Bihar Chunav Update: पूर्णिया में जोरदार है सत्ता का घमासान, महागठबंधन की मुश्किल बढ़ाएंगे ओवैसी? एनडीए के लिए भी चुनौती

बिहार विधानसभा चुनाव अपने अंतिम पड़ाव की तरफ बढ़ रहा है। 11 नवंबर को दूसरे चरण का मतदान होगा, जिसमें पूर्णिया जिले की सभी 7 सीटों पर भी वोट डाले जाएंगे। इस बार पूर्णियां में त्रिकोणीय मुकाबले की संभावना बन रही है। पिछली बार ओवैसी, महागठबंधन और एनडीए सबको खुशी मिली थी।

Rajkumar Singh
अपडेटेड9 Nov 2025, 03:59 PM IST
पूर्णिया एयरपोर्ट के नए टर्मिनल बिल्डिंग का उद्घाटन करते पीएम मोदी, नीतीश कुमार
पूर्णिया एयरपोर्ट के नए टर्मिनल बिल्डिंग का उद्घाटन करते पीएम मोदी, नीतीश कुमार(HT)

बिहार के पूर्णिया जिले में 7 विधानसभा सीटें हैं साल 2020 के विधानसभा चुनाव में सूबे में सक्रिय तकरीबन सभी प्रमुख पार्टियों को यहां कामयाबी मिली थी। यहां तक कि हैदराबाद वाले असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM को भी यहां जीत हासिल हुई। लेकिन इस बार समीकरण बदले हुए नजर आ रहे हैं। बिहार विधानसभा चुनाव के दूसरे और अंतिम चरण में पूर्णिया जिले में 11 नवंबर को होने वाले चुनाव में सभी सात सीटों पर रोमांचक मुकाबला होने की संभावना है। पूर्णिया जिले की जिन विधानसभा सीटों पर चुनाव होने हैं उनमें बायसी, धमदाहा, कस्बा, बनमंखी, अमौर, रूपौली और पूर्णियां शामिल है। साल 2020 के चुनाव में पूर्णिया और वनमंखी में बीजेपी, धमदाहा और रूपौली में जेडीयू, कसबा में कांग्रेस, बायसी में आरजेडी और अमौर में हैदराबाद वाले असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM ने कब्जा जमाया था।

धमदाहा विधानसभा सीट का समीकरण

धमदाहा विधानसभा क्षेत्र से जेडीयू की विधायक और खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री लेशी सिंह चुनावी समर में पांच बार जीत दर्ज कर चुकी हैं और छठी बार जीत का परचम लहराने के लिए बेतााब नजर आ रही हैं। वहीं आरजेडी ने यहां पूर्व सांसद संतोष कुशवाहा को उम्मीदवार बनाया है। साल 2020 के चुनाव में जेडीयू उम्मीदवार लेसी सिंह ने राजद उम्मीदवार पूर्व विधायक दिलीप कुमार यादव को पराजित कर दिया था। साल 1957 के चुनाव में इस सीट से पूर्व मुख्यमंत्री भोला पासवान शास्त्री ने जीत दर्ज की थी। धमदाहा सीट से 11 उम्मीदवार चुनावी अखाड़े में उतरे हैं।

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बायसी सीट पर त्रिकोणीय मुकाबला

बायसी विधानसभा सीट से आरजेडी ने अपने मौजूदा विधायक सैयद रुकनुद्दीन अहमद का टिकट काट दिया है। पार्टी ने यहां से पूर्व विधायक अब्दुस सुभान को उम्मीदवार बनाया है। बीजेपी ने पूर्व विधायक विनोद यादव, जबकि AIMIM ने गुलाम सरकार को उम्मीदवार बनाया है। साल 2020 में AIMIM प्रत्याशी सैयद रुकनुद्दीन अहमद ने बीजेपी के विनोद कुमार को पराजित किया था। सैयद रुकनुद्दीन अहमद ने बाद में AIMIM का साथ छोड़ कर राजद का दामन थाम लिया था। पूर्व विधायक अब्दुस सुभान यहां सातवीं बार जीत का परचम लहराने के लिये बेताब हैं। इस सीट पर त्रिकोणीय मुकाबले के आसार हैं। इस क्षेत्र में सात प्रत्याशी चुनावी रणभूमि में डटे हुए हैं।

सातवीं जीत के लिए मैदान में मस्तान

अमौर विधानसभा सीट से AIMIM के प्रदेश अध्यक्ष और विधायक अख्तरूल इमान दूसरी बार जीत का परचम लहराने के लिये बेताब हैं। कांग्रेस ने यहां दिग्गज नेता और पूर्व मंत्री अब्दुल जलील मस्तान को उम्मीदवार बनाया है। इस सीट पर छह बार जीत का परचम लहरा चुके मस्तान सातवीं बार जीत के इरादे से चुनावी अखाड़े में ताल ठोक रहे हैं। जेडीयू ने यहां पूर्व विधायक सफा जफर को प्रत्याशी बनाया है। जफर इस सीट पर तीन बार चुनाव जीत चुके हैं ओर चुनावी चौका लगाने के लिए बेताब हैं। इस सीट पर नौ प्रत्याशी चुनावी संग्राम में जोर आजमा रहे हैं।

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कस्बा 5वीं जीत के लिए मैदान में कांग्रेस के बागी

