लहर में भी निर्दलीय उम्मीदवार ने बीजेपी को दे दी मात, श्रीकांत पांगारकर की जीत पर इतनी चर्चा क्यों?

श्रीकांत पांगारकर ने महाराष्ट्र के जालना नगर निगम का चुनाव निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में जीत लिया है। खास बात यह है कि श्रीकांत पांगारकर ने तब बीजेपी उम्मीदवार को हराया जब निकाय चुनावों में बीजेपी की लहर चली है।

Naveen Kumar Pandey
अपडेटेड16 Jan 2026, 08:23 PM IST
 श्रीकांत पांगारकर और गौरी लंकेश।
श्रीकांत पांगारकर और गौरी लंकेश। (Mint)

महाराष्ट्र के स्थानीय निकाय चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) का बोलबाला रहा। कुल 29 निकायों में से कुल 25 की सत्ता बीजेपी के पास जाती दिख रही है। इस बीच एक निर्दलीय उम्मीदवार की बीजेपी के खिलाफ जीत चर्चा का विषय बना हुआ है। यह जीत महाराष्ट्र के जालना नगर निगम से हुई है जहां से श्रीकांत पांगारकर ने चुनाव में मैदान में बाजी मार ली है।

गौरी लंकेश की हत्या का आरोपी को मिली जीत

श्रीकांत पांगारकर पर वरिष्ठ पत्रकार एवं कथित सामाजिक कार्यकर्ता गौरी लंकेश की हत्या का आरोप है। पांगारकर को कर्नाटक उच्च न्यायालय ने 4 सितंबर, 2024 को इस मामले में जमानत दी थी। अपने दम पर पार्षद बने श्रीकांत पांगारकर नालासोपारा हथियार-गोला-बारूद बरामदगी के मामले में भी आरोपी हैं। बड़ी बात यह भी है कि पांगारकर ने बीजेपी उम्मीदवार को परास्त किया है।

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निर्दलीय उम्मीदवार ने बीजेपी को किया पस्त

श्रीकांत पांगारकर ने जालना नगर निगम के वार्ड नंबर 13 से चुनाव लड़ा था, जहां उनका सीधा मुकाबला बीजेपी के उम्मीदवार से था। जालना में अलग-अलग सीटों पर चुनाव लड़ने वाली शिवसेना (शिंदे गुट) ने इस वार्ड से कोई उम्मीदवार मैदान में नहीं उतारा था।

शिवसेना में शामिल हुए थे पांगारक, लेकिन बाद में निकाले गए

उल्लेखनीय है कि अक्तूबर, 2024 में हुए विधानसभा चुनावों से पहले पांगारकर को वर्तमान उप-मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की पार्टी शिवसेना में शामिल किया गया था और उन्हें जालना सीट के चुनाव प्रचार का प्रमुख नियुक्त किया गया था। बाद में इस फैसले को लेकर भारी आलोचना के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने उनकी नियुक्ति रद्द कर दी थी।

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2017 में हुई थी गौरी लंकेश की हत्या

घोर वामपंथी रहीं गौरी लंकेश की हत्या 5 सितंबर, 2017 की शाम को हुई थी। बेंगलुरु के राजराजेश्वरी नगर स्थित उनके घर के बाहर अज्ञात हमलावरों ने उन पर गोलियां चलाईं, जिससे उनकी मौके पर ही मृत्यु हो गई। उस समय वह अपने दफ्तर से घर लौटकर दरवाजा खोल रही थीं। जांच के बाद पुलिस ने मास्टरमाइंड अमोल काले और शूटर परशुराम वाघमोरे समेत कई आरोपियों को गिरफ्तार किया था।

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