जेएनयू छात्रसंघ चुनाव: बहस, आरोप और छात्र मुद्दों पर गरमाया माहौल, जानें किसने क्या कहा

जेएनयू छात्रसंघ चुनाव में उम्मीदवारों ने विभिन्न मुद्दों पर अपनी राय रखी। अंगद सिंह ने प्रशासन की आलोचना की, जबकि शिरषवा इंदु ने पर्यावरण और शिक्षा पर ध्यान केंद्रित किया। मतदान 4 नवंबर को होगा और परिणाम 6 नवंबर को घोषित होंगे।

Manali Rastogi( विद इनपुट्स फ्रॉम भाषा)
अपडेटेड3 Nov 2025, 04:18 PM IST
जेएनयू छात्रसंघ चुनाव: बहस, आरोप और छात्र मुद्दों पर गरमाया माहौल, जानें किसने क्या कहा
जेएनयू छात्रसंघ चुनाव: बहस, आरोप और छात्र मुद्दों पर गरमाया माहौल, जानें किसने क्या कहा

नई दिल्ली: जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में रविवार शाम होते-होते चुनावी माहौल पूरी तरह गरमा गया। कैंपस में छात्रों के नारे गूंज उठे और परिसर चुनावी रंग में रंग गया।

हर साल की तरह इस बार भी जेएनयू छात्रसंघ (JNUSU) चुनाव के लिए अध्यक्ष पद के उम्मीदवारों के बीच एक जोरदार बहस हुई। सभागार छात्रों से खचाखच भरा हुआ था और मंच पर छह उम्मीदवार मौजूद थे। सभी अपनी बारी का इंतज़ार कर रहे थे।

यह भी पढ़ें | DigiLocker का इस्तेमाल कर पासपोर्ट डॉक्यूमेंट्स कैसे अपलोड करें? जानिए प्रोसेस

पीछली पंक्ति में बैठे एक शोध छात्र ने कहा, “जेएनयू चुनाव लोकतंत्र का असली अभ्यास होता है। यहां से हमें पता चलता है कि राजनीति बहस से शुरू होती है।” छात्रसंघ चुनाव के लिए मतदान 4 नवंबर को होगा और परिणाम 6 नवंबर को घोषित किए जाएंगे।

मुख्य छात्र संगठन और उम्मीदवार

इस बार चुनाव में वाम गठबंधन, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP), एनएसयूआई (NSUI), प्रोग्रेसिव स्टूडेंट्स एसोसिएशन (PSA), दिशा स्टूडेंट्स ऑर्गेनाइजेशन (DSO) और कुछ स्वतंत्र उम्मीदवार मैदान में हैं। सभी उम्मीदवारों ने खुद को “जेएनयू की असली आवाज़” बताया।

अंतरराष्ट्रीय अध्ययन विभाग की पीएचडी छात्रा अदिति मिश्रा (वाम गठबंधन) ने अपने भाषण में कहा कि उनका संघर्ष सिर्फ कैंपस तक सीमित नहीं है। उन्होंने कहा, “हम फलस्तीन के लोगों के लिए, कश्मीर के राज्य दर्जे के लिए, लद्दाख के पर्यावरण के लिए और सोनम वांगचुक की रिहाई के लिए आवाज उठाते रहेंगे।”

यह भी पढ़ें | क्या OCI कार्डहोल्डर्स को भारत में मिल सकता है आधार कार्ड? जानिए क्या है नियम

अदिति ने सरकार पर “भारत की अवधारणा पर हमला करने” का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि असहमति जताने वालों की आवाज दबाई जा रही है और कार्यकर्ताओं को जेल में डाला जा रहा है। उन्होंने साध्वी प्रज्ञा के हालिया बयान “लड़कियों की टांगें तोड़ दूंगी” पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “यह बयान दिखाता है कि समाज में इंसानियत की जगह नफरत ने ले ली है।”

एबीवीपी के विकास पटेल का पलटवार

एबीवीपी के अध्यक्ष पद के उम्मीदवार विकास पटेल ने वामपंथी राजनीति पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, “जेएनयू अब वामपंथी राजनीति से थक चुका है। 50 सालों से यही लोग यहां हावी हैं और विश्वविद्यालय को पीछे धकेल रहे हैं।”

