Nitish Cabinet Ministers: नीतीश कुमार कैबिनेट में जातीय समीकरण का संतुलन, RJD, कांग्रेस के हर वार को नाकाम करने की चाल?

बिहार में नीतीश कुमार की सरकार में कैबिनेट मंत्रियों के विभागों का बंटवारा हो गया है, जिसमें जातीय संतुलन को बहुत दूर की रणनीति को ध्यान में रखकर साधने की कोशिश नजर आती है। मंत्रियों के विभागों के बंटवारे हर जाति और समाज को साधने की कोशिश की गई है।

Rajkumar Singh
अपडेटेड22 Nov 2025, 11:49 AM IST
नीतीश कुमार, रामकृपाल यादव, श्रेयसी सिंह
नीतीश कुमार, रामकृपाल यादव, श्रेयसी सिंह(HT)

क्या बिहार सरकार में साल 2029 और 2030 की चुनावी रणनीति को ध्यान में रखते हुए मंत्रियों के विभागों का बंटवारा किया गया है। एनडीए ने बिहार विधानसभा चुनाव में विभागों के बंटवारे से लेकर सरकार बनने के बाद मंत्रिमंडल के बंटवारा तक जातीय समीकरण को ध्यान में रखकर साधने की कोशिश की गई है।

नीतीश मंत्रिमंडल के नए मंत्री

बिहार की नीतीश मंत्रिमंडल में शामिल 26 मंत्रियों में से 9 नेता पहली बार मंत्री बने हैं। पहली बार मंत्री बनने वालों में सबसे बड़ा चेहरा यादव समाज के राम कृपाल यादव का है उसके बाद दूसरा नाम राजपूत समाज की श्रेयसी सिंह का है। इसी तरह लखेंद्र रौशन पासवान, रमा निषाद, अरुण शंकर प्रसाद, संजय सिंह टाइगर, संजय कुमार सिंह, संजय पासवान और दीपक प्रकाश पहली बार मंत्री बनें हैं। इस तरह कैबिनेट में राजपूत, महिला कुशवाहा, यादव, दलित, पसमांदा, ओबीसी और युवा नेताओं का प्रतिनिधित्व नजर आता है।

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राम कृपाल यादव

बीजेपी ने यादव समाज से आने वाले राम कृपाल यादव को मंत्री बनाकर बड़ा दांव खेला है, इनके जरिए पार्टी ने आरजेडी के सबसे मजबूत यावद वोट बैंक को साधने की कोशिश की है। पहली बार बिहार सरकार में मंत्री बनने वाले राम कृपाल यादव साल 2024 में लोकसभा का चुनाव हार गए थे। उन्हें आरजेडी की मीसा भारती ने मात दी थी उसके बाद पार्टी ने उन्हें इस बार विधानसभा चुनाव लड़ाया था।

युवा, महिला और राजपूत श्रेयसी सिंह

जमुई से लगातार दूसरी बार विधायक बनीं श्रेयसी सिंह को मंत्री बनाकर बीजेपी ने एक साथ कई संदेश देने की कोशिश की है। दूसरी बार विधायक बनीं श्रेयसी पहली बार बिहार सरकार में मंत्री बनीं हैं। बीजेपी ने श्रेयसी सिंह को मंत्री बनाकर सरकार में महिला, युवा और अगड़े समाज की भागीदारी का दांव चला है। किसी जमाने में जेडीयू के कद्दावर नेता रहे पूर्व केंद्रीय मंत्री स्वर्गीय दिग्विजय सिंह की बेटी, कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत के लिए मेडल जीत चुकीं श्रेयसी सिंह की साफ-सुथरी छवि है।

