West Bengal SIR: बंगाल मतदाता सूची में भारी फर्जीवाड़ा उजागर, निर्वाचन आयोग ने विस्तृत जांच का दिया आदेश

मतदाता सूचियों के गहन पुनरीक्षण में पश्चिम बंगाल में कई विसंगतियां मिली हैं। 85 लाख से ज्यादा मामलों में नाम गलत हैं। निर्वाचन आयोग ने घर-घर जाकर सत्यापन करने का आदेश दिया है, जबकि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और विपक्षी दलों ने एसआईआर का विरोध किया है।

एडिटेड बाय Naveen Kumar Pandey( विद इनपुट्स फ्रॉम भाषा)
पब्लिश्ड13 Dec 2025, 09:58 AM IST
पश्चिम बंगाल की मतदाता सूची में भारी फर्जीवाड़ा (सांकेतिक तस्वीर)
पश्चिम बंगाल की मतदाता सूची में भारी फर्जीवाड़ा (सांकेतिक तस्वीर)

SIR in West Bengal: पश्चिम बंगाल में मतदाता सूचियों के विशिष्ट गहन पुनरीक्षण (SIR) के पहले चरण में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़े का पता चला है। एसआईआर ने 2002 की मतदाता सूचियों के आधार पर माता-पिता और पारिवारिक मानचित्रण से नए मतदाताओं की पहचान करने में व्यापक विसंगतियों को उजागर किया है। इस स्थिति के कारण निर्वाचन आयोग ने मतदाता प्रगणक प्रपत्रों (Voter enumeration forms) के विस्तृत सत्यापन (Detailed verification) का आदेश दिया है। एक अधिकारी ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।

वोटर लिस्ट की क्रॉस चेकिंग में पकड़ाया भारी फर्जीवाड़ा

मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के एक उच्च पदस्थ सूत्र ने दावा किया कि जारी क्रॉस चेकिंग प्रोसेस में मतदाता डेटा में कई तार्किक गड़बड़ियां मिली हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि 85,01,486 मामलों में पिता के नाम गलत या मेल नहीं खा रहे हैं, जो कुल मतदाताओं का 11.09 प्रतिशत है। उन्होंने यह भी बताया कि 24,21,133 मतदाताओं के छह से अधिक बच्चे हैं और माता-पिता से संबंधित आयु अंतर में भी असंगति पाई गई है।

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मतदाताओं के परिवारों की जांच में हैरतअंगेज मामले

सूत्रों के अनुसार, 11,95,230 मामलों में मतदाता और उनके माता-पिता की आयु का अंतर 15 वर्ष से कम है, जबकि 8,77,736 मामलों में यह 50 वर्ष से अधिक है, जिसे अवास्तविक माना गया है। 45 वर्ष से अधिक आयु के 20,74,256 मतदाताओं को गलत तरीके से नए मतदाता के रूप में चिह्नित किया गया है। इसके अलावा, 13,46,918 प्रविष्टियों में लिंग डेटा में भी त्रुटियां पाई गई हैं, जिससे मतदाता पहचान की सटीकता पर चिंताएं बढ़ गई हैं।

निर्वाचन आयोग ने सभी आवेदन प्रपत्रों का डिजिटलाइज्ड कर दिया है और पुष्टि की है कि प्रभावित मतदाताओं को उनके रिकॉर्ड के सत्यापन और सुधार के लिए सुनवाई के वास्ते बुलाया जाएगा। बूथ स्तरीय अधिकारी सत्यापन के लिए घर-घर जाकर जांच करेंगे।

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एसआईआर का घनघोर विरोध कर रहा है विपक्ष

ध्यान रहे कि प. बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी एसआईआर की विरोध कर रही हैं। वहीं, राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी INDIA गुट के सभी सदस्य दलों ने भी एसआईआर के खिलाफ आवाज बुलंद की है। उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने एसआईआर को पिछले दरवाजे से की जा रही एनएआरसी प्रक्रिया की संज्ञा दी है। संसद में हुई चुनाव सुधार पर चर्चा के दौरान भी सत्ता पक्ष और विपक्ष में एसआईआर पर जोरदार बहस हुई है।

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