महाराष्ट्र में कांग्रेस पार्टी को एक और झटका लगा है। पार्टी ने ठाणे जिले की अंबरनाथ नगरपालिका परिषद के नवनिर्वाचित जिन 12 पार्षदों को चुनाव के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के साथ जुड़ने के कारण निलंबित कर दिया था, वे अब औपचारिक रूप से भाजपा में शामिल हो गए हैं। अब महाराष्ट्र कांग्रेस सभी 12 पार्षदों को अयोग्य घोषित करने के लिए कानूनी कार्रवाई शुरू करेगी।
नवनिर्वाचित पार्षदों के पार्टी छोड़न से तमतमाई कांग्रेस
इस असामान्य व्यवस्था से तमतमाई कांग्रेस ने अपने 12 नवनिर्वाचित पार्षदों और ब्लॉक अध्यक्ष को निलंबित कर दिया था। निलंबित पार्षदों के भाजपा में शामिल होने के कदम ने नगरपालिका के राजनीतिक समीकरणों को काफी हद तक बदल दिया है।
भाजपा, राकांपा और शिवसेना सत्तारूढ़ महायुति में सहयोगी हैं। चव्हाण ने कहा कि पार्षदों का यह कदम भाजपा नीत सरकार में बढ़ते विश्वास को दर्शाता है। लेकिन सत्ताधारी सहयोगी शिवसेना ने इस घटनाक्रम को 'गठबंधन धर्म' का विश्वासघात बताया है।
दलबदलुओं को अयोग्य घोषित करवाने की जुगत में कांग्रेस
कांग्रेस की महाराष्ट्र इकाई ने इस कदम को अवैध एवं असंवैधानिक करार देते हुए कहा कि उन्हें अयोग्य घोषित करवाने की प्रक्रिया शुरू करेगी। पार्टी प्रवक्ता सचिन सावंत ने दावा किया कि पार्षदों ने कांग्रेस के चुनाव चिन्ह पर निर्वाचित होने के बाद दल-बदल करके संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन किया है।
उन्होंने कहा, 'यह कृत्य पूरी तरह से गैरकानूनी है। किसी पार्टी के चिन्ह पर निर्वाचित होने के बाद स्वतंत्र समूह बनाना या बाद में किसी अन्य राजनीतिक दल में शामिल होना न केवल अनैतिक है बल्कि असंवैधानिक भी है।' सावंत ने कहा, 'कांग्रेस पार्टी इन पार्षदों की सदस्यता रद्द कराने के लिए कानूनी कार्रवाई शुरू करेगी। जल्द ही इन सभी को कानूनी नोटिस जारी किए जाएंगे।'
ये है कांग्रेस छोड़ भाजपा में जाने वाले पार्षदों की लिस्ट
ये 12 पार्षद प्रदीप नाना पाटिल, दर्शना पाटिल, अर्चना चरण पाटिल, हर्षदा पंकज पाटिल, तेजस्विनी मिलिंद पाटिल, विपुल प्रदीप पाटिल, मनीष म्हात्रे, धनलक्ष्मी जयशंकर, संजवनी राहुल देवड़े, दिनेश गायकवाड़, किरण बद्रीनाथ राठौड़ और कबीर नरेश गायकवाड़ प्रदेश भाजपा अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण एवं मंत्री गणेश नाइक की उपस्थिति में पार्टी में शामिल हो गए थे।
विकास के लिए साथ आए पार्षद: बीजेपी
वहीं, भाजपा की महाराष्ट्र इकाई के अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण ने बुधवार देर रात यहां पार्टी कार्यालय में इस घटनाक्रम की घोषणा की और कहा कि यह कदम सत्ता की लालसा से नहीं बल्कि विकास के प्रति साझा प्रतिबद्धता से प्रेरित है।
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष ने कहा, 'जनता ने इन पार्षदों को चुना है और उन्होंने नागरिकों को विकास का वादा किया था। वे हमारे साथ इसलिए आए हैं क्योंकि सरकार गतिशील ढंग से काम कर रही है और लोगों को न्याय एवं विकास प्रदान करने में सक्षम है।'
बीजेपी की सहयोगी शिवसेना लग गई किनारे
भाजपा ने 20 दिसंबर को हुए स्थानीय निकाय चुनाव के बाद अपने कट्टर प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस के साथ अंबरनाथ विकास आघाड़ी (एवीए) के बैनर तले गठबंधन करके अंबरनाथ नगर परिषद का नेतृत्व संभाला। इससे राज्य सरकार में भाजपा की सहयोगी शिवसेना दरकिनार हो गई, जो सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। आघाड़ी में अजित पवार नीत राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) भी शामिल है।
सबसे बड़ा दल बनकर भी मूकदर्शक बन गई शिवसेना
एवीए ने 60 सदस्यीय स्थानीय निकाय में 31 सीट के साथ बहुमत हासिल किया। हाल में हुए चुनाव में शिवसेना ने 27 सीटें जीतीं, जो बहुमत से मात्र चार कम थीं। भाजपा ने 14 सीट, कांग्रेस ने 12, राकांपा ने चार सीट जीतीं, जबकि दो निर्दलीय भी चुनाव जीते। एक निर्दलीय उम्मीदवार के समर्थन के साथ तीन दलों वाले इस गठबंधन में पार्षदों की संख्या 32 तक पहुंच गई, जो बहुमत के आंकड़े 30 से अधिक है।