सुपौल जिले की चारों विधानसभा सीटों पर बदले समीकरण, कोसी का कहर झेलने वाले इस क्षेत्र को है विकास की दरकार

सुपौल जिले की सभी पांच सीटों पर एनडीए के विधायकों को महागठबंधन के प्रत्याशी चुनौती देते नजर आ रहे हैं। सुपौल जिले की सभी पांच सीटें सुपौल,छातापुर, त्रिवेणीगंज, निर्मली और पिपरा पर एनडीए का कब्जा है। सुपौल,त्रिवेणीगंज, निर्मली और पिपरा में जेडीयू और छातापुर सीट पर बीजेपी का कब्जा है।

Rajkumar Singh
अपडेटेड1 Nov 2025, 03:52 PM IST
बिजेंद्र प्रसाद यादव
बिजेंद्र प्रसाद यादव(HT)

सुपौल विधानसभा सीट से जेडीयू के दिग्गज नेता और ऊर्जा मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव नौवीं बार जीत के लिए जोर लगा रहे हैं। जेडीयू उम्मीदवार बिजेंद्र यादव के विजयपथ रोकने के लिये महागठबंधन की तरफ से कांग्रेस ने मिन्नतुल्लाह रहमानी पर दांव लगाया है। साल 2020 के चुनाव में जेडीयू के बिजेंद्र यादव ने कांग्रेस के मिन्नतुल्लाह रहमानी को चुनावी अखाड़े में मात दी थी। इस बार भी इन दोनों प्रत्याशियों के बीच चुनावी संग्राम देखने को मिलेगा। सुपौल विधान सभा इलाका यादव, राजपूत और मुस्लिम बहुल है। इस इलाके में मुस्लिम-यादव समीकरण से ही उम्मीदवार की हार-जीत तय होती है। इसके अलावा अति पिछड़ा वर्ग की भी अच्छी आबादी है। ब्राह्मण और दलित वोटर की भी तादाद अच्छी-खासी है। सुपौल सीट से नौ प्रत्याशी चुनावी रणभूमि में हुंकार भर रहे हैं।

तीन दशक से बिजेंद्र यादव का दबदबा

सुपौल विधानसभा सीट पर तीन दशक से लगातार बिजेंद्र यादव की धाक रही है। साल 1990 में प्रदेश में हुए सत्ता परिवर्तन के दौर में पहली बार सुपौल की सियासी सरजमीं पर बिजेंद्र यादव ने जनता दल के टिकट पर शानदार जीत से सियासी आगाज किया था, जो आज भी बदस्तूर जारी है। इसके बाद वो साल 1995 में भी जनता दल के टिकट पर जीते थे। बिजेंद्र यादव ने साल 2000, फरवरी 2005, अक्टूबर 2005, 2010, 2015 और 2020 के विधानसभा चुनाव में जेडीयू की टिकट पर जीत हासिल कर चुके हैं। ये क्षेत्र कभी कांग्रेस का गढ़ माना जाता था, यहां से लगातार सात बार कांग्रेस के उम्मीदवार जीत हासिल कर चुके हैं।

यह भी पढ़ें | 26 सेकेंड वाले तेजस्वी के वार पर नीतीश का 4 मिनट वाला पलटवार

सुपौल में बिहार का शोक कोसी का असर

सुपौल में कोसी की त्रासदी और विस्थापन आज भी एक बड़ी समस्या के रूप में विद्यमान है। भले ही विकास की लंबी-चौड़ी बातें कर ली जाए, लेकिन कोसी क्षेत्र में बसी एक बड़ी आबादी हर वर्ष कोसी की त्रासदी झेलने को विवश होती है। जिसकी वजह से बिहार का ये इलाका विकास के मामले में बिहार के दूसरे इलाकों से कुछ ज्यादा पिछड़ा नजर आता है।

