Election Reform: एक देश एक चुनाव पर पांच सवाल और उनके जवाब, लोकसभा में हुई ये बातें आपको जाननी चाहिए

Lok Sabha Discussion On Election Reform: चुनाव सुधार के विषय पर लोकसभा में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जोरदार बहस हुई। इस दौरान दौरान विपक्ष ने कई प्रश्न उठाए जिनका सत्ता पक्ष ने जवाब तो दिया, साथ ही अतीत के कई उदाहरण भी गिना दिए। 

Naveen Kumar Pandey
अपडेटेड9 Dec 2025, 09:19 PM IST
चुनाव सुधार पर सत्ता पक्ष और विपक्ष में तीखी बहस।
चुनाव सुधार पर सत्ता पक्ष और विपक्ष में तीखी बहस।

One Nation One Elction: मोदी सरकार एक राष्ट्र एक चुनाव को लेकर गंभीर है। इसी क्रम में मंगलवार को लोकसभा में चुनाव सुधार पर बहस हुई। पहले दिन की चर्चा में भाग लेते हुए पक्ष-विपक्ष के कई सांसदों ने अपनी-अपनी बात कही। सदन में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने बीजेपी सरकार में चुनावी घपलों का आरोप लगाया तो उन्हीं की पार्टी कांग्रेस के वरिष्ठ सांसद मनीष तिवारी ने भी कई सवाल किए।

सत्ता पक्ष से सांसद निशिकांत दुबे और फिर कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने विपक्ष के सवालों के जवाब दिए और अतीत की कांग्रेस सरकारों में हुई घटनाओं का भी जिक्र किया। आइए चुनाव सुधार पर हुई बहस में हम विपक्ष की तरफ से उठाए गए पांच प्रमुख सवालों और सत्ता पक्ष के जवाबों पर एक नजर डालते हैं।

1. चयन समिति से सीजेआई को क्यों हटाया?

विपक्ष का प्रश्न: मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) के सेलेक्शन पैनल से भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को क्यों हटाया गया? (प्रधानमंत्री, गृह मंत्री, और विपक्ष के नेता वाली इस समिति में विपक्ष के नेता की कोई आवाज नहीं रहती। मनीष तिवारी ने राज्यसभा में विपक्ष के नेता और CJI को शामिल करने का सुझाव दिया।

सत्ता पक्ष का उत्तर: सरकार ने मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और कार्यालय की अवधि) विधेयक 2023 संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत नियुक्ति प्रक्रिया को लागू करने के उद्देश्य से पारित किया। यह 2 मार्च, 2023 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद जरूरी हो गया था, जब तक कि संसद कोई कानून नहीं बना देती।

इसके अलावा, संविधान के अनुच्छेद 324(5) में प्रावधान है कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त को सुप्रीम कोर्ट के जज की तरह ही हटाया जा सकता है, और सरकार इसी का पालन कर रही है। कांग्रेस ने अतीत में नवीन चावला और एमएस गिल जैसे चुनाव आयुक्तों को वफादारी के आधार पर नियुक्त किया और उन्हें बाद में मंत्री बनाया। निशिकांत दुबे ने बताया कि 2014 से पहले 64 वर्षों तक कांग्रेस ने जिसे चाहा उसे नियुक्त किया, जबकि अब विपक्ष के सदस्य को सूची भेजी जाती है।

यह भी पढ़ें | राहुल गांधी ने चुनाव सुधार की जगह RSS पर साधा निशाना, संसदीय कार्यमंत्री ने टोका

2. चुनाव आयुक्तों को दंडित नहीं करने का प्रावधान क्यों किया?

विपक्ष का प्रश्न: सरकार ने दिसंबर 2023 में कानून क्यों बदला, जिससे चुनाव आयुक्तों को पद पर रहते हुए अपने किसी भी कार्य के लिए दंडित नहीं किया जा सकता?

सत्ता पक्ष का उत्तर: संविधान में ही प्रावधान है कि मुख्य चुनाव आयुक्त को सुप्रीम कोर्ट के जज के समान तरीके और आधारों पर ही हटाया जा सकता है। हम वही कर रहे हैं जो संविधान के अनुच्छेद 324(5) में लिखा है।

3. किस कानून ने चुनाव आयोग को SIR करवाने का अधिकार दिया?

विपक्ष का प्रश्न: चुनाव आयोग के पास पूरे देश में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) कराने का कानूनी आधार क्या है? कानून केवल किसी विशिष्ट चुनाव क्षेत्र में गड़बड़ी होने पर लिखित में कारण दर्ज करके, विशेष पुनरीक्षण की अनुमति देता है, न कि पूरे राज्य में। एसआईआर के कारण बिहार में 1.2 लाख डुप्लीकेट फोटो मतदाताओं की सूची में अभी भी क्यों हैं? हरियाणा में एक ब्राजीलियन महिला का नाम 22 बार और एक अन्य महिला का नाम 200 से अधिक बार मतदाता सूची में कैसे आया?

