Bihar Election: वैशाली में हर सीट एक पार्टी एक परिवार का किला! दुनिया के सबसे पहले गणराज्य में आज की सियासी लड़ाई?

वैशाली दुनिया का पहला गणराज्य रही है, लिच्छवी वंश ने इसे 6वीं शताब्दी ईसा पूर्व में दुनिया का सबसे पहले गणराज्य बनाया था। तब के वैशाली की 2100 साल बाद भारतीय लोकतंत्र में तस्वीर पूरी तरह बदल गई है। वैशाली जिले में आठ विधानसभा सीटें हैं और हर सीट की एक अलग राजनीतिक कहानी और अलग राजनीतिक चरित्र है।

Rajkumar Singh
अपडेटेड27 Oct 2025, 08:59 PM IST
वैशाली में जेपी नड्डा की चुनावी रैली
वैशाली में जेपी नड्डा की चुनावी रैली(HT_PRINT)

वैशाली में कहीं तेजस्वी, कहीं तेज प्रताप, कहीं केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय तो कहीं बहुबली मुन्ना शुक्ला की राजनीतिक जमीन नजर आती है। वहीं कुछ ऐसी सीटें भी हैं जहां किसी भी राजनीतिक पार्टी का कोई स्थाई वजूद नजर नहीं आता है। इन सीटों पर हर विधानसभा चुनाव में अलग तस्वीर उभरकर सामने आती है। इस बार इन सीटों का क्या है सियासी गणित और किस पार्टी ने कौन से मोहरे फिट किए हैं आइए जानने की कोशिश करते हैं।

वैशाली विधानसभा क्षेत्र का गणित

वैशाली जिले की इन विधानसभा सीटों में सबसे पहले बात करते हैं वैशाली विधानसभा सीट की। वैशाली विधानसभा क्षेत्र से जेडीयू ने विधायक सिद्धार्थ पटेल को प्रत्याशी बनाया है, वहीं आरजेडी ने यहां अजय कुशवाहा को उम्मीदवार बनाया है। दूसरी तरफ महागठबंधन में आरजेडी की साझीदार कांग्रेस ने भी यहां अपने उम्मीदवार उतारे हैं। कांग्रेस ने यहां संजीव सिंह को अखाड़े में उतारकर तेजस्वी यादव की पार्टी के प्रत्याशी की मुश्किलें बढ़ा दी है। पूर्व मंत्री निर्दलीय प्रत्याशी वृषण पटेल फिर से यहां अपना जलवा दिखााने के लिये बेताब है। पटेल यहां साल 1980,1985,1990,2005 फरवरी, 2005 अक्टूबर और साल 2010 में चुनाव जीत चुके हैं। साल 2015 में यहां पर जेडीयू के राजकिशोर सिंह ने जीतनराम मांझी की पार्टी हम के वृष्ण पटेल को 31061 मतों से मात दी थी। इस बार इस सीट पर 13 उम्मीदवार चुनावी मैदान में डटे हैं।

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पातेपुर में बीजेपी दुहरा पाएगी जीत?

वैशाली की सुरक्षित विधानसभा सीट पातेपुर से बीजेपी के विधायक लखेन्द्र कुमार रौशन दूसरी बार जीत की आस मे हैं। वहीं आरजेडी ने यहां पूर्व विधायक प्रेमा चौधरी को चुनावी मैदान में उतारा है। साल 2020 में बीजेपी के लखनेंद्र कुमार रौशन ने आरजेडी प्रत्याशी और पूर्व मंत्री शिवचंद्र राम को मात दी थी। इस सीट पर खास तौर पर प्रेमा चौधरी और महेंद्र बैठा जैसे नेताओं का दबदबा रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री राम सुंदर दास ने वर्ष 1990 में यहां जीत दर्ज की थी। पातेपुर में रविदास, पासवान, कुर्मी और कोरी मतदाता बहुसंख्यक हैं, जो चुनावी नतीजों को प्रभावित करते हैं।

पातेपुर का ऐतिहासिक श्री राम-जानकी मंदिर

पातेपुर का श्री राम-जानकी मंदिर सैकड़ों वर्ष पुराना है। ये मंदिर भव्य और प्राचीन है, जिसमें भगवान राम, लक्ष्मण, मां जानकी और हनुमान की मूर्तियां स्थापित हैं ये मंदिर रामानंदी संप्रदाय के संतों के लिए भी तीर्थस्थल है। हर रामनवमी पर पातेपुर हाईस्कूल मैदान में एक माह तक मेला आयोजित होता है। इसके अलावा पातेपुर प्रखंड के डभैच्छ स्थित बाबा दरवेश्वरनाथ धाम लगभग 500 साल पुराना है। इस सीट पर दस उम्मीदवार चुनावी रणभूमि में किस्मत आजमा रहे हैं।

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राजापाकड़ की भी है रोचक कहानी

वैशाली जिले की एक सुरक्षित सीट राजापाकड़ से कांग्रेस ने पूर्व मुख्यमंत्री रामसुंदर दास की रिश्तेदार और मौजूदा विधायक प्रतिमा कुमारी दास को उम्मीदवार बनाया है। वहीं जेडीयू ने यहां महेन्द्र राम को चुनावी अखाड़े में उतारा है। साल 2020 के चुनाव में कांग्रेस की प्रतिमा दास ने जेडीयू के महेन्द्र राम को हराया था। इसी सीट पर राम विलास पासवान की पार्टी एलजेपी से उनकके दामाद धनंजय कुमार ने चुनाव लड़ा था, लेकिन उन्हें तीसरे नंबर पर संतोष करना पड़ा। इस बार के चुनाव में CPM के मोहित पासवान चुनावी अखाड़े में ताल ठोक रहे हैं, जो कांग्रेस प्रत्याशी प्रतिमा कुमारी दास के लिये मुश्किलें खड़ी कर सकते हैं। इस सीट पर 14 उम्मीदवार चुनावी मैदान में डटे हुए हैं।

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