Assam Election News: असम चुनाव के लिए कांग्रेस ने प्रियंका गांधी पर लगाया बड़ा दांव, सत्ता में वापसी करवा पाएंगी?

Assam Election News: विधानसभा चुनावों के महासंग्राम के लिए कांग्रेस ने बिसात बिछा दी है। असम में प्रियंका गांधी को स्क्रीनिंग कमिटी का चेयरमैन बनाया गया है। सवाल है कि क्या प्रियंका के चुने हुए उम्मीदवार असम में कांग्रेस की वापसी करवा पाएंगे?

Naveen Kumar Pandey
अपडेटेड4 Jan 2026, 06:47 PM IST
प्रियंका गांधी वाड्रा।
प्रियंका गांधी वाड्रा। (PTI)

States Elections: आगामी विधानसभा चुनावों के लिए कांग्रेस ने अपनी कमर कस ली है। केरल, असम, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और पुदुचेरी में चुनावी बिगुल बजने से पहले पार्टी ने 'स्क्रीनिंग कमेटी' का गठन कर दिया है। इस बार सबसे चौंकाने वाला और महत्वपूर्ण फैसला असम को लेकर लिया गया है। कांग्रेस के इतिहास में संभवतः यह पहली बार है जब गांधी परिवार के किसी सदस्य को सीधे तौर पर किसी राज्य की स्क्रीनिंग कमिटी का अध्यक्ष बनाया गया है। प्रियंका गांधी वाड्रा न केवल उम्मीदवारों का चयन करेंगी, बल्कि छोटे दलों के साथ गठबंधन की गांठों को सुलझाने की जिम्मेदारी भी उन्हीं के पास होगी।

असम का दंगल: गौरव गोगोई का साथ और प्रियंका की साख

असम में चुनावी मुकाबला बेहद दिलचस्प होने वाला है। एक तरफ जहां मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के तीखे हमले और भाजपा का मजबूत वोट बैंक है, वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस गौरव गोगोई के नेतृत्व में वापसी की उम्मीद लगाए बैठी है। पिछले चुनावों में हार और जीत के बीच केवल 1.6% वोट शेयर का अंतर था, जिसे पाटने के लिए प्रियंका को मैदान में उतारा गया है। प्रियंका के साथ उनके भरोसेमंद साथी इमरान मसूद और सप्तगिरि उलाका को भी कमेटी में जगह दी गई है। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या उत्तर प्रदेश की हार के बाद प्रियंका असम में बाजी पलट पाएंगी।

दिग्गज नेताओं को मिली अलग-अलग राज्यों की कमान

पार्टी ने अनुभवी चेहरों पर दांव लगाते हुए जिम्मेदारियों का बंटवारा किया है। इसके अनुसार…

केरल: वरिष्ठ नेता मधुसूदन मिस्त्री को यहां की कमान सौंपी गई है।

पश्चिम बंगाल: बीके हरिप्रसाद स्क्रीनिंग कमेटी के अध्यक्ष होंगे, जहां पार्टी को त्रिकोणीय संघर्ष का सामना करना है।

तमिलनाडु और पुदुचेरी: छत्तीसगढ़ के पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव को इन दोनों महत्वपूर्ण दक्षिण भारतीय क्षेत्रों की जिम्मेदारी दी गई है। इन कमेटियों का मुख्य कार्य हर सीट से सबसे मजबूत दावेदारों के नाम शॉर्टलिस्ट कर 'केंद्रीय चुनाव समिति' (CEC) को भेजना है, जो अंतिम मुहर लगाएगी।

चुनौतियों का पहाड़ और इंदिरा से तुलना

प्रियंका गांधी की सक्रियता हाल के दिनों में संसद से लेकर सड़कों तक बढ़ी है। मनरेगा के विकल्प के तौर पर लाए गए 'जी राम जी' बिल (G Ram G Bill) के खिलाफ उन्होंने मोर्चा संभाला, जिससे उनकी छवि एक मुखर नेता के रूप में उभरी है। समर्थक उनमें इंदिरा गांधी की झलक देखते हैं, लेकिन भाजपा इसे 'राहुल बनाम प्रियंका' की जंग के रूप में पेश करने का कोई मौका नहीं छोड़ रही है। असम में गौरव गोगोई पर होते व्यक्तिगत हमलों और गठबंधन की पेचीदगियों के बीच प्रियंका के लिए यह राह आसान नहीं होने वाली।

प्रियंका के सामने बड़ी चुनौती

इन सभी राज्यों में मार्च-अप्रैल के आसपास मतदान होने की संभावना है। स्क्रीनिंग कमेटी का गठन यह संकेत देता है कि कांग्रेस अब टिकट बंटवारे में किसी भी तरह की गुटबाजी को जगह नहीं देना चाहती। प्रियंका गांधी का असम में सीधे तौर पर हस्तक्षेप यह भी बताता है कि कांग्रेस इस पूर्वोत्तर राज्य को अपनी वापसी के प्रवेश द्वार के रूप में देख रही है। अब गेंद जनता के पाले में है कि वह कांग्रेस के इस नए 'फिल्टर' और रणनीति पर कितना भरोसा जताती है।

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