सत्ता पक्ष का उत्तर: हाल ही में माननीय सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि निर्वाचन आयोग को पूरे देश में मतदाता सूची के एसआईआर की प्रक्रिया संचालित करने का वैधानिक और संवैधानिक अधिकार प्राप्त है और इस प्रक्रिया को रोका नहीं जाएगा। ईसीआई समय-समय पर एसआईआर की प्रक्रिया आरपी एक्ट 1950 की धारा 21 और आरईआर रूल्स 1960 के रूल 25 के तहत संचालित करता है।

एसआईआर आवश्यक है क्योंकि तेजी से शहरीकरण, शिक्षा और रोजगार हेतु प्रवासन, और सामाजिक-आर्थिक परिवर्तनों के कारण नागरिक पुराने निर्वाचन क्षेत्र से नाम हटाए बिना नए निर्वाचन क्षेत्र में पंजीकरण करा लेते हैं, जिससे डुप्लीकेट प्रविष्टियां हो जाती हैं।

यह भी पढ़ें | वोटर लिस्ट से नागरिकता तक सवाल! SIR पर TMC सांसद कल्याण बनर्जी का तीखा हमला

4. मशीन से पढ़े जाने योग्य मतदाता सूची क्यों नहीं दी जाती?

विपक्ष का प्रश्न: राजनीतिक दलों को चुनाव से एक महीने पहले मशीन रिडेबल वोटर लिस्ट क्यों नहीं दी जाती?

सत्ता पक्ष का उत्तर: यह सुनिश्चित करना चुनाव आयोग की संवैधानिक जिम्मेदारी है कि कोई भी पात्र व्यक्ति छूटे नहीं और कोई भी अपात्र या डुप्लीकेट व्यक्ति मतदाता सूची में शामिल न हो। एसआईआर का उद्देश्य मतदाता सूची की शुद्धता, अखंडता और पारदर्शिता सुनिश्चित करना है, ताकि अयोग्य प्रविष्टियों को हटाया जा सके। निशिकांत दुबे ने उदाहरण दिया कि एसआईआर के कारण उनके माता-पिता का नाम बिहार से कटा क्योंकि वे दिल्ली में रहते थे, जो उचित है।

5. फिर से बैलेट पेपर से ही चुनाव क्यों नहीं कराना चाहिए?

विपक्ष का प्रश्न: ईवीएम का सोर्स कोड किसके पास है? क्या यह उन कंपनियों के पास है जो इन्हें बनाती हैं या चुनाव आयोग के पास? लोगों के भरोसे के लिए 100% वीवीपैट (VVPAT) की गिनती होनी चाहिए या पेपर बैलेट पर वापस जाना चाहिए।

सत्ता पक्ष का उत्तर: ईवीएम तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी के शासन काल में कांग्रेस ने पायलट प्रोजेक्ट के रूप में 1987 में लाया था। ईवीएम की आवश्यकता इसलिए पड़ी क्योंकि पहले बैलेट पेपर के समय बूथ लूटे जाते थे और बड़े पैमाने पर धांधली होती थी, जिसके कारण कई चुनाव अवैध घोषित हुए थे।

1961 और 1971 की सलेक्ट कमेटियों ने ही इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन से चुनाव कराने की सिफारिश की थी। आज जो वीवीपैट और पारदर्शिता दिखाई दे रही है, वह लालकृष्ण आडवाणी के इलेक्टोरल रिफॉर्म्स पर लाए गए प्राइवेट मेंबर रिजॉल्यूशन का परिणाम है।

यह भी पढ़ें | क्या 1 जनवरी 2026 से लागू नहीं होगा 8वां वेतन आयोग? संसद में सरकार ने दिया जवाब

सत्ता पक्ष और विपक्ष में खींचतान लोकतंत्र की खूबसूरती

यह स्थिति इस बात का उदाहरण है कि कैसे लोकतंत्र में दो विरोधी पक्ष एक ही चुनावी प्रक्रिया पर अलग-अलग संवैधानिक संदर्भों और ऐतिहासिक आख्यानों के साथ बहस करते हैं। विपक्ष मौजूदा सुधारों में पारदर्शिता की कमी देखता है, जबकि सत्ता पक्ष उन सुधारों को संवैधानिक दायित्व और पिछली बैलेट पेपर प्रणाली की धांधली की तुलना में एक प्रगतिशील कदम बताता है।

Catch all the Business News, Market News, Breaking News Events and Latest News Updates on Live Mint. Download The Mint News App to get Daily Market Updates.

बिजनेस न्यूज़ElectionElection Reform: एक देश एक चुनाव पर पांच सवाल और उनके जवाब, लोकसभा में हुई ये बातें आपको जाननी चाहिए
More
बिजनेस न्यूज़ElectionElection Reform: एक देश एक चुनाव पर पांच सवाल और उनके जवाब, लोकसभा में हुई ये बातें आपको जाननी चाहिए