कस्बा विधानसभा सीट से कांग्रेस ने विधायक मोहम्मद अफाक आलम को बेटिकट कर दिया है। कांग्रेस ने यहां मोहम्मद इरफान आलम को उम्मीदवार बनाया हे। AIMIM ने यहां शाहनवाज आलम, LJP(R) ने नितेश कुमार सिंह को प्रत्याशी बनाया है, वहीं कांग्रेस से बेटिकट होने के बाद मोहम्मद अफाक आलम बगावत कर निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनावी रण में कूद चुके हैं। साल 2020 के चुनाव में कांग्रेस के मोहम्मद अफाक आलम ने LJP(R) उम्मीदवार प्रदीप कुमार दास को हराया था। आफाक आलम ने यहां चार बार जीत दर्ज की है और वह पांचवी बार अपना दम दिखाने के लिये बेताब हैं। इस सीट से 13 उम्मीदवार किस्मत आजमा रहे हैं।

बनमुंखी से 6वीं जीत के लिए मैदान में ऋषि

सुरक्षित सीट बनमंखी विधानसभा क्षेत्र से बीजेपी उम्मीदवार कृष्ण कुमार ऋषि छठी बार जीत की आस में हैं। वो लगातार पांच चुनावों से यहां जीत दर्ज करते आ रहे हैं। कांग्रेस ने यहां पूर्व विधायक देव नारायण रजक को उम्मीदवार बनाया है। साल 2020 में बीजेपी उम्मीदवार कृष्ण कुमार ऋषि ने आरजेडी उम्मीदवार उपेन्द्र शर्मा को पराजित किया था। साल 1962 में पूर्व मुख्यमंत्री भोला पासवान शास्त्री ने इस सीट पर जीत हासिल की थी। इस सीट से पांच उम्मीदवार चुनावी रण में डटे हैं।

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रूपौली से जेडीयू की बागी बीमा भारती

रूपौली विधानसभा क्षेत्र से बीजेपी ने पूर्व मंत्री बीमा भारती को उम्मीदवार बनाया है। जेडीयू ने यहां कलाधर मंडल को उम्मीदवार बनाया है। निर्दलीय विधायक शंकर सिंह एक बार चुनावी अखाड़े में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में ही अपना जोर आजमा रहे हैं। साल 2020 में जेडीयू उम्मीदवार बीमा भारती ने एलजेपी उम्मीदवार और पूर्व विधायक शंकर को पराजित किया था। साल 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले बीमा भारती ने रूपौली सीट से इस्तीफा देने के बाद जेडीयू का साथ छोड़ दिया था और आरजेडी में शामिल हो गई थीं। बीमा भारती ने पूर्णिया संसदीय सीट से चुनाव लड़ा लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा।

रुपौली में त्रिकोणीय मुकाबला

साल 2024 में खाली हुई रूपौली विधानसभा सीट पर हुए उप चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार शंकर सिंह ने जीत दर्ज की। जेडीयू उम्मीदवार कलाधर मंडल दूसरे जबकि आरजेडी उम्मीदवार बीमा भारती तीसरे नंबर पर रही थीं। इस बार के चुनाव में भी इन तीनों राजनेताओं के बीच मुकाबला देखने को मिलेगा। आरजेडी उम्मीदवार बीमा भारती इस सीट पर पांच बार जीत दर्ज कर चुकी हैं और छठी बार जीत की आस में हैं, वहीं शंकर सिंह यहां दो बार विधायक रहे हैं और तीसरी बार जीत की तलाश में हैं। इस सीट पर भी त्रिकोणीय मुकाबले के आसार हैं। रूपौली सीट से 15 उम्मीदवार चुनावी अखाड़े में उतरे हैं।

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पूर्णिया से हैट्रिक की ताक में विजय खेमका

पूर्णियां विधानसभा क्षेत्र से बीजेपी के टिकट पर विधायक विजय खेमका चुनावी हैट्रिक लगाने के लिए मैदान में उतरे हैं। कांग्रेस ने यहां विजेंद्र यादव को प्रत्याशी बनाया है। विजेंद्र यादव की पत्नी विभा कुमारी पूर्णिया की महापौर हैं। साल 2020 में बीजेपी उम्मीदवार विजय खेमका ने कांग्रेस उम्मीदवार इंदु सिन्हा को पराजित किया था। इस सीट से दिग्गज कांग्रेस नेता कमल देव नारायण सिन्हा छह बार लगातार जीत दर्ज कर चुके हैं।

पूर्णिया में विधायकों की हत्या का इतिहास

दिग्गज CPI(M) नेता अजीत सरकार ने चार बार 1980, 1985, 1990 और 1995 में लगातार जीत का परचम लहराया था। साल 1998 में अजीत सरकार की हत्या के बाद इस सीट पर हुए उप चुनाव में उनकी पत्नी और CPI(M) उम्मीदवार माधवी सरकार ने जीत दर्ज की थी। राज किशोर केसरी ने इस सीट पर चार बार लगातार प्रतिनधित्व किया है। जनवरी 2011 में उनकी हत्या के बाद खाली हुई इस सीट पर हुए उप चुनाव में उनकी पत्नी किरण देवी ने जीत हासिल की थी। इस सीट पर नौ उम्मीदवार चुनावी अखाड़े में जोर आजमा रहे हैं।

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