अलीनगर में आसान नहीं मैथिली ठाकुर की राह, अमित शाह से लेकर धर्मेंद्र प्रधान ने झोंकी ताकत, बिनोद मिश्रा बड़ी चुनौती

मैथिली ठाकुर अपनी आवाज और मैथिली संगीत को राष्ट्रीय पहचान दिलाने वाली एक ऐसा गायिका, जिसने महज 25 साल की उम्र में राजनीति की पिच पर सियासी राग छेड़ने का फैसला कर लिया। हालांकि मैथिली ने सोचा था उनकी पार्टी उन्हें उनके गृह नगर से मैदान में उतारेगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

Rajkumar Singh
अपडेटेड1 Nov 2025, 05:57 PM IST
यूपी की भाजपा विधायक केतकी सिंह ने मैथिली ठाकुर के सामने मिथिला पाग का अपमान किया
यूपी की भाजपा विधायक केतकी सिंह ने मैथिली ठाकुर के सामने मिथिला पाग का अपमान किया(HT)

लगभग एक दशक पहले जब बिहार की एक किशोरी ने अपनी मधुर आवाज़ से संगीत जगत में पहचान बनानी शुरू की थी, तब शायद ही किसी ने सोचा होगा कि वही संकोची लड़की एक दिन राजनीति के मैदान में उतर जाएगी। अब बिहार विधानसभा चुनाव के सबसे चर्चित उम्मीदवारों में शामिल 25 वर्षीय मैथिली ठाकुर ने कहा कि, मैं अलीनगर में घर बनाना चाहती हूं और इसे ही अपना स्थायी ठिकाना बनाऊंगी। मेरे ननिहाल की जड़ें यहीं हैं। मैं कहीं और नहीं रहना चाहती। मैथिली का ये बयान कुछ वैसा ही है जैसा कि पूर्व केंद्रीय मंत्री रहीं स्मृति ईरानी ने अमेठी में बयान दिया था। हालांकि दोनों की राजनीतिक जमीन और प्रकृति में बहुत अंतर है।

अलीनगर से बीजेपी उम्मीदवार मैथिली ठाकुर

दरभंगा जिले के अलीनगर विधानसभा क्षेत्र से बीजेपी उम्मीदवार ने जब चुनावी मैदान में उतरने का फैसला कर लिया तो आरोपों और सियासी शब्दों के तीर उनपर चलने लाजमी हैं। मैथिली ने शायद शांत रहकर इसका सामना करना भी सीख लिया है। मैथिली पर पहला आरोप लगा बाहरी होने का। दरअसल मैथिली की पारिवारिक जड़ें मधुबनी जिले में हैं, वो दिल्ली के नजफगढ़ इलाके में रहती हैं और दरभंगा जिले के अलीनगर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ रही हैं।

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बीजेपी में शामिल होते ही मिला टिकट

मैथिली ठाकुर ने 14 अक्टूबर को बीजेपी की सदस्यता ली थी लेकिन उनके पहले से ही उनके राजनीति में आने की अटकलें तेज थीं। पांच अक्टूबर को, जब चुनाव की घोषणा से ठीक एक दिन पहले बीजेपी महासचिव विनोद तावड़े और केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय के साथ उनकी तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हुई, तब ये लगभग तय माना जाने लगा कि वो चुनाव मैदान में उतरेंगी। बीजेपी के बिहार प्रभारी तावड़े ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा था कि, प्रसिद्ध गायिका मैथिली ठाकुर उन परिवारों में से एक से हैं, जो 1995 में ‘लालू राज’ के दौरान बिहार छोड़ने को मजबूर हुए थे। अब बदलते समय के साथ वह वापस आना चाहती हैं।

नाराज मिश्री लाल यादव ने छोड़ी पार्टी

मैथिली के बीजेपी में शामिल होने और चुनाव लड़ने की खबरों से बहुत सारे लोग काफी खुश हुए तो वहीं दूसरी तरफ कुछ ऐसे लोग भी थे जो नाराज थे, उन्हीं में से एक हैं बीजेपी विधायक मिश्री लाल यादव, जिन्होंने पार्टी छोड़ दी थी। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी दलितों और पिछड़ों की उपेक्षा कर रही है। मैथिली ठाकुर ब्राह्मण समुदाय से हैं, और उनके मुख्य प्रतिद्वंद्वी आरेजडी उम्मीदवार बिनोद मिश्र भी ब्राह्मण हैं, जो उम्र में उनसे करीब 35 वर्ष बड़े हैं। मिश्र को मुस्लिम और यादव समुदायों का समर्थन मिलने की उम्मीद है, जो इस क्षेत्र में ब्राह्मणों के साथ सबसे अधिक संख्या में हैं।

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अलीनगर विधानसभा सीट का इतिहास

दरभंगा जिले का अलीनगर विधानसभा क्षेत्र साल 2008 के परिसीमन के बाद अस्तित्व में आया था। 2010 और 2015 में हुए दो चुनावों में आरजेडी नेता अब्दुल बारी सिद्दीकी ने जीत दर्ज की थी। साल 2020 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी के मिश्री साल यादव ने मुकेश सहनी की पार्टी VIP के बिनोद मिश्रा को हराया था। इस बार बिनोद मिश्रा आरजेडी की टिकट पर ताल ठोक रहे हैं और मैथिली को बाहरी बताकर जीत की जमीन तैयार कर रहे हैं।

मैथिली के लिए बीजेपी ने झोंकी ताकत

अलीनगर सीट पर मैथिली ठाकुर को जिताने के लिए बीजेपी ने एड़ी चोटी का जोर लगा दिया है, पार्टी की तरफ से केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से लेकर धर्मेंद्र प्रधान तक उनके लिए चुनाव प्रचार कर चुके हैं। यहां तक की धर्मेंद्र प्रधान खुद अलीनगर सीट की निगरानी कर रहे हैं। वैसे तो अलीनगर सीट से कुल 12 उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा ठाकुर की है। उनकी राजनीतिक समझ से ज्यादा उनकी गायन प्रतिभा को लेकर। चाहे नामांकन का दिन हो या अमित शाह के साथ मंच साझा करने वाली उनकी सभा, लोग उनके भाषणों की तुलना में उनकी मधुर गायकी पर अधिक तालियां बजाते हैं।

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केतकी ने बढ़ा दी थी मैथिली की मुश्किल

मैथिली के पक्ष में प्रचार करने अलीनगर पहुंची यूपी की बीजेपी विधायक केतकी सिंह ने मैथिली की मुश्किल बढ़ा दी थी। केतकी आईं तो थीं मैथिली का चुनाव प्रचार करने लेकिन मिथिला पाग का अपमान कर नया बवाल खड़ा कर दिया था। जिसको लेकर केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान सो जनता से माफी तक मांगनी पड़ी थी। इसके अलावा मिथिला पाग पहने मखाने खाने की तस्वीर वायरल होने को लेकर भी मैथिली विरोधियों के निशाने पर आ चुके हैं और सोशल मीडिया पर उनकी जमकर ट्रोलिंग हुई थी।

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