संजय सिंह टाइगर

आरा विधानसभा सीट से बीजेपी की टिकट पर चुनाव जीतने वाले संजय सिंह टाइगर भोजपुर क्षेत्र में राजपूत समाज का बड़ा चेहरा हैं, इन्हें भी पहली बार मंत्री बनाया गया है। संजय सिंह बीजेपी के उन नेताओं में शामिल हैं जिन्होंने पार्टी का जमीनी कार्यकर्ता होने से लेकर विधायक और उसके बाद मंत्री बनने तक का सफर तय किया है। संजय सिंह के आक्रामक चुनाव प्रचार का फायदा उन्हें बंपर जीत के तौर पर मिला था।

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संजय कुमार सिंह

चिराग पासवान की पार्टी LJP(R) की टिकट पर चुनाव जीतने वाले संजय सिंह भी राजपूत समाज से आते हैं। संजय सिंह ने हाजीपुर की महुआ विधानसभा सीट पर जीत दर्ज की थी। जहां उन्होंने लालू यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव और आरजेडी उम्मीदवार मुकेश रौशन को मात दी थी। साल 2020 के विधानसभा चुनाव में भी चिराग पासवान ने इसी सीट से संजय सिंह को मैदान में उतारा था।

संजय पासवान

चिराग पासवान की पार्टी LJP(R) की टिकट पर चुनाव जीतने वाले एक और संजय को पहली बार मंत्री बनाया गया है। LJP(R) की टिकट पर बखरी विधानसभा सीट से चुनाव जीतने वाले संजय पासवान भी दलित समाज से आते हैं और LJP(R) के जमीनी कार्यकर्ता माने जाते हैं। संजय पासवान रामविलास पासवान के जमाने से पार्टी से जुड़े हैं।

लखेंद्र रौशन पासवान

बीजेपी की टिकट पर बहादुरगढ़ से चुनव जीतने वाले लखेंद्र रौशन पासवान भी पहली बार मंत्री बने हैं। पासवान समाज से आने वाले लखेंद्र रोशन युवा हैं और अपनी पार्टी के भीतर बहुत तेजी से अपना प्रभाव छोड़ा है। बीजेपी उन्हें एक उभरते हुए युवा दलित चेहरा हैं। जिनके चेहरे की मदद से बीजेपी बिहार के दलित, पिछड़ा और अति पिछड़ा समाज तक पैठ बनाने की कोशिश करेगी।

रमा निषाद

बीजेपी की टिकट पर औराई विधानसभा सीट से चुनाव जीतकर विधायक बनी हैं, इस क्षेत्र में कांग्रेस की मजबूत पकड़ मानी जाती है। वार्ड पार्षद से लेकर विधायक तक का सफर तय करने वाली रमा निषाद को मंत्री बनाकर बीजेपी ने मंत्री बनाया है। अति पिछड़ा समाज की रमा निषाद के चेहरे की मदद से बीजेपी बिहार की पिछड़ी जातियों को साधने की कोशिश की है।

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अरुण शंकर प्रसाद

बीजेपी के वैश्य समुदाय के नेता कहे जाने वाले अरुण शंकर प्रसाद भी पहली बार बिहार सरकार में मंत्री बने हैं। वैश्य समाज से आने वाले अरुण शंकर की गिनती बीजेपी के तेज-तर्रार नेताओं में होती है। वैश्य समाज के अलावा उच्च जाति, मध्यम वर्ग और शहरी मतदाताओं के बीच इनकी अच्छी पकड़ मानी जाती है।

दीपक प्रकाश

उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी RLM से उनके बेटे दीपक प्रकाश को भी पहली बार मंत्री बनाया गया है। हालांकि दीपक अभी ना तो विधायक हैं और ना ही MLC हैं। दीपक प्रकाश को मंत्री पद पर बने रहने के लिए 6 महीने के भीतर विधान परिषद का सदस्य बनना पड़ेगा। उनको मंत्री बनाए जाने को लेकर कई तरह के सवाल उठाए जा रहे हैं। दीपक के पिता उपेंद्र कुशवाहा राज्यसभा सांसद हैं, उनकी मां जीतकर विधायक बनी हैं।

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