
BMC Election Results 2026: महाराष्ट्र के नगर निगम चुनावों में भाजपा और उसकी सहयोगी शिवसेना बड़ी जीत की ओर आगे बढ़ रही हैं। मुंबई महानगर पालिका में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभर रही है। वहीं उद्धव ठाकरे की शिवसेना पीछे हो गई है। बीजेपी के मेयर का रास्ता साफ हो गया है। इसके साथ ही बृहन्मुंबई महानगर पालिका (BMC) में ठाकरे परिवार का 25 साल का वर्चस्व टूटता नजर आ रहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर महाराष्ट्र में निकाय चुनाव के परिणामों पर प्रतिक्रिया देते हुए कार्यकर्ताओं की सराहना की। इसके साथ ही जीत का श्रेय एनडीए कार्यकर्ताओं को दिया।
आजादी के बाद 77 सालों से मुंबई नगर निगम पर कांग्रेस और शिवसेना का ही कब्जा रहा है। 1947 से 1967 तक यानी 20 साल तक कांग्रेस का मेयर रहा। वहीं 1992 से लेकर 2022 यानी 30 सालों तक मेयर की कुर्सी पर शिवसेना काबिज रही। भाजपा 45 साल के इतिहास में पहली बार मुंबई में अपना मेयर बनाने की स्थिति में पहुंची है। दरअसल 1980 में पार्टी के गठन के बाद भाजपा ने 1992 से 2017 तक मुंबई में शिवसेना को सपोर्ट दिया था।
मुंबई के मेयर का पद संभालने वाली आखिरी शख्स शिवसेना की किशोरी पेडनेकर थीं, जिन्होंने 22 नवंबर 2019 से 8 मार्च 2022 तक यह पद संभाला था। हालांकि तब शिवसेना में बंटवारा नहीं हुआ था। उसके बाद से यह पद खाली था। तब से, BMC के प्रशासन की जिम्मेदारी नगर आयुक्त संभाल रहे हैं।
बीएमसी चुनाव में भाजपा ने जीत का परचम लहरा दिया है। बीजेपी पहली बार मुंबई में अपना मेयर बनाने की स्थिति में पहुंच गई है। बीएमएसी के इतिहास में अभी तक बीजेपी का कोई नेता मेयर नहीं बना सका है। बीजेपी ने अपने गठन के 45 साल के बाद जाकर मुंबई में मेयर बनाने की पॉजिशन हासिल कर ली है।
बीएमसी में अलग-अलग वार्डों से चुनकर कुल 227 पार्षद आते हैं, जिन्हें मुंबई में नगर सेवक या फिर कॉरपोरेटर कहा जाता है। जिस पार्टी का बहुमत होता है, उसी की मेयर पद की उम्मीदवारी में सबसे बड़ी दावेदार होती है। नगर निकाय चुनाव में जीतकर आने वाले पार्षद ही मेयर का चुनाव करते हैं। मेयर का कार्यकाल 2.5 साल का होता है, वहीं पार्षद 5 साल के लिए चुने जाते हैं। एक मेयर का कार्यकाल पूरा होने के बाद दूसरे मेयर का चुनाव होता है।
बीएमसी में मेयर और कमिश्नर दो पद सबसे बड़े होते हैं। मेयर नगर निगम की बैठकों की अध्यक्षता करते हैं। शहर का औपचारिक प्रतिनिधित्व करते हैं। प्रस्तावों और बहसों पर चर्चा करते हैं। मतलब मेयर का काम ज्यादातर औपचारिक और प्रतिनिधित्व तक सीमित होता है। जबकि असली प्रशासनिक और कार्यकारी जिम्मेदारी कमिश्नर के पास होती है। कमिश्नर शहर का रोजमर्रा प्रशासन चलाते हैं। बजट, शहर के इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स और कर्मचारियों का कंट्रोल उनके हाथ में होता है। कमिश्नर आम तौर पर IAS अधिकारी होते हैं। बीएमसी में कई समिति होती है। इसमें स्थाई समिति बेहद अहम होती है।
बीजेपी के दिग्गज नेता किरीट सोमैया के बेटे नील सोमैया दूसरी बार पार्षद चुने गए हैं। इसके अलावा बीएमसी चुनाव में तेजस्वी घोसालकर ने जीत हासिल कर ली है। चुनाव से करीब एक महीने पहले तेजस्वी ने शिवसेना (UBT) गुट को छोड़कर बीजेपी का दामन थाम था। बीएमसी जीत के बाद अब बीजेपी के भीतर उन्हें मेयर पद के संभावित उम्मीदवार के तौर पर देखा जा रहा है। इसके अलावा और भी कई दिग्गज नेता नगर सेवक के तौर पर चुने गए हैं। अब देखना यह होगा कि बीजेपी मेयर का ताज किसे पहनाती है।
बीएमसी का बजट 75 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा है। यह एशिया की सबसे बड़ी अमीर महानगर पालिका है। इसका बजट गोवा, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नगालैंड, सिक्किम और त्रिपुरा जैसे राज्यों से भी बड़ा है।
बीएमसी की स्थापना 1865 को ब्रिटिश शासन के दौरान हुई, हालांकि कुछ स्रोतों के हवाले से दावा किया जाता है कि इसकी स्थापना 1873 में हुई थी। इस लिहाज से यह देश का सबसे पुराना नगर निकाय है। मुंबई के 24 वॉर्ड्स के लिए जिम्मेदार बृहन्मुंबई नगर निगम दुनिया का सबसे बड़ा और सबसे अमीर नगर निगम भी है। इसका बजट कई राज्यों-केंद्र शासित प्रदेशों के कुल बजट से ज्यादा है।
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