
बिहार विधानसभा चुनाव में प्रचार का शोर चरम पर है, हालांकि पहले चरण के लिए प्रचार का शोर मंगलवार शाम को थम गया। लेकिन दूसरे चरण के लिए जोर आजमाइश जारी है, कांग्रेस के कद्दावर नेता जो बिहार में चुनाव प्रचार करने नहीं पहुंच पाए हैं वो दिल्ली से ही केंद्र की मोदी सरकार और राज्य की नीतीश सरकार पर निशाना साध रहे हैं। इसी कड़ी में उन्होंने एक बार फिर बिहार के ज्वलंत मुद्दों को लेकर डबल इंजन की सरकार पर निशाना साधा है। जयराम रमेश ने कहा कि बिहार में 20 साल पहले जो समस्याएं थीं वो आज भी बदस्तूर बनी हुई हैं।
पुराने कांग्रेसी और पार्टी के कद्दावर नेता जयराम रमेश ने दिल्ली से ही बिहार विधानसभा चुनाव में पार्टी की तरफ से प्रचार में योगदान देने की पूरी कोशिश की है। उन्होंने पीएम मोदी पर सीधा निशाना साधा और रहा कि बिहार में पिछले 20 साल से महिला सम्मान का ढोंग किया जा रहा है। पिछले एक दशक में पीएम मोदी को बिहार के महिलाओं की याद नहीं आई अब जब चुनाव हो रहा है तो डिजिटल सम्मान का ढोंग कर रहे हैं। इससे पहले महिलाओं के सम्मान, उनकी सुरक्षा और उनके स्वास्थ्य का ध्यान नहीं रखा गया।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने दावा किया कि बीजेपी-जेडीयू की सरकापर में महिलाओं की सुरक्षा, उनके स्वास्थ्य और उनके सम्मान की 20 साल से लगातार अनदेखी होती आई है। अब जब मतदान में चंद दिन बचे हैं तो महिला कार्यकर्ताओं से बात किया जा रहा है। महिलाओं के सम्मान की बात कही जा रही है। जयराम रमेश ने पीएम मोदी के मेरा बूथ सबसे मजबूत कार्यक्रम पर भी निशाना साधा। उन्होंने सोशल मीडिया एक्स पर एक पोस्ट के जरिए बिहार की नीतीश और केंद्र की मोदी सरकार पर जमकर निशाना साधा है।
जयराम रमेश ने दावा किया कि बिहार में महिलाओं के खिलाफ अपराध में 336 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। उनका कहना था कि पहले की तुलना में अब हर साल 20,222 अपराध हुए अब अब तक कुल 2,80,000 महिलाएं इसका शिकार हुईं। कांग्रेस नेता ने कहा कि 1,17,947 मामले अभी तक अदालतों में लंबित हैं जो देश में सबसे अधिक हैं। महिलाओं के अपहरण के मामलों में 1097 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। पहले हर साल अपहरण की 929 घटनाएं होती थीं लेकिन अपहरण की 10,190 की घटनाएं होती हैं। जयराम रमेश ने कहा कि बिहार की महिलाओं ने नीतीश कुमार को रिकॉर्ड तोड़ वोट दिया इसके बावजूद उनकी सुरक्षा सरकार नहीं कर पाई।
जयराम रमेश ने बिहार की महिलाओं को रोजगार के लिए 10 हजार रुपये देने की योजना पर भी सवाल उठाए। कांग्रेस नेता ने दावा किया कि चुनावी हार से घबराकर सरकार अब महिलाओं के अकाउंट में 10,000 रुपये डाल रही है। लेकिन बिहार की लाखों बेटियां माइक्रो फाइनेंस कंपनियों के कर्ज़ के जाल में बुरी तरह फंसी हुई हैं। अब तक एक करोड़ 9 लाख महिलाएं कर्ज़ के जाल में फंस चुकी हैं। उनके अनुसार, औसतन बकाया 30,000 रुपये प्रति महीना तक हो चुका है, इस वजह से वसूली एजेंट का गुंडा राज, सामाजिक अपमान, पलायन, आत्महत्या तक की नौबत आ रही है।
रमेश ने कहा कि पश्चिमी चंपारण की सुनीता देवी कर्ज के जाल में बुरी तरह फंसी महिलाओं का जीता-जागता उदाहरण हैं। उन्होंने 40,000 रुपये का कर्ज लिया था। बीमा/कटौती के बाद उनके हाथ में 33,000 रुपये आए। 2,800 रुपये प्रति माह के हिसाब से उन्होंने दो साल में 68,200 रुपये चुका दिए। इसके बावजूद जैसे ही एक किस्त रुकी, उन्हें वसूली एजेंट की तरफ से धमकी मिली कि बेटी को उठा ले जाएंगे। उनका कहना था कि यह कोई अपवाद नहीं है, बल्कि बिहार में ऐसे लाखों मामले हैं।
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