Bihar Election: ना राजनीतिक पार्टियों ना मतदाताओं ने किया परिवारवाद से परहेज, एनडीए के 29 परिवारवादी प्रत्याशी हुए विजयी

राजनीति में परिवारवाद को लेकर खूब सवाल उठाए जाते हैं, खासकर जब चुनाव होने होते हैं लेकिन ये मुद्दा सिर्फ चर्चा तक सीमित नजर आता है। जिसका सबसे ताजा उदाहरण बिहार विधानसभा चुनाव में देखने को मिला। जिसमें किसी पार्टी ने परिवारवाद से परहेज नहीं किया और मतदाताओं पर भी इसका कोई प्रभाव पड़ता नहीं दिखा।

Rajkumar Singh
अपडेटेड17 Nov 2025, 03:38 PM IST
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी(ANI)

बिहार विधानसभा चुनाव में क्या एनडीए और क्या महागठबंधन सभी ने टिकट बंटवारे के दौरान परिवारवाद का बखूबी ध्यान रखा। लेकिन परिवारवाद से जनता ने परहेज किया हो ऐसा मतदान के दौरान नजर नहीं आया, जिसकी तस्दीक बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजे दे रहे हैं। जिसमें एनडीए के परिवारवादी प्रत्याशियों ने मतदाताओं पर खूब मेहरबानी दिखाई। एनडीए की तरफ से 29 प्रत्याशी विधानसभा चुनाव जीतकर माननीय बने हैं।

चुनाव में छाया रहा परिवारवाद

बिहार विधानसभा चुनाव में इस बार सभी प्रमुख राजनीतिक दलों में परिवारवाद स्पष्ट रूप से हावी रहा है। एनडीए के भीतर बीजेपी, जेडीयू, जीतनराम मांझी की हम और उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी RLM चारों दलों में बड़ी संख्या में ऐसे उम्मीदवार मैदान में उतरे, जिनका सीधा संबंध किसी न किसी राजनीतिक परिवार से था। इनमें से 29 उम्मीदवार चुनाव जीतने में भी सफल रहे। बीजेपी ने इस चुनाव में 101 उम्मीदवार उतारे थे, जिनमें से 89 सीटों पर पार्टी ने विजय हासिल की। इन विजेताओं में 11 नेता राजनीतिक परिवारों से आते हैं। इनमें शुमार प्रमुख नामों में सम्राट चौधरी, नीतीश मिश्रा, श्रेयसी सिंह, नितिन नवीन, संजीव चौरसिया, सुजीत कुमार, रमा निषाद, केदार नाथ सिंह, विशाल प्रशांत, राकेश रंजन और त्रिविक्रम नारायण सिंह का नाम शामिल है।

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एनडीए में कितने परिवारवादी प्रत्याशी थे?

एनडीए में जेडीयू ने 101 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे, जिनमें से 85 प्रत्याशियों को जीत मिली। जेडीयू की तरफ से जीत दर्ज करने वाले परिवावादी नेताओं में 11 नाम शामिल हैं। जिनमें ऋतुराज कुमार, चेतन आनंद, कोमल सिंह, शालिनी मिश्रा, मंजीत कुमार सिंह, रंधीर कुमार सिंह, महेश्वर हजारी, शुभेंदु मुकेश, विभा देवी, मनोरमा देवी और अनंत सिंह के नाम शामिल हैं।

जीतन राम मांझी का परिवारवाद

परिवारवाद के मामले में हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा यानी HAM के प्रमुख और केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी सबसे आगे हैं। एनडीए गठबंधन में बंटवारे के तहत जीतन राम मांझी की पार्टी को 6 सीटें मिली थीं। इन 6 सीटों में से 5 सीटों पर जीनत राम मांझी ने अपने परिवार वालों को मैदान में उतारा और सभी जीत भी गए। चुनाव में मांझी की बहू दीपा कुमारी, समधन ज्योति देवी और दामाद प्रफ्फुल मांझी चुनाव जीतकर विधायक बने। पार्टी के 80 प्रतिशत विजयी विधायकों का सीधा संबंध मांझी परिवार से है।

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उपेंद्र कुशवाहा का परिवारवाद

एनडीए गठबंधन के एक और घटक दल राष्ट्रीय लोक मोर्चा यानी RLM प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा को भी 6 सीटें मिली थीं। उपेंद्र कुशवाहा ने अपनी पत्नी स्नेहलता को सासाराम से उम्मीदवार बनाया और जीत दिलाई। वहीं दिनारा से पूर्व मंत्री संतोष सिंह के भाई आलोक कुमार सिंह को टिकट दिया गया और वे भी विजयी रहे। उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी के चार में से दो विधायक परिवारवादी पृष्ठभूमि से आते हैं।

महागठबंधन के परिवारवादी विधायक

बिहार विधानसभा चुनाव में महागठबंधन की तरफ से भी भरपूर परिवारवाद का ख्याल रखा गया था। आरजेडी की तरफ से विजयी हुए 25 प्रत्याशियों में से 5 विधायक परिवारवादी राजनीतिक घराने से ताल्लुक रखते हैं। चुनाव जीतने वाले पांचों आरजेडी के परिवावादी विधायकों का आरजेडी के किसी ना किसी नेता से पुराने संबंध हैं। इनमें सबसे प्रमुख नाम सीवान के रघुनाथपुर विधानसभा सीट से चुनाव जीतने वाले ओसामा शहाब का है जो आरजेडी के पूर्व बाहुबली सांसद शहाबुद्दीन के बेटे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री दरोगा प्रसाद राय की पोती करिश्मा राय, जगदीश शर्मा के बेटे और पूर्व मंत्री राहुल कुमार, और पूर्व सांसद राजेश कुमार के बेटे कुमार सर्वजीत शामिल हैं।

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