उन्होंने आरोप लगाया कि वामपंथ समानता की बात करता है, लेकिन उनकी पार्टी में न महिलाएं हैं, न दलित प्रतिनिधित्व। विकास ने कहा, “छात्रों के लिए पूरे साल काम एबीवीपी ही करती है। बाकी संगठन सिर्फ चुनाव के समय दिखाई देते हैं।” उन्होंने 1975 के आपातकाल को “लोकतंत्र पर सबसे बड़ा धब्बा” बताया।

एनएसयूआई का रुख

एनएसयूआई के उम्मीदवार विकास ने कहा कि वामपंथी और दक्षिणपंथी दोनों ही छात्र मुद्दों को भुला चुके हैं। उन्होंने कहा, “छात्रवृत्ति, शोध के लिए फंड, छात्रावास की सुरक्षा इन पर कोई बात नहीं करता। दोनों ओर की राजनीति ने जेएनयू के असली मुद्दों को दबा दिया है।”

यह भी पढ़ें | BNPL vs Personal Loan: अपनी जरूरतों के हिसाब से जानिए आपके लिए क्या है बेहतर

पीएसए (PSA) की उम्मीदवार शिंदे विजयलक्ष्मी व्यंकट राव ने सबसे प्रभावशाली भाषण दिया। उन्होंने मंच पर विश्वविद्यालय के चीफ प्रॉक्टर ऑफिस (CPO) के नियमों की किताब फाड़ दी और कहा कि यह “सुरक्षा नहीं, निगरानी का प्रतीक” है। उन्होंने कहा, “कैंपस में हर जगह अवरोधक हैं। आरएसएस की परेड के लिए जगह है, लेकिन विरोध प्रदर्शन के लिए नहीं। हमें अपने ही देश में दूसरे दर्जे का नागरिक समझा जाता है।”

राव ने बशीर बद्र की पंक्तियां सुनाईं, “लोग टूट जाते हैं एक घर बनाने में, तुम तरस नहीं खाते बस्तियां जलाने में।” यह सुनकर पूरा सभागार तालियों से गूंज उठा। उन्होंने सरकार की नीतियों पर कटाक्ष करते हुए कहा, “ये लोग ताबूत पर जीएसटी को मास्टरस्ट्रोक बताते हैं, और जंगलों को व्यापारियों के नाम कर देते हैं क्या यही वह भारत है जिसका सपना हमने देखा था?”

यह भी पढ़ें | 30 साल की उम्र में कैसे प्लान करें रिटायरमेंट? जानिए

अंगद सिंह, एक स्वतंत्र उम्मीदवार, ने कहा, “मैं गाज़ा या नेपाल की चिंता तब करूंगा जब हमारे हॉस्टल की टूटी छतें ठीक कर दी जाएंगी।” उन्होंने कहा, “हर बार हर समस्या के लिए प्रशासन को दोष देना आसान है, लेकिन तब सवाल उठता है फिर चुनाव क्यों लड़ रहे हैं?”

डीएसओ की उम्मीदवार शिरषवा इंदु ने पर्यावरण और शिक्षा से जुड़े मुद्दे उठाए। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन, स्कूल छोड़ने वालों की बढ़ती संख्या और चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रम (FYUP) के कारण छात्रों पर दबाव बढ़ा है।

इस साल के प्रमुख उम्मीदवार

  • वाम गठबंधन: अदिति मिश्रा (अध्यक्ष), कीझाकूट गोपिका बाबू (उपाध्यक्ष), सुनील यादव (महासचिव), दानिश अली (संयुक्त सचिव)
  • एबीवीपी: विकास पटेल (अध्यक्ष), तान्या कुमारी (उपाध्यक्ष), राजेश्वर कांत दुबे (महासचिव), अनुज (संयुक्त सचिव)
  • पिछले साल आइसा (वाम गठबंधन) के नीतीश कुमार अध्यक्ष चुने गए थे, जबकि एबीवीपी के वैभव मीणा ने संयुक्त सचिव पद जीता था।

Catch all the Business News, Market News, Breaking News Events and Latest News Updates on Live Mint. Download The Mint News App to get Daily Market Updates.

बिजनेस न्यूज़Electionजेएनयू छात्रसंघ चुनाव: बहस, आरोप और छात्र मुद्दों पर गरमाया माहौल, जानें किसने क्या कहा
More
बिजनेस न्यूज़Electionजेएनयू छात्रसंघ चुनाव: बहस, आरोप और छात्र मुद्दों पर गरमाया माहौल, जानें किसने क्या कहा