
किशनगंज जिला जिसका राजनीतिक समीकरण इस बार बिल्कुल अलग नजर आ रहा है। वैसे तो किशनगंज जिला सबसे ज्यादा मुस्लिम आबादी वाला जिला है, जहां 68 प्रतिशत के करीब मुस्लिम आबादी है और यहां हार-जीत सिर्फ मुस्लिम तय करते हैं। जिसकी गवाही साल 2020 के विधानसभा चुनाव के नतीजे दे रहे हैं, उस वक्त जिले की चार विधानसभा सीटों में से तीन सीटों पर आरजेडी का कब्जा है, जबकि एक सीट किशनगंज पर कांग्रेस का कब्जा है। इस तरह से पूरे जिले में महागठबंधन का दबदबा नजर आता है और एनडीए यहां संघर्ष करती नजर आ रही है। अब सवाल ये उठता है कि क्या इस बार भी महागठबंधन यहां अपनी जीत बरकरार रख पाएगा या फिर एनडीए भी कुछ करिश्मा करेगी।
किशनगंज जिले में चार विधानसभा सीटें हैं ठाकुरगंज, बहादुरगंज कोचाधामन और किशनगंज इन चारों सीटों पर महागठबंधन का कब्जा है, तीन सीटों पर आरजेडी तो एक सीट पर कांग्रेस ने कब्जा जमाया हुआ है। किशनगंज विधानसभा सीट से कांग्रेस ने मौजूदा विधायक इजहारूल हुसैन का टिकट काटकर पूर्व विधायक कमहरूल होदा को चुनावी अखाड़े में उतारा है। बीजेपी ने यहां पूर्व विधायक सिकंदर सिंह की पत्नी स्वीटी सिंह को उम्मीदवार बनाया है। वर्ष 2020 के चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी इजहारूल हुसैन ने बीजेपी उम्मीदवार स्वीटी सिंह को पराजित किया था।असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM उम्मीदवार कमरूल होदा तीसरे नंबर पर रहे थे। इस बार के चुनाव में AIMIM ने यहां शम्श आगाज को प्रत्याशी बनाया है, जो मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने में लगे हुए हैं। इस विधानसभा क्षेत्र से इन तीनों के बीच मुकाबला होने की संभावना बन रही है। हालांकि, AIMIM से बागी हुए इसहाक आलम जनसुराज चुनाव लड़ रहे हैं, जो मुकाबले को चतुष्कोणीय बनाने मे लगे हुए हैं। इस सीट पर 10 उम्मीदवार रण क्षेत्र में डटे हुए हैं।
बहादुरगंज सीट से आरजेडी ने विधायक मोहम्मद अंजार नैयामी का टिकट काट दिया है। महागठबंधन में सीटों के तालमेल के तहत ये सीट कांग्रेस को मिली है और कांग्रेस ने यहां प्रोफेसर मुसव्विर आलम को प्रत्याशी बनाया है। वहीं एडीए की तरफ से चिराग पासवान की पार्टी LJP(R) के टिकट पर मोहम्मद कलीमउद्दीन अपना जोर दिखाने की कोशिश में हैं। वहीं AIMIM प्रत्याशी तौसीफ आलम चुनावी अखाड़े में हुंकार भर रहे हैं। साल 2020 में AIMIM प्रत्याशी मोहम्मद अंजार नैयामी ने VIP के प्रत्याशी लखन लाल पंडित को पराजित किया था। कांग्रेस उम्मीदार मोहम्मद तौसीफ आलम तीसरे नंबर पर रहे थे। बाद मे AIMIM के विधायक मोहम्मद अंजार नैयामी आरजेडी में शामिल हो गये थे। वो इस बार चुनाव लड़ने से वंचित रहे गए।
किसी जमाने में बहादुरगंज विधानसभा सीट कांग्रेस का गढ़ रह चुकी है, लेकिन साल 2020 के चुनाव में कांग्रेस, AIMIM और VIP के बीच त्रिकोणीय मुकाबला था। इस चुनाव में मुस्लिम वोट बटने के कारण कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा था। तौसीफ आलम ने इस क्षेत्र का चार बार प्रतिनिधित्व किया है। इस बार इस सीट पर नौ उम्मीदवार चुनावी अखाड़े में उतरे हैं।
कोचाधामन सीट से आरजेडी ने विधायक मोहम्मद इजहार आशफी का टिकट काटकर पूर्व विधायक मुजाहिद आलम को उम्मीदवार बनाया है। जबकि बीजेपी की टिकट पर वीणा देवी चुनावी अखाड़े में अपना जोर दिखा रही हैं। AIMIM ने शरवर आलम को उम्मीदवार बनाया है। सासल 2020 में AIMIM प्रत्याशी इजहार आशफी ने जेडीयू उम्मीदवार मुजाहिद आलम को पराजित किया था। आरजेडी उम्मीदवार मोहम्मद शाहिद आलम तीसरे नंबर पर रहे थे। बाद में AIMIM के विधायक इजहार असफी राजद में शामिल हो गए। इस बार उन्हें चुनाव लड़ने का अवसर नहीं मिला है।
कोचाधामन सीट का गठन 2008 में हुए परिसीमन के बाद हुआ था और तब से यह एक मुस्लिम-बहुल सीट मानी जाती है। इस सीट पर पहला विधानसभा चुनाव 2010 में हुआ था। साल 2010 के विधानसभा चुनाव में आकडे़ी के टिकट पर अख्तरुल ईमान ने जीत हासिल की। साल 2014 में अख्तरुल ईमान ने लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए विधायक पद से इस्तीफा दे दिया था, जिसके बाद इस सीट पर उप चुनाव हुए। उप चुनाव में, जेडीयू के मुजाहिद आलम ने जीत दर्ज की। साल 2015 के बिहार विधानसभा चुनाव में, जेडीयू के मुजाहिद आलम ने अपनी जीत बरकरार रखी। उन्होंने AIMIM के अख्तरुल ईमान को हराया। इस सीट पर छह उम्मीदवार किस्मत आजमा रहे हैं।
ठाकुरगंज विधानसभा सीट से राजद ने पूर्व सांसद असरारूल हक कासमी के बेटे और विधायक सउद आलम को चुनावी समर में उतारा है। जदयू ने यहां पूर्व विधायक गोपाल अग्रवाल पर दांव लगाया है। AIMIM प्रत्याशी गुलाम हसनैन भी यहां जीत के लिए जोर लगा रहे हैं। साल 2020 में राजद के सउद आलम ने निर्दलीय गोपाल अग्रवाल को चुनावी अखाड़े में शिकस्त दी थी। जेडीयू के मोहम्मद नौशाद आलम तीसरे जबकि AIMIM प्रत्याशी महबूब अलाम चौधरी चौथे नंबर पर रहे थे। ठाकुरगंज में 10 उम्मीदवार किस्मत आजमा रहे हैं।
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