
बिहार विधानसभा चुनाव में मतदान पूरा हो गया और अब इंतजार 14 नवंबर का है जब वोटों की गिनती होगी और नतीजे आएंगे। लेकिन नतीजे आने से पहले मतदान के बाद आए एग्जिट पोल ने बिहार समेत पूरे देश का राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है। बिहार चुनाव पर सर्वे करने वाली तमाम एजेंसियों के एग्जिट पोल कह रही है एक बार फिर बिहार में एनडीए सरकार बनाने जा रही है। ऐसे में अब ये सवाल उठना लाजमी है कि बिहार में हर बार पुरुषों से ज्यादा मतदान करने वाली महिलाओं की नब्ज पकड़ने में नीतीश कुमार का कोई मुकाबला नहीं है।
बिहार विधानसभा चुनाव के लिए जब चुनाव आयोग घोषणा करने वाला था उससे ठीक पहले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने महिला स्वरोजगार के लिए महिलाओं को 10-10 हजार रुपये उनके खाते में डाल दिए। 6 अक्टूबर को चुनाव आयोग ने बिहार विधानसभा चुनाव की घोषणा की, उससे एक महीने पहले 2 सितंबर को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जीविका मिशन से जुड़ी महिलाओं के खाते में 10-10 हजार रुपये डाल दिए। इतना ही नहीं चुनाव की घोषणा के बाद जब प्रचार का शोर तेज हुआ तब तेजस्वी यादव ने जीविका दीदियों को 30-30 हजार रुपये डालने की घोषणा कर डाली। जिसकी काट के लिए नीतीश कुमार ने मौके की नजाकत को भांपते हुए 10-10 हजार के अलावा दो लाख रुपये तक बिना ब्याज के कर्ज देने का वादा कर दिया।
नीतीश कुमार ने बिहार की करीब 1.50 करोड़ महिलाओं के खाते में 10-10 हजार रुपये की राशि डाली। इस तरह से एक महिला के साथ कम से कम तीन वोटर को प्रभावित करने वाला दांव चला। इस लिहाज से देखें तो नीतीश कुमार की इस योजना ने बिहार के कम से कम 4.5 करोड़ मतदाताओं को प्रभावित किया। इसमें से 60 प्रतिशत मतदाताओं ने भी अगर एनडीए गठबंधन को वोट दिया होता इस हिसाब से 2.7 करोड़ मतदाताओं ने एनडीए के पक्ष में वोट डाला होगा। जो बिहार के कुल 7.42 करोड़ मतदाताओं का करीब 38 प्रतिशत मतदाता होता है इस लिहाज से देखें तो सिर्फ 10 हजार रुपये से प्रभावित होने वाले वोटर की संख्या 38 प्रतिशत रही। जो सरकार बनाने के लिए निर्णायक हो सकता है।
बिहार विधानसभा चुनाव के लिए तेजस्वी यादव ने नीतीश कुमार की कोर वोटर मानी जाने वाली महिला वोट बैंक में सेंध लगाने के लिए बड़ी बारीकी से चुनावी घोषणाएं की थी। लेकिन नीतीश कुमार ने उनके एक-एक चाल की काट निकाली। तेजस्वी ने सबसे पहले विधवा, बेसहारा और बुजुर्ग पेंशन बढ़ाने का दांव चला, जिसकी काट के लिए नीतीश कुमार ने वृद्धा पेंशन 400 से बढ़ाकर 1100 कर दिया। तेजस्वी यादव ने जीविका दीदियों को 30 हजार रुपये वेतन का वादा किया, सीएम दीदी को 10 हजार वेतन का वादा किया, माई बहिन योजना चलाने की घोषणा की। जिसकी काट के लिए नीतीश कुमार ने महिलाओं को 10 हजार देने के बाद दो लाख तक ब्याज मुक्त कर्ज की घोषणा की। तेजस्वी के रोजगार, माई बहिन योजना की काट के तौर पर नीतीश सरकारी नौकरियों में 35 प्रतिशत स्थानीय महिलाओं को आरक्षण का दाव चल दिया।
नीतीश कुमार ने साल 2005 में बिहार की सत्ता संभाली उसके बाद से ही प्रदेश की महिला मतदाताओं को अपने वाले में करने की कवायद शुरू कर दी थी। नीतीश कुमार को ये बखूबी मालूम था कि राज्य की बहुत बड़ी आबादी रोजगार के लिए पलायन कर चुकी है। लिहाजा महिला मतदाताओं को अपने वाले में करने के लिए उन्होंने हर विधानसभा चुनाव से पहले एक की योजना महिलाओं के लिए की। नीतीश ने साल 2005 में मुख्यमंत्री बनते ही एक साल बाद 2006 में स्कूल जाने वाली लड़कियों के लिए मुख्यमंत्री साइकिल योजना शुरू की। साल 2010 के विधानसभा चुनाव से एक साल पहले उन्होंने छात्रों के लिए भी साइकिल योजना लॉन्च कर दी। इसके अलावा स्थानीय निकाय चुनाव में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण भी उन्होंने साल 2006 में लागू किया था। जिसका फायदा साल 2010 में हुआ।
नीतीश कुमार ने बिहार में महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत करने के लिए साल 2010 का चुनाव जीतने के बाद जीविका मिशन की शुरूआत की। जिसके तहत जीविका दीदी, सीएम दीदी, आंगनबाड़ी सहायिका ओयजनाओं के जरिए महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत करना शुरू कर दिया। इसके साथ ही पिछली महिला योजनाओं को और गति दी और साल 2015 का विधानसभा चुनाव जीता।
बिहार में महिला मतदाताओं को अपने पाले में करने के लिए नीतीश कुमार ने जो सबसे बड़ा फैसला लिया वो फैसला था शराबबंदी का। साल 2015 का विधानसभा चुनाव जीतने के एक साल बाद 2016 पूरे बिहार में संपूर्ण शराबबंदी लागू कर दी। जो आर्थिक रूप से गरीब प्रदेश में गरीबी और शराब के नशे में डूबा मजदूर वर्ग नशे के दलदल से बाहर निकला। जिसका नतीजा ये हुआ कि गरीब मजदूर वर्ग के घर में शराब को लेकर होने वाले झगड़े खत्म हो गए। इसका इनाम महिलाओं ने साल 2020 के विधानसभा चुनाव में पुरुषों से 7 प्रतिशत ज्यादा मतदान कर दिया।
नीतीश कुमार ने साल 2025 के विधानसभा चुनाव से पहले आजीविका मिशन से जुड़ी महिलाओं को 10-10 हजार रुपये दिए, विधवा, वृद्धा पेंशन 400 से बढ़ाकर 1100 किया और राज्य की सरकारी नौकरियों में बिहार की स्थानीय महिलाओं को 35 प्रतिशत आरक्षण की घोषणा कर दी। नीतीश की इस चाल से विपक्ष का डोमिसाइल मुद्दा भी बेअसर साबित हुआ। इस तरह से नीतीश कुमार ने हर चुनाव से पहले महिला मतादाताओं को साधकर सत्ता हासिल की। अब साल 2025 के विधानसभा चुनाव में मतदान बीत जाने के बाद जो सर्वे आए हैं वो एक बार फिर नीतीश सरकार बनाते दिखाई दे रहे हैं।
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