
चाहे रोजगार के नाम पर महिलाओं को 10 हजार रुपये देने की बात हो या जीविका दीदियों को 30 हजार रुपये महीना वेतन देने के वादे हों, एनडीए और महागठबंधन की तरफ से ये सियासी चाल है जिसकी मदद से दोनों खेमा महिला वोटरों को अपने वाले में कर लेना चाहता है। इसके अलावा भी दोनों गठबंधन की तरफ से हर उस मुद्दे को अपने चुनावी घोषणापत्र में शामिल करने की पुरजोर कोशिश की गई है जिससे वो महिला मतदाताओं को अपने पाले में कर सकें। क्योंकि बिहार में महिला मतदाताओं का वोट ही तय करता है कि किस पार्टी या किस गठबंधन की सरकार सूबे की सत्ता पर राज करेगी।
बिहार की एनडीए सरकार ने राज्य में चुनावी रणभेरी बजने से पहले ही महिलाओं को अपने पाले में करने के लिए बड़ा दांव चल दिया था। जिसके तहत सरकार ने प्रदेश की 75 हजार महिलाओं को रोजगार करने के लिए 10-10 हजार रुपये दिए थे और रोजगार सफल होने की स्थिति में और दो-दो लाख रुपये देने का वादा किया है। एनडीए के लिहाज से देखें तो ये मास्टर स्ट्रोक है महिला मतदाताओं को अपने वाले में करने के लिए
महागठबंधन की तरफ से महिला रोजगार की काट के तौर पर तेजस्वी यादव ने जीविका दीदियों को 30 हजार रुपये महीना वेतन देने की घोषणा की है। उनके लिए स्थाई नौकरी, अतिरिक्त काम करवाने पर दो हजार रुपये अतिरिक्त मानदेय, उनके लिए गए लोन पर ब्याज माफ होगा, दो वर्ष तक के लिए ब्याज मुक्त कर्ज देने का वादा, 5 लाख तक का बीमा कवर देने की बात कही गई है। महागठबंधन के चुनावी घोषणापत्र को तेजस्वी यादव ने तेजस्वी प्रण नाम दिया है।
नीतीश कुमार ने चुनाव की घोषणा से पहले महिला मतदाताओं को रिझाने के लिए एक और बड़ा दांव चला था और वो दांव था बिहार की सभी सरकारी नौकरियों में महिलाओं को 35 प्रतिशत आरक्षण। नीतीश कुमार ने इस दांव के जरिए तेजस्वी के डोमिसाइल नीति लागू करने के वादे की धार को कुंद करने की कोशिश की। जिसमें सरकारी नौकरियों में डोमिसाइल नीति यानी सिर्फ बिहार के लोगों को नौकरी देने की मांग की जा रही थी।
तेजस्वी यादव ने बिहार की महिलाओं को हर महीने 2500 रुपये प्रति महीने आर्थिक मदद देने का वादा किया है। महिला सुरक्षा के लिए हर जिले में महिला हेल्प डेस्क और विशेष महिला थाने सशक्त किए जाने का वादा किया है, साथ ही महिलाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार से जोड़ने के लिए महिला रोजगार मिशन शुरू किए जाने की बात कही है।
तेजस्वी के माई बहिन योजना की काट के तौर पर नीतीश कुमार ने वृद्धा पेंशन, विधवा पेंशन को 400 रुपये से बढ़ाकर 11 रुपये प्रति महीना कर दिया था। इसके अलावा महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए आर्थिक स्वावलंबन की दिशा में आगे बढ़ने के लिए लखपति दीदी योजना और मिशन महिला करोड़पति शुरू करने की बात कही गई है। एनडीए ने बिहार की एक करोड़ महिलाओं को लखपति दीदी बनाने की घोषणा की है। मिशन करोड़पति के ज़रिए नीतीश सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले 5 वर्षों में बिहार की महिलाएं आत्मनिर्भर बनें और रोजगार के जरिए वो करोड़पति बनें। इसके लिए बैंक लोन, ट्रेनिंग और डिजिटल मार्केटिंग जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने का वादा किया गया है।
साल 2025 के विधानसभा चुनाव में भी महिलाएं फिर से वोट का सबसे बड़ा ध्रुव बनकर उभरी हैं। बिहार में करीब 3.5 करोड़ महिलाएं मतदाता हैं, जो कुल 7.41 करोड़ वोटर के करीब 50 प्रतिशत से थोड़ा कम है। ऐसे में बिहार चुनाव में महिला मतदाताओं की अहमियत को समझते हुए एनडीए और महागठबंधन दोनों तरफ से महिला मतदाताओं को रिझाने के लिए पुरजोर कोशिश की जा रही है और अपने वादे को हर चुनावी मंच से हर दल के नेता जनता के सामने रख रहे हैं।
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