छातापुर सीट का सियासी समीकरण

भारत-नेपाल सीमा से सटे छातापुर विधानसभा सीट से सियासी पिच पर जीत की हैट्रिक लगा चुके वन एवं पर्यावरण मंत्री और बीजेपी प्रत्याशी नीरज कुमार सिंह बब्लू अब सियासी पिच पर चौका जड़ने के लिये बेताब हैं। दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत के चचेरे भाई नीरज कुमार सिंह की जीत की राह को रोकने के लिये महागठबंधन की तरफ से आरजेडी ने विपिन कुमार सिंह पर भरोसा जताया है। साल 2020 के चुनाव में भी जेडीयू के नीरज कुमार सिंह ने राजद के विपिन कुमार को पराजित किया था। इस क्षेत्र में बाढ़, बेरोजगारी, पिछड़ापन, विकास, शैक्षणिक पिछड़ापन मुख्य चुनावी मुद्दा है।

यह भी पढ़ें | बिहार चुनाव में कितनी महिलाओं पर किस पार्टी ने लगाया दांव?

त्रिवेणी गंज का राजनीतिक गणित

सुपौल जिले की सुरक्षित सीट त्रिवेणीगंज से जेडीयू ने अपनी मौजूदा विधायक वीणा की जगह सोनम रानी सरदार को उम्मीदवार बनाया है। वहीं आरजेडी ने यहां संतोष कुमार को उम्मीदवार बनाया है। साल 2020 के चुनाव में पूर्व विधायक विश्वमोहन भारती की पत्नी और तत्कालीन विधायक जेडीयू उम्मीदवार वीणा भारती ने राजद प्रत्याशी पूर्व सांसद महेन्द्र नारायाण सरदार के बेटे संतोष कुमार को पराजित किया था।

निर्मली सीट पर बदला समीकरण

निर्मली विधानसभा सीट से जेडीयू के विधायक अनिरूद्ध प्रसाद यादव सियासी कर्मभूमि पर सिक्सर मारने ले लिये बेकरार हैं। आरजेडी ने यहां वैधनाथ महतो को प्रत्याशी बनाया है। साल 2020 के चुनाव में जेडीयू के अनिरूद्ध प्रसाद यादव ने पिपरा विधानसभा के तत्कालीन विधायक यदुवंश कुमार यादव को मात दी थी। निर्मली विधानसभा क्षेत्र साल 2008 में परिसीमन के बाद अस्तित्व में आया था। ये क्षेत्र पहले किशनपुर विधानसभा क्षेत्र हुआ करता था। इस सीट पर साल 2010, 2015 और 2020 में अनिरुद्ध प्रसाद यादव जीत चुके हैं।

यह भी पढ़ें | दोनों गठबंधन का महिला मतदाताओं पर जोर, किसके वादे में कितना दम?

पिपरा विधानसभा सीट का गणित

पिपरा सीट से जदयू विधायक राम विलास कामत दूसरी बार चुनावी समर में उतरे हैं। भारत की CPI(ML) ने यहां अनिल कुमार को पार्टी का उम्मीदवार बनाया है। साल 2020 में इस सीट पर जेडीयू के राम विलास कामत ने पूर्व सांसद और अपनी ही पार्टी के बागी आरजेडी उम्मीदवार विश्वमोहन कुमार को मात दी थी। पिपरा विधानसभा क्षेत्र साल 2008 में परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई थी। पिपरा सीट से 13 प्रत्याशी चुनावी दंगल में ताल ठोक रहे हैं। यह क्षेत्र कोसी नदी में आने वाली बाढ़ से हर साल जूझता है और बहुत से लोग बाढ़ की चपटे में आने से मर जाते है। शिक्षा, स्वास्थ्य, स्कूल और रोजगार आज भी इस क्षेत्र का प्रमुख चुनावी मुद्दा है।

Get Latest real-time updates

Catch all the Business News, Market News, Breaking News Events and Latest News Updates on Live Mint. Download The Mint News App to get Daily Market Updates.

होमElectionसुपौल जिले की चारों विधानसभा सीटों पर बदले समीकरण, कोसी का कहर झेलने वाले इस क्षेत्र को है विकास की दरकार
More