बिहार के युवा नेता और पूर्व मंत्री नितिन नबीन ने बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए अपना नामांकन दाखिल कर दिया है। इस दौरान बीजेपी के प्रमुख नेता अमित शाह, राजनाथ सिंह, नितिन गडकरी और जेपी नड्डा मौजूद रहे। बीजेपी नेशनल प्रेसिडेंट के पद के लिए नॉमिनेशन प्रोसेस पार्टी हेडक्वार्टर में चल रहा है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, नितिन नबीन के बीजेपी अध्यक्ष बनने और मोदी 3.0 सरकार के दो साल पूरे होने से पहले संगठन और सरकार- दोनों स्तरों पर बदलाव की प्रक्रिया शुरू की जा रही है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बीजेपी की राष्ट्रीय संगठन टीम का जल्द ही पुनर्गठन किया जाएगा। इसमें खास तौर पर युवा नेताओं को जगह दी जाएगी। नए पदाधिकारियों में ज्यादातर की उम्र 55 साल से कम हो सकती है. राज्यों से नए चेहरे लाकर उन्हें राष्ट्रीय स्तर की अहम जिम्मेदारियां दी जाएंगी। भाजपा में अब तक 11 नेता राष्ट्रीय अध्यक्ष रह चुके हैं। इनमें लालकृष्ण आडवाणी तीन बार अध्यक्ष बने, जबकि राजनाथ सिंह ने दो बार यह जिम्मेदारी संभाली।
नितिन नवीन अकेले उम्मीदवार?
मौजूदा कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन सोमवार को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा से पदभार संभालने के लिए अपना नामांकन दाखिल करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और अन्य शीर्ष नेताओं के समर्थन से, नितिन नवीन के बीजेपी के 12वें राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में निर्विरोध चुने जाने की उम्मीद है, जिससे वह इस पद को संभालने वाले सबसे कम उम्र के व्यक्ति बन जाएंगे। अगर नॉमिनेशन प्रोसेस के दौरान सब कुछ प्लान के मुताबिक होता है, तो नबी मंगलवार को चुने जाएंगे और नेशनल प्रेसिडेंट का पद संभालेंगे।
जानिए कैसे चुना जाता है अध्यक्ष
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव राष्ट्रीय परिषद करती है, जिसमें लगभग 5,708 सदस्य शामिल हैं। इसमें राष्ट्रीय परिषद और सभी राज्य परिषदों के सदस्य शामिल होते हैं, जो देश के 30 से अधिक राज्यों से आते हैं। लेकिन अगर केवल एक नामांकन होता है, तो मतदान की जरूरत नहीं होगी।
पार्टी अध्यक्ष के लिए जरूरी चीजें
बीजेपी की नेशनल काउंसिल और स्टेट काउंसिल के प्रतिनिधियों वाली इलेक्टोरल कॉलेज नए प्रेसिडेंट को फाइनल करेगी। पार्टी संविधान के अनुसार, एक उम्मीदवार को किसी राज्य के इलेक्टोरल कॉलेज के कम से कम 20 सदस्यों द्वारा मिलकर प्रस्तावित किया जाना चाहिए और उसकी कम से कम 15 साल की सदस्यता होनी चाहिए।
2029 लोकसभा चुनाव पर नजर
यह बदलाव 2029 के लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखकर किया जा रहा है। इकोनॉमिक्स टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, पार्टी का मकसद संगठन को मजबूत करना, कार्यकर्ताओं की सक्रियता बढ़ाना और राजनीतिक संदेश को साफ और असरदार बनाना है। नई टीम में ऐसे नेताओं को प्राथमिकता मिलेगी जो पार्टी विचारधारा से जुड़े हों और जिनकी पृष्ठभूमि संघ से रही हो। हालांकि, कुछ नेता बाहर से भी शामिल किए जा सकते हैं।
बीजेपी शासित राज्यों में भी संभावित बदलाव
पार्टी शासित राज्यों में भी हालात के हिसाब से बदलाव पर विचार किया जा रहा है। उत्तर प्रदेश में सामाजिक संतुलन पर चर्चा चल रही है, जिसमें किसी दलित नेता को बड़ी जिम्मेदारी देने की बात भी शामिल है। बिहार और राजस्थान में कैबिनेट बदलाव पर विचार हो रहा है, जबकि मणिपुर में सरकार गठन को अंतिम रूप देने की कोशिश जारी है।