा पर खुलकर हमला बोला। उन्होंने पुणे और पिंपरी-चिंचवड में विकास पटरी से उतरने और भ्रष्टाचार के लिए भाजपा के स्थानीय नेतृत्व को जिम्मेदार ठहराया। उनका दावा था कि शहरों में बुनियादी सुविधाओं की अनदेखी हुई है।

शरद पवार से हाथ क्यों मिलाया

भाजपा के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए अजित पवार ने पार्टी टूट के दो साल बाद शरद पवार गुट से गठबंधन किया। पुणे में अजित पवार केंद्रीय मंत्री और शहर के भाजपा सांसद मुरलीधर मोहोल से सीधा मुकाबला करते नजर आए। वहीं, पिंपरी-चिंचवड में नगर निकाय में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए उन्होंने स्थानीय भाजपा विधायक महेश लांडगे को निशाना बनाया।

आंकड़ों में बीजेपी की बढ़त

शुक्रवार को आए रुझानों में भाजपा दोनों नगर निगमों में निर्णायक बढ़त बनाती दिखी। पुणे में भाजपा 110 से अधिक सीट पर आगे, जबकि राकांपा 12 और राकांपा (शरद पवार) दो सीट पर बढ़त बनाए। वहीं, पिंपरी-चिंचवड में भाजपा 84 सीट पर आगे है, जबकि राकांपा ने 37 सीट पर बढ़त बनाया।

शरद पवार और सुप्रिया सुले क्यों रहे दूर

चुनाव के दौरान शरद पवार लगभग प्रचार से नदारद रहे। उनकी बेटी और बारामती की सांसद सुप्रिया सुले भी ज्यादातर पृष्ठभूमि में ही दिखीं, जिससे पार्टी कार्यकर्ताओं में उत्साह की कमी महसूस की गई।

प्रचार में मेहनत, फिर भी नतीजा पक्ष में नहीं

राकांपा की पुणे इकाई के कार्यकारी अध्यक्ष प्रदीप देशमुख ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, “अजित पवार ने प्रचार के दौरान काफी मेहनत की। पुणे और पिंपरी-चिंचवड महानगर पालिका (पीसीएमसी) में नागरिक मुद्दों को उठाते हुए ‘दादा’ ने एक संतुलित घोषणापत्र पेश किया, जिसमें सभी के लिए मेट्रो और पीएमपीएमएल (बस) में मुफ्त यात्रा, 500 वर्ग फुट से कम क्षेत्रफल वाले घरों को संपत्ति कर से छूट और जलापूर्ति में सुधार का वादा शामिल था। हम हार को विनम्रता से स्वीकार करते हैं।”

मुफ्त सफर के वादों पर भाजपा का तंज

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और भाजपा ने मेट्रो व बस में मुफ्त सफर के वादों का मजाक उड़ाते हुए कहा था कि राकांपा ने ये आश्वासन इसलिए दिए, क्योंकि उसे पहले से ही अपनी हार का अंदेशा था।

मुंधवा जमीन सौदे का विवाद चुनाव पर पड़ा भारी!

आठ वर्ष के अंतराल के बाद हुए ये नगर निकाय चुनाव के दौरान अजित पवार के बेटे पार्थ पवार से जुड़े मुंधवा भूमि सौदे के विवाद की पृष्ठभूमि में हुए। आरोप है कि 1,800 करोड़ रुपये की 40 एकड़ सरकारी भूमि अवैध रूप से ‘अमाडिया एंटरप्राइजेज एलएलपी’ को मात्र 300 करोड़ रुपये में बेची गई, जिसमें पार्थ पवार भागीदार हैं। यह सौदा तब जांच के घेरे में आया जब पता चला कि 21 करोड़ रुपये की स्टाम्प ड्यूटी को माफ कर दिया गया। इस संबंध में अमाडिया एलएलपी में सह-साझेदार दिग्विजय पाटिल, विक्रेता और दो सरकारी अधिकारियों के खिलाफ मामले दर्ज किए गए।

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