
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में पहले चरण के हुए मतदान ने आजाद भारत के इतिहास में बिहार में हुई वोटिंग प्रतिशत का नया रिकॉर्ड बनाया है। लेकिन बिहार की राजधानी पटना के मतदाताओं का प्रदर्शन बहुत ही निराशाजनक रहा। एक तरफ पहले चरण में हुए 18 जिलों की 121 विधानसभा सीटों पर 65 प्रतिशत से ज्यादा वोटिंग दर्ज की गई। वहीं दूसरी तरफ राजधानी पटना के शहरी इलाकों में सिर्फ 40 प्रतिशत मदतान हुआ। अब सवाल उठता है कि आखिर क्यों राजधानी वासियों ने मतदान को लेकर मायूस किया, इससे भी बड़ा सवाल ये है कि कम मतदान किसके लिए अभिषाप और किसके लिए वरदान साबित होगी।
पटना जिले में कुल 14 विधानसभा सीटें आती हैं, जिनमें शहरी क्षेत्र में चार विधानसभा सीटें कुम्हरार, दीघा, बांकीपुर और पटना हैं। शहरी क्षेत्र की चार विधानसभा सीटों में एक एक सीट पर तो मतदान संतोषजनक रहे लेकिन तीन सीटों पर वोटिंग प्रतिशत बहुत ही निराशाजनक रहा। चुनाव आयोग से मिले आंकड़े के मुताबिक दीघा, कुम्हरार और बांकीपुर में महज 40 प्रतिशत के करीब मतदान हुआ। हालांकि पटना साहिब विधानसभा सीट जिसे बीजेपी का गढ़ माना जाता है वहां कुछ संतोषजनक वोट पड़े। इस सीट पर करीब 59 प्रतिशत वोट पड़े। हालांकि पहले चरण में पड़े कुल वोट प्रतिशत 65.08 के मुकाबले ये भी काफी कम है।
राजधानी पटना के शहरी इलाके में भले ही मतदान को लेकर उदासीनता नजर आई हो, लेकिन ग्रामीण इलाकों में स्थिति अच्छी दिखाई देती है। जिसमें सबसे ज्यादा मतदान विक्रम विधानसभा क्षेत्र में देखने को मिला। यहां 66 प्रतिशत के करीब वोट पड़े, उसके बाद पालीगंज विधानसभा सीट पर करीब 63.5 प्रतिशत मतदान देखने को मिला। वहीं बख्तियारपुर में 63 प्रतिशत, फुलवारी शरीफ में 62.5 प्रतिशत, मोकामा में 62.4 प्रतिशत, बाढ़ में 60 प्रतिशत फतुहा में 60 प्रतिशत, मसौढ़ी में 60 प्रतिशत, मनेर में 59.5 प्रतिशत और दानापुर में करीब 55.5 प्रतिशत वोट पड़े।
राजधानी पटना के शहरी इलाकों की चारों विधानसभा सीटों पर बीजेपी का कब्जा है। इस लिहाज से देखें तो कम मतदान प्रतिशत को लेकर कई तरह के सवाल उठाए जा रहे हैं। बीजेपी ने पटना साहिब को छोड़कर बाकी दीघा, बांकीपुर, कु्म्हरार तीनों सीटों पर पुराने चेहरे को उतारा है। वहीं पटना साहिब से पार्टी मौजूदा विधायक और विधानसभा अध्यक्ष नंद किशोर यादव की जगह रत्नेश कुशवाहा को मैदान में उतारा है। पटना साहिब में करीब 59 प्रतिशत मतदान हुए हैं, जो बाकी तीनों सीटों पर हुए 40 प्रतिशत मतदान के मुकाबले काफी अच्छा है।
वैसे तो पटना शहर की चारों विधानसभा सीटों पर बीजेपी का कब्जा है, लेकिन पटना साहिब को खास तौर पर बीजेपी का किला माना जाता है। 1995 में पहली बार पटना साहिब विधानसभा सीट पर बीजेपी ने जीत दर्ज की थी। उसके बाद साल 2000 से लगातार पार्टी इस सीट पर जीत दर्ज करती आई है। इस सीट पर शहर की बाकी सीटों के मुकाबले करीब 19 प्रतिशत ज्यादा मतदान हुए हैं ये आंकड़े थोड़ा हैरान करने वाले हैं। गौरतलब है कि साल 2020 के विधानसभा चुनाव में पटना शहर की इन चारों सीटों पर पूरे बिहार में हुए 57 प्रतिशत से ज्यादा मतदान के मुकाबले कम वोट पड़े थे।
पटना के शहरी इलाके में हुए कम मतदान प्रतिशत पर बिहार के मुख्य चुनाव आयुक्त विनोद गुंज्याल ने कहा कि शहरी इलाकों में ग्रामीण के मुकाबले कुछ कम मतदान देखने को मिल रहा है। साथ ही उन्होंने कहा कि कुछ जगहों पर बैलेट यूनिट, कंट्रोल यूनिट और वीवीपैट बदले गए। जिसकी वजह से मतदान में मामूली व्यावधान पैदा हुआ। हालांकि शाम 6 बजे के बाद भी कुछ मतदान बूथों पर मतदाता लाइन में खड़े नजर